पाठ लगभग अपरिवर्तित है
IPC धारा 234 अब BNS धारा 181 है
धारा 234 - भारतीय सिक्के के कूटकरण के लिए उपकरण बनाना या बेचना
पुराना कानून
IPC §234
धारा 234 - भारतीय सिक्के के कूटकरण के लिए उपकरण बनाना या बेचना
भारतीय सिक्के के कूटकरण के लिए उपकरण बनाना या बेचना
जो कोई किसी डाई या उपकरण को भारतीय सिक्के के कूटकरण के लिए उपयोग में लाए जाने के प्रयोजन से, या यह जानते हुए या यह विश्वास करने का कारण रखते हुए कि वह भारतीय सिक्के के कूटकरण में उपयोग में लाए जाने के लिए आशयित है, बनाएगा या सुधारेगा या बनाने या सुधारने की प्रक्रिया के किसी भाग को करेगा अथवा खरीदेगा, बेचेगा या व्ययनित करेगा वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी, दंडित किया जाएगा और जुर्माने से भी दंडनीय होगा ।
पूरा पढ़ें: IPC §234जो कोई किसी डाई या उपकरण को भारतीय सिक्के के कूटकरण के लिए उपयोग में लाए जाने के प्रयोजन से, या यह जानते हुए या यह विश्वास करने का कारण रखते हुए कि वह भारतीय सिक्के के कूटकरण में उपयोग में लाए जाने के लिए आशयित है, बनाएगा या सुधारेगा या बनाने या सुधारने की प्रक्रिया के किसी भाग को करेगा अथवा खरीदेगा, बेचेगा या व्ययनित करेगा वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी, दंडित किया जाएगा और जुर्माने से भी दंडनीय होगा ।
नया कानून
BNS §181
सिक्कों, सरकारी स्टाम्प, करेंसी नोटों या बैंक नोटों की जालसाजी या नकली बनाने के लिए उपकरण या सामग्री बनाना या रखना।
जो कोई भी किसी सिक्के, सरकार द्वारा राजस्व के उद्देश्य से जारी किए गए स्टाम्प, करेंसी नोट या बैंक नोट की जालसाजी या नकली बनाने के उद्देश्य से किसी मशीनरी, डाई, उपकरण या सामग्री का निर्माण या मरम्मत करता है, या निर्माण या मरम्मत की प्रक्रिया का कोई भाग करता है, या उसे खरीदता या बेचता है या उसका निपटान करता है, या अपने कब्जे में रखता है, या यह जानते हुए या यह मानने का कारण रखते हुए कि इसका उपयोग सरकार द्वारा राजस्व के उद्देश्य से जारी किए गए किसी सिक्के, स्टाम्प, करेंसी नोट या बैंक नोट की जालसाजी या नकली बनाने के लिए किया जाना है, उसे आजीवन कारावास या दस वर्ष तक की अवधि के लिए किसी भी प्रकार के कारावास से दंडित किया जाएगा, और वह जुर्माने का भी हकदार होगा।
पूरा पढ़ें: BNS §1811 जुलाई 2024 से पहले दर्ज मामलों पर पुराना कानून लागू रहता है। यह जानकारी शैक्षिक है, कानूनी सलाह नहीं।
