SJT Act 15
धारा 15 · समिति के कर्तव्य
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
इस अधिनियम और इसके अंतर्गत बनाए गए नियमों के प्रावधानों के अधीन रहते हुए, समिति का यह कर्तव्य होगा-
(1)
अधिकार अभिलेख के अनुसार मंदिर की सेवा-पूजा और दैनिक एवं आवधिक नीतियों के उचित निष्पादन की व्यवस्था करना;(2)
तीर्थयात्रियों द्वारा पूजा-अर्चना के उचित निष्पादन के लिए सुविधाएं प्रदान करना;(3)
धन, मूल्यवान प्रतिभूतियों और आभूषणों की सुरक्षित अभिरक्षा सुनिश्चित करने और मंदिर में निहित संपत्तियों के संरक्षण और प्रबंधन के लिए;(4)
मंदिर में व्यवस्था और अनुशासन तथा उचित स्वच्छता की स्थिति बनाए रखना और उसमें चढ़ाए जाने वाले चढ़ावों में स्वच्छता और शुद्धता के उचित मानक को सुनिश्चित करना;(5)
यह सुनिश्चित करना कि विशिष्ट एवं धार्मिक बंदोबस्तियों की निधि दानदाताओं की इच्छा के अनुसार खर्च की जाए, जहाँ तक उन्हें ज्ञात हो;(6)
अपने वेतनभोगी कर्मचारियों को उपयुक्त पारिश्रमिक के भुगतान के लिए प्रावधान करना;(7)
भगवान जगन्नाथ को दान की गई अचल संपत्तियों की सूची तैयार करने और मंदिर में भोग चढ़ाने या किसी भी सेवा के निष्पादन के लिए बनाए गए ट्रस्टों की सूची तैयार करने की व्यवस्था करना;(8)
राज्य सरकार की पूर्व स्वीकृति से काजू के बागान, कैसुरिना के बागान, बागवानी, डेयरी फार्मिंग, मंदिर के अंदर वस्तुओं की बिक्री के लिए खुदरा दुकानों की स्थापना या मंदिर के संसाधनों और आय को बढ़ाने के लिए किसी अन्य वाणिज्यिक उपक्रम के लिए लाभकारी योजना तैयार करना और उसे लागू करना;(9)
मंदिर परिसर के भीतर स्थित किसी भवन या कक्ष को किसी व्यक्ति से वापस लेने के लिए कदम उठाना, यदि उसने वह सेवा देना बंद कर दिया हो जिसके निष्पादन के लिए ऐसा भवन या कक्ष उसे आवंटित किया गया था, या यदि ऐसी सेवा अप्रचलित हो गई हो; और(10)
मंदिर और उसके दान के कुशल प्रबंधन या तीर्थयात्रियों की सुविधा के लिए आकस्मिक और सहायक सभी कार्य करना।इस धारा पर आपका निजी नोट
यह नोट सिर्फ़ आप देख सकते हैं।

