Competition Act 27अध्याय IV · Duties, Powers and Functions of Commission
धारा 27 · आयोग द्वारा समझौतों या प्रभुत्वपूर्ण स्थिति के दुरुपयोग की जांच के बाद जारी किए गए आदेश।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
यदि जांच के बाद आयोग को यह पता चलता है कि धारा 3 में निर्दिष्ट कोई समझौता या किसी प्रमुख स्थिति में स्थित उद्यम की कोई कार्रवाई, धारा 3 या धारा 4 के उल्लंघन में है, तो वह निम्नलिखित में से कोई भी या सभी आदेश पारित कर सकता है, अर्थात्:--
(क) ऐसे समझौते में शामिल किसी उद्यम या उद्यमों के संघ या व्यक्ति या व्यक्तियों के संघ को, जैसा भी मामला हो, निर्देश देना, या प्रभुत्वपूर्ण स्थिति के दुरुपयोग को बंद करने और ऐसे समझौते में पुनः प्रवेश न करने या प्रभुत्वपूर्ण स्थिति के ऐसे दुरुपयोग को बंद करने का निर्देश देना;
2 [(ख) ऐसे प्रत्येक व्यक्ति या उद्यम पर, जो ऐसे समझौते का पक्षकार है या जिसने अपनी प्रमुख स्थिति का दुरुपयोग किया है, ऐसा जुर्माना लगा सकता है, जैसा वह उचित समझे, जो पिछले तीन वित्तीय वर्षों के औसत कारोबार या आय के दस प्रतिशत से अधिक नहीं होगा।
बशर्ते कि यदि धारा 3 में निर्दिष्ट कोई समझौता किसी कार्टेल द्वारा किया गया हो, तो आयोग उस कार्टेल में शामिल प्रत्येक उत्पादक, विक्रेता, वितरक, व्यापारी या सेवा प्रदाता पर ऐसे समझौते के जारी रहने के प्रत्येक वर्ष के लिए उसके लाभ के तीन गुना तक या उसके कारोबार या आय का दस प्रतिशत, जो भी अधिक हो, जुर्माना लगा सकता है।
स्पष्टीकरण 1.--इस खंड के प्रयोजनों के लिए, "टर्नओवर" या "आय" अभिव्यक्ति, जैसा भी मामला हो, का निर्धारण उस तरीके से किया जाएगा जैसा कि विनियमों द्वारा निर्दिष्ट किया जा सकता है।
स्पष्टीकरण 2.--इस खंड के प्रयोजनों के लिए, "टर्नओवर" से तात्पर्य किसी व्यक्ति या उद्यम द्वारा सभी उत्पादों और सेवाओं से प्राप्त कुल टर्नओवर से है।]
3 * * * * *
(घ) यह निर्देश देना कि आयोग द्वारा आदेश में निर्दिष्ट सीमा तक और उस तरीके से समझौतों में संशोधन किया जाएगा;
(ई) संबंधित उद्यमों को आयोग द्वारा पारित किए गए ऐसे अन्य आदेशों का पालन करने और निर्देशों का अनुपालन करने का निर्देश देना, जिसमें यदि कोई लागत हो तो उसका भुगतान भी शामिल है;
4 * * * * *
(जी) ऐसा अन्य आदेश पारित कर सकता है या ऐसे निर्देश जारी कर सकता है जैसा वह उचित समझे:
6. इस धारा के तहत आदेश पारित करते समय, यदि आयोग इस निष्कर्ष पर पहुँचता है कि अधिनियम की धारा 3 या धारा 4 का उल्लंघन करने वाला कोई उद्यम अधिनियम की धारा 5 के स्पष्टीकरण के खंड (ख) में परिभाषित समूह का सदस्य है, और ऐसे समूह के अन्य सदस्य भी ऐसे उल्लंघन के लिए जिम्मेदार हैं या उन्होंने इसमें योगदान दिया है, तो आयोग इस धारा के तहत समूह के ऐसे सदस्यों के विरुद्ध आदेश पारित कर सकता है।
(क) ऐसे समझौते में शामिल किसी उद्यम या उद्यमों के संघ या व्यक्ति या व्यक्तियों के संघ को, जैसा भी मामला हो, निर्देश देना, या प्रभुत्वपूर्ण स्थिति के दुरुपयोग को बंद करने और ऐसे समझौते में पुनः प्रवेश न करने या प्रभुत्वपूर्ण स्थिति के ऐसे दुरुपयोग को बंद करने का निर्देश देना;
2 [(ख) ऐसे प्रत्येक व्यक्ति या उद्यम पर, जो ऐसे समझौते का पक्षकार है या जिसने अपनी प्रमुख स्थिति का दुरुपयोग किया है, ऐसा जुर्माना लगा सकता है, जैसा वह उचित समझे, जो पिछले तीन वित्तीय वर्षों के औसत कारोबार या आय के दस प्रतिशत से अधिक नहीं होगा।
बशर्ते कि यदि धारा 3 में निर्दिष्ट कोई समझौता किसी कार्टेल द्वारा किया गया हो, तो आयोग उस कार्टेल में शामिल प्रत्येक उत्पादक, विक्रेता, वितरक, व्यापारी या सेवा प्रदाता पर ऐसे समझौते के जारी रहने के प्रत्येक वर्ष के लिए उसके लाभ के तीन गुना तक या उसके कारोबार या आय का दस प्रतिशत, जो भी अधिक हो, जुर्माना लगा सकता है।
स्पष्टीकरण 1.--इस खंड के प्रयोजनों के लिए, "टर्नओवर" या "आय" अभिव्यक्ति, जैसा भी मामला हो, का निर्धारण उस तरीके से किया जाएगा जैसा कि विनियमों द्वारा निर्दिष्ट किया जा सकता है।
स्पष्टीकरण 2.--इस खंड के प्रयोजनों के लिए, "टर्नओवर" से तात्पर्य किसी व्यक्ति या उद्यम द्वारा सभी उत्पादों और सेवाओं से प्राप्त कुल टर्नओवर से है।]
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(घ) यह निर्देश देना कि आयोग द्वारा आदेश में निर्दिष्ट सीमा तक और उस तरीके से समझौतों में संशोधन किया जाएगा;
(ई) संबंधित उद्यमों को आयोग द्वारा पारित किए गए ऐसे अन्य आदेशों का पालन करने और निर्देशों का अनुपालन करने का निर्देश देना, जिसमें यदि कोई लागत हो तो उसका भुगतान भी शामिल है;
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(जी) ऐसा अन्य आदेश पारित कर सकता है या ऐसे निर्देश जारी कर सकता है जैसा वह उचित समझे:
6. इस धारा के तहत आदेश पारित करते समय, यदि आयोग इस निष्कर्ष पर पहुँचता है कि अधिनियम की धारा 3 या धारा 4 का उल्लंघन करने वाला कोई उद्यम अधिनियम की धारा 5 के स्पष्टीकरण के खंड (ख) में परिभाषित समूह का सदस्य है, और ऐसे समूह के अन्य सदस्य भी ऐसे उल्लंघन के लिए जिम्मेदार हैं या उन्होंने इसमें योगदान दिया है, तो आयोग इस धारा के तहत समूह के ऐसे सदस्यों के विरुद्ध आदेश पारित कर सकता है।
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