पाठ लगभग अपरिवर्तित है
BNSS धारा 268 अब CrPC धारा 245 है
जब आरोपी को बरी कर दिया जाएगा।
पुराना कानून
BNSS §268
जब आरोपी को बरी कर दिया जाएगा।
(1) यदि धारा 267 में निर्दिष्ट सभी साक्ष्यों पर विचार करने के बाद, मजिस्ट्रेट, दर्ज किए जाने वाले कारणों से, यह मानता है कि अभियुक्त के विरुद्ध कोई मामला नहीं बनता है, जो कि खंडन न होने पर उसकी दोषसिद्धि को उचित ठहराएगा, तो मजिस्ट्रेट उसे बरी कर देगा।
(2) इस धारा में ऐसा कुछ भी नहीं माना जाएगा जिससे मजिस्ट्रेट को मामले के किसी भी पूर्व चरण में आरोपी को बरी करने से रोका जा सके, यदि मजिस्ट्रेट द्वारा दर्ज किए जाने वाले कारणों से वह आरोप को निराधार मानता है।
पूरा पढ़ें: BNSS §268(2) इस धारा में ऐसा कुछ भी नहीं माना जाएगा जिससे मजिस्ट्रेट को मामले के किसी भी पूर्व चरण में आरोपी को बरी करने से रोका जा सके, यदि मजिस्ट्रेट द्वारा दर्ज किए जाने वाले कारणों से वह आरोप को निराधार मानता है।
नया कानून
CrPC §245
धारा 245. अभियुक्त कब उन्मोचित किया जाएगा
245. अभियुक्त कब उन्मोचित किया जाएगा
(1) यदि धारा 244 में निर्दिष्ट सब साक्ष्य ले लेने पर मजिस्ट्रेट, ऐसे कारणों से जो अभिलिखित किए जाएंगे, यह समझता है कि अभियुक्त के विरुद्ध ऐसा कोई मामला नहीं बनाया गया है, जो यदि उसका खंडन न किया जाए तो उसकी दोषसिद्धि को न्यायानुमत ठहराएगा, तो मजिस्ट्रेट उसे उन्मोचित कर देगा।
(2) इस धारा की कोई बात मजिस्ट्रेट को मामले के किसी पूर्ववर्ती प्रक्रम में अभियुक्त को उन्मोचित करने से निवारित करने वाली न समझी जाएगी, यदि ऐसे मजिस्ट्रेट द्वारा अभिलिखित किए जाने वाले कारणों से वह आरोप को निराधार समझता है।
राज्य संशोधन
पश्चिमी बंगाल:
धारा 245 में, उपधारा (2) के पश्चात् निम्नलिखित उपधारा अंतःस्थापित की जाएगी, अर्थात्:—
"(3) यदि धारा 244 में निर्दिष्ट साक्ष्य अभियुक्त की हाजिरी की तारीख से चार वर्ष के भीतर अभियोजन के समर्थन में पेश नहीं किए जाते, तो मजिस्ट्रेट अभियुक्त को उन्मोचित कर देगा, जब तक कि अभियोजन मजिस्ट्रेट का यह समाधान न कर दे कि पहले से पेश किए गए साक्ष्य पर और विशेष कारणों से यह उपधारणा करने का आधार है कि अभियुक्त को उन्मोचित करना न्याय के हित में नहीं होगा।"
[पश्चिमी बंगाल अधिनियम 1988 का 24, धारा 5 द्वारा]
पूरा पढ़ें: CrPC §245(1) यदि धारा 244 में निर्दिष्ट सब साक्ष्य ले लेने पर मजिस्ट्रेट, ऐसे कारणों से जो अभिलिखित किए जाएंगे, यह समझता है कि अभियुक्त के विरुद्ध ऐसा कोई मामला नहीं बनाया गया है, जो यदि उसका खंडन न किया जाए तो उसकी दोषसिद्धि को न्यायानुमत ठहराएगा, तो मजिस्ट्रेट उसे उन्मोचित कर देगा।
(2) इस धारा की कोई बात मजिस्ट्रेट को मामले के किसी पूर्ववर्ती प्रक्रम में अभियुक्त को उन्मोचित करने से निवारित करने वाली न समझी जाएगी, यदि ऐसे मजिस्ट्रेट द्वारा अभिलिखित किए जाने वाले कारणों से वह आरोप को निराधार समझता है।
राज्य संशोधन
पश्चिमी बंगाल:
धारा 245 में, उपधारा (2) के पश्चात् निम्नलिखित उपधारा अंतःस्थापित की जाएगी, अर्थात्:—
"(3) यदि धारा 244 में निर्दिष्ट साक्ष्य अभियुक्त की हाजिरी की तारीख से चार वर्ष के भीतर अभियोजन के समर्थन में पेश नहीं किए जाते, तो मजिस्ट्रेट अभियुक्त को उन्मोचित कर देगा, जब तक कि अभियोजन मजिस्ट्रेट का यह समाधान न कर दे कि पहले से पेश किए गए साक्ष्य पर और विशेष कारणों से यह उपधारणा करने का आधार है कि अभियुक्त को उन्मोचित करना न्याय के हित में नहीं होगा।"
[पश्चिमी बंगाल अधिनियम 1988 का 24, धारा 5 द्वारा]
1 जुलाई 2024 से पहले दर्ज मामलों पर पुराना कानून लागू रहता है। यह जानकारी शैक्षिक है, कानूनी सलाह नहीं।

