NI Act 143Aअध्याय XVII · Of Penalties in Case of Dishonour of Certain Cheques for Insufficiency of Funds in the Accounts
धारा 143A · अंतरिम मुआवजे को निर्देशित करने का अधिकार।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
1 [ 143ए. अंतरिम मुआवजे का निर्देश देने की शक्ति ।--(1) दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (2 ऑफ 1974) में किसी बात के होते हुए भी, धारा 138 के तहत किसी अपराध की सुनवाई करने वाला न्यायालय चेक के जारीकर्ता को शिकायतकर्ता को अंतरिम मुआवजा देने का आदेश दे सकता है--
(क) संक्षिप्त सुनवाई या समन मामले में, जहां वह शिकायत में लगाए गए आरोप के लिए दोषी नहीं होने का दावा करता है; और
(ख) किसी अन्य मामले में, आरोप तय होने पर।
(2) उपधारा (1) के अधीन अंतरिम मुआवजा चेक की राशि के बीस प्रतिशत से अधिक नहीं होगा।
(3) अंतरिम मुआवजा उपधारा (1) के तहत आदेश की तारीख से साठ दिनों के भीतर या चेक जारीकर्ता द्वारा पर्याप्त कारण बताए जाने पर न्यायालय द्वारा निर्देशित तीस दिनों से अधिक की अतिरिक्त अवधि के भीतर दिया जाएगा।
(4) यदि चेक जारीकर्ता को बरी कर दिया जाता है, तो न्यायालय शिकायतकर्ता को आदेश देगा कि वह चेक जारीकर्ता को अंतरिम मुआवजे की राशि, संबंधित वित्तीय वर्ष के प्रारंभ में भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा प्रकाशित बैंक दर पर ब्याज सहित, आदेश की तिथि से साठ दिनों के भीतर, या शिकायतकर्ता द्वारा पर्याप्त कारण बताए जाने पर न्यायालय द्वारा निर्देशित तीस दिनों से अधिक की अतिरिक्त अवधि के भीतर, वापस कर दे।
(5) इस धारा के अधीन देय अंतरिम मुआवजा दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) की धारा 421 के अधीन जुर्माने के समान वसूला जा सकता है।
(6) दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) की धारा 138 के तहत लगाए गए जुर्माने की राशि या धारा 357 के तहत दिए गए मुआवजे की राशि में से इस धारा के तहत अंतरिम मुआवजे के रूप में भुगतान या वसूली गई राशि को घटा दिया जाएगा।]
(क) संक्षिप्त सुनवाई या समन मामले में, जहां वह शिकायत में लगाए गए आरोप के लिए दोषी नहीं होने का दावा करता है; और
(ख) किसी अन्य मामले में, आरोप तय होने पर।
(2) उपधारा (1) के अधीन अंतरिम मुआवजा चेक की राशि के बीस प्रतिशत से अधिक नहीं होगा।
(3) अंतरिम मुआवजा उपधारा (1) के तहत आदेश की तारीख से साठ दिनों के भीतर या चेक जारीकर्ता द्वारा पर्याप्त कारण बताए जाने पर न्यायालय द्वारा निर्देशित तीस दिनों से अधिक की अतिरिक्त अवधि के भीतर दिया जाएगा।
(4) यदि चेक जारीकर्ता को बरी कर दिया जाता है, तो न्यायालय शिकायतकर्ता को आदेश देगा कि वह चेक जारीकर्ता को अंतरिम मुआवजे की राशि, संबंधित वित्तीय वर्ष के प्रारंभ में भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा प्रकाशित बैंक दर पर ब्याज सहित, आदेश की तिथि से साठ दिनों के भीतर, या शिकायतकर्ता द्वारा पर्याप्त कारण बताए जाने पर न्यायालय द्वारा निर्देशित तीस दिनों से अधिक की अतिरिक्त अवधि के भीतर, वापस कर दे।
(5) इस धारा के अधीन देय अंतरिम मुआवजा दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) की धारा 421 के अधीन जुर्माने के समान वसूला जा सकता है।
(6) दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) की धारा 138 के तहत लगाए गए जुर्माने की राशि या धारा 357 के तहत दिए गए मुआवजे की राशि में से इस धारा के तहत अंतरिम मुआवजे के रूप में भुगतान या वसूली गई राशि को घटा दिया जाएगा।]
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