Competition Act 20अध्याय IV · Duties, Powers and Functions of Commission
धारा 20 · आयोग द्वारा संयोजन की जांच।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) आयोग, धारा 5 के खंड (क) में निर्दिष्ट अधिग्रहण या धारा 5 के खंड (ख) में निर्दिष्ट नियंत्रण के अधिग्रहण या धारा 5 के खंड (ग) में निर्दिष्ट विलय या समामेलन या किसी उद्यम के किसी नियंत्रण, शेयरों, मतदान अधिकार या परिसंपत्तियों के अधिग्रहण, धारा के खंड (घ) में निर्दिष्ट विलय या समामेलन से संबंधित अपने स्वयं के ज्ञान या सूचना के आधार पर, यह जांच कर सकता है कि क्या ऐसे संयोजन ने भारत में प्रतिस्पर्धा पर कोई उल्लेखनीय प्रतिकूल प्रभाव डाला है या डालने की संभावना है।
बशर्ते कि आयोग इस उपधारा के अंतर्गत ऐसे संयोजन के प्रभावी होने की तिथि से एक वर्ष की समाप्ति के बाद कोई जांच प्रारंभ नहीं करेगा।
(2) आयोग धारा 6 2 *** की उपधारा (2) के तहत नोटिस प्राप्त होने पर यह जांच करेगा कि क्या उस नोटिस या संदर्भ में निर्दिष्ट संयोजन ने भारत में प्रतिस्पर्धा पर कोई उल्लेखनीय प्रतिकूल प्रभाव डाला है या डालने की संभावना है।
(3) धारा 5 में किसी बात के होते हुए भी, केंद्र सरकार इस अधिनियम के प्रारंभ होने की तिथि से दो वर्ष की अवधि की समाप्ति पर और उसके बाद प्रत्येक दो वर्ष में, आयोग से परामर्श करके, 3 [थोक मूल्य सूचकांक या रुपये या विदेशी मुद्राओं की विनिमय दर में उतार-चढ़ाव या ऐसे कारकों के आधार पर, जो उसकी राय में इस मामले में प्रासंगिक हैं, उस धारा के प्रयोजनों के लिए परिसंपत्तियों का मूल्य या कारोबार का मूल्य या लेनदेन का मूल्य अधिसूचना द्वारा बढ़ाएगी या घटाएगी, या उसी स्तर पर रखेगी।
(4) यह निर्धारित करने के प्रयोजन से कि क्या किसी संयोजन का संबंधित बाजार में प्रतिस्पर्धा पर कोई महत्वपूर्ण प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा या पड़ने की संभावना है, आयोग निम्नलिखित सभी या किसी भी कारक पर उचित ध्यान देगा, अर्थात्:--
(क) बाजार में आयात के माध्यम से प्रतिस्पर्धा का वास्तविक और संभावित स्तर;
(ख) बाजार में प्रवेश के लिए बाधाओं की सीमा;
(सी) बाजार में 4 [एकाग्रता] का स्तर;
(घ) बाजार में प्रतिसंतुलन शक्ति की मात्रा;
(ई) इस बात की संभावना कि संयोजन के परिणामस्वरूप संयोजन में शामिल पक्ष कीमतों या लाभ मार्जिन में महत्वपूर्ण और स्थायी रूप से वृद्धि करने में सक्षम होंगे;
(f) किसी बाजार में प्रभावी प्रतिस्पर्धा की वह सीमा जिसके बने रहने की संभावना है;
(जी) बाजार में विकल्प किस हद तक उपलब्ध हैं या उपलब्ध होने की संभावना है;
(h) किसी संयोजन में शामिल व्यक्तियों या उद्यम की संबंधित बाजार में बाजार हिस्सेदारी,
व्यक्तिगत रूप से और संयोजन के रूप में;
(i) इस बात की संभावना कि संयोजन के परिणामस्वरूप बाजार में एक सशक्त और प्रभावी प्रतियोगी या प्रतियोगियों को हटा दिया जाएगा;
(j) बाजार में ऊर्ध्वाधर एकीकरण की प्रकृति और सीमा;
(k) व्यवसाय के विफल होने की संभावना;
(एल) नवाचार की प्रकृति और सीमा;
(m) आर्थिक विकास में योगदान के माध्यम से सापेक्ष लाभ, किसी भी संयोजन द्वारा जिसका प्रतिस्पर्धा पर उल्लेखनीय प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है या पड़ने की संभावना है;
(n) क्या संयोजन के लाभ, यदि कोई हो, तो संयोजन के प्रतिकूल प्रभाव से अधिक हैं।
बशर्ते कि आयोग इस उपधारा के अंतर्गत ऐसे संयोजन के प्रभावी होने की तिथि से एक वर्ष की समाप्ति के बाद कोई जांच प्रारंभ नहीं करेगा।
(2) आयोग धारा 6 2 *** की उपधारा (2) के तहत नोटिस प्राप्त होने पर यह जांच करेगा कि क्या उस नोटिस या संदर्भ में निर्दिष्ट संयोजन ने भारत में प्रतिस्पर्धा पर कोई उल्लेखनीय प्रतिकूल प्रभाव डाला है या डालने की संभावना है।
(3) धारा 5 में किसी बात के होते हुए भी, केंद्र सरकार इस अधिनियम के प्रारंभ होने की तिथि से दो वर्ष की अवधि की समाप्ति पर और उसके बाद प्रत्येक दो वर्ष में, आयोग से परामर्श करके, 3 [थोक मूल्य सूचकांक या रुपये या विदेशी मुद्राओं की विनिमय दर में उतार-चढ़ाव या ऐसे कारकों के आधार पर, जो उसकी राय में इस मामले में प्रासंगिक हैं, उस धारा के प्रयोजनों के लिए परिसंपत्तियों का मूल्य या कारोबार का मूल्य या लेनदेन का मूल्य अधिसूचना द्वारा बढ़ाएगी या घटाएगी, या उसी स्तर पर रखेगी।
(4) यह निर्धारित करने के प्रयोजन से कि क्या किसी संयोजन का संबंधित बाजार में प्रतिस्पर्धा पर कोई महत्वपूर्ण प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा या पड़ने की संभावना है, आयोग निम्नलिखित सभी या किसी भी कारक पर उचित ध्यान देगा, अर्थात्:--
(क) बाजार में आयात के माध्यम से प्रतिस्पर्धा का वास्तविक और संभावित स्तर;
(ख) बाजार में प्रवेश के लिए बाधाओं की सीमा;
(सी) बाजार में 4 [एकाग्रता] का स्तर;
(घ) बाजार में प्रतिसंतुलन शक्ति की मात्रा;
(ई) इस बात की संभावना कि संयोजन के परिणामस्वरूप संयोजन में शामिल पक्ष कीमतों या लाभ मार्जिन में महत्वपूर्ण और स्थायी रूप से वृद्धि करने में सक्षम होंगे;
(f) किसी बाजार में प्रभावी प्रतिस्पर्धा की वह सीमा जिसके बने रहने की संभावना है;
(जी) बाजार में विकल्प किस हद तक उपलब्ध हैं या उपलब्ध होने की संभावना है;
(h) किसी संयोजन में शामिल व्यक्तियों या उद्यम की संबंधित बाजार में बाजार हिस्सेदारी,
व्यक्तिगत रूप से और संयोजन के रूप में;
(i) इस बात की संभावना कि संयोजन के परिणामस्वरूप बाजार में एक सशक्त और प्रभावी प्रतियोगी या प्रतियोगियों को हटा दिया जाएगा;
(j) बाजार में ऊर्ध्वाधर एकीकरण की प्रकृति और सीमा;
(k) व्यवसाय के विफल होने की संभावना;
(एल) नवाचार की प्रकृति और सीमा;
(m) आर्थिक विकास में योगदान के माध्यम से सापेक्ष लाभ, किसी भी संयोजन द्वारा जिसका प्रतिस्पर्धा पर उल्लेखनीय प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है या पड़ने की संभावना है;
(n) क्या संयोजन के लाभ, यदि कोई हो, तो संयोजन के प्रतिकूल प्रभाव से अधिक हैं।
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