SJT Act 15B
धारा 15B · अधिकार अभिलेख का पुनरीक्षण और पुनरीक्षण आदेश के विरुद्ध अपील
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1)
[मुख्य प्रशासक] [उड़ीसा राजपत्र असाधारण संख्या 1836 दिनांक 27.12.2004 (ओए 12 ऑफ 2004) द्वारा प्रतिस्थापित] [या तो अपनी पहल पर या] [उड़ीसा राजपत्र असाधारण संख्या 1451 दिनांक 16.9.2003 (ओए 16 ऑफ 2003) द्वारा सम्मिलित] पुरी के राजा के अलावा किसी अन्य सेवक द्वारा इस संबंध में किए गए आवेदन पर और निर्धारित तरीके से जांच करने के बाद, निम्नलिखित में से किसी भी आधार पर अधिकार अभिलेख में दर्ज किसी भी प्रविष्टि में कोई परिवर्तन करने का आदेश दे सकता है, अर्थात्:(क)
कि ऐसा परिवर्तन किसी नई सामग्री के संज्ञान में आने के कारण आवश्यक है; या(ख)
उसमें दर्ज कोई भी प्रविष्टि मौजूदा तथ्यों से संबंधित नहीं है; या(ग)
कि ऐसी कोई प्रविष्टि अपूर्ण या गलत है;(2)
उपधारा (1) के तहत किसी आदेश से पीड़ित कोई व्यक्ति, आदेश की सूचना प्राप्त होने की तिथि से तीस दिनों के भीतर राज्य सरकार के समक्ष अपील कर सकता है, और इसके बाद राज्य सरकार, आवश्यक जांच करने के बाद और संबंधित पक्षों को सुनवाई का अवसर देने के बाद, ऐसा आदेश दे सकती है जैसा वह उचित समझे।(3)
उपधारा (1) या उपधारा (2) के तहत पारित कोई भी आदेश, उससे पीड़ित किसी भी व्यक्ति को सक्षम क्षेत्राधिकार वाले न्यायालय में अपना कोई अधिकार स्थापित करने से नहीं रोकेगा, परन्तु किसी भी न्यायालय को उक्त आदेश के संचालन पर तब तक रोक लगाने का अधिकार नहीं होगा जब तक कि ऐसे न्यायालय के समक्ष कार्यवाही का अंतिम निपटारा न हो जाए या उससे उत्पन्न होने वाली या उससे संबंधित किसी अपील या आवेदन का निपटारा न हो जाए।इस धारा पर आपका निजी नोट
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