पुराना कानून
BNSS §266
बचाव पक्ष के साक्ष्य।
(1) इसके बाद अभियुक्त को अपना बचाव करने और अपना साक्ष्य प्रस्तुत करने के लिए कहा जाएगा; और यदि अभियुक्त कोई लिखित बयान देता है, तो मजिस्ट्रेट उसे अभिलेख में दर्ज करेगा।
(2) यदि अभियुक्त, अपना बचाव प्रस्तुत करने के बाद, किसी गवाह की परीक्षा या जिरह के उद्देश्य से उसकी उपस्थिति को बाध्य करने, या किसी दस्तावेज या अन्य वस्तु को प्रस्तुत करने के लिए मजिस्ट्रेट से कोई प्रक्रिया जारी करने का अनुरोध करता है, तो मजिस्ट्रेट ऐसी प्रक्रिया जारी करेगा, जब तक कि वह यह न समझे कि ऐसा आवेदन उत्पीड़न, विलंब या न्याय के उद्देश्यों को विफल करने के उद्देश्य से किए जाने के कारण अस्वीकार कर दिया जाना चाहिए, और ऐसे आधार को वह लिखित रूप में दर्ज करेगा।
बशर्ते कि जब अभियुक्त ने अपना बचाव शुरू करने से पहले किसी गवाह से जिरह की हो या उसे जिरह करने का अवसर मिला हो, तो इस धारा के तहत ऐसे गवाह की उपस्थिति अनिवार्य नहीं की जाएगी, जब तक कि मजिस्ट्रेट संतुष्ट न हो कि यह न्याय के उद्देश्यों के लिए आवश्यक है।
इसके अलावा, इस उपधारा के अंतर्गत किसी गवाह की जांच राज्य सरकार द्वारा अधिसूचित किए जाने वाले निर्दिष्ट स्थान पर ऑडियो-वीडियो इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों से की जा सकती है।
(3) मजिस्ट्रेट उपधारा (2) के तहत आवेदन पर किसी गवाह को बुलाने से पहले यह मांग कर सकता है कि मुकदमे के प्रयोजनों के लिए उपस्थित होने में गवाह द्वारा किए गए उचित व्यय न्यायालय में जमा किए जाएं।
पूरा पढ़ें: BNSS §266(2) यदि अभियुक्त, अपना बचाव प्रस्तुत करने के बाद, किसी गवाह की परीक्षा या जिरह के उद्देश्य से उसकी उपस्थिति को बाध्य करने, या किसी दस्तावेज या अन्य वस्तु को प्रस्तुत करने के लिए मजिस्ट्रेट से कोई प्रक्रिया जारी करने का अनुरोध करता है, तो मजिस्ट्रेट ऐसी प्रक्रिया जारी करेगा, जब तक कि वह यह न समझे कि ऐसा आवेदन उत्पीड़न, विलंब या न्याय के उद्देश्यों को विफल करने के उद्देश्य से किए जाने के कारण अस्वीकार कर दिया जाना चाहिए, और ऐसे आधार को वह लिखित रूप में दर्ज करेगा।
बशर्ते कि जब अभियुक्त ने अपना बचाव शुरू करने से पहले किसी गवाह से जिरह की हो या उसे जिरह करने का अवसर मिला हो, तो इस धारा के तहत ऐसे गवाह की उपस्थिति अनिवार्य नहीं की जाएगी, जब तक कि मजिस्ट्रेट संतुष्ट न हो कि यह न्याय के उद्देश्यों के लिए आवश्यक है।
इसके अलावा, इस उपधारा के अंतर्गत किसी गवाह की जांच राज्य सरकार द्वारा अधिसूचित किए जाने वाले निर्दिष्ट स्थान पर ऑडियो-वीडियो इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों से की जा सकती है।
(3) मजिस्ट्रेट उपधारा (2) के तहत आवेदन पर किसी गवाह को बुलाने से पहले यह मांग कर सकता है कि मुकदमे के प्रयोजनों के लिए उपस्थित होने में गवाह द्वारा किए गए उचित व्यय न्यायालय में जमा किए जाएं।
नया कानून
CrPC §243
धारा 243. प्रतिरक्षा के लिए साक्ष्य
243. प्रतिरक्षा के लिए साक्ष्य
(1) तब अभियुक्त से यह अपेक्षा की जाएगी कि वह अपनी प्रतिरक्षा आरंभ करे और अपना साक्ष्य पेश करे; और यदि अभियुक्त कोई लिखित कथन देता है, तो मजिस्ट्रेट उसे अभिलेख के साथ फाइल करेगा।
(2) यदि अभियुक्त, अपनी प्रतिरक्षा आरंभ कर देने के पश्चात्, मजिस्ट्रेट से यह आवेदन करता है कि वह किसी साक्षी की परीक्षा या प्रतिपरीक्षा के प्रयोजन के लिए उसकी हाजिरी के लिए, अथवा किसी दस्तावेज या अन्य चीज को पेश करने के लिए विवश करने हेतु कोई आदेशिका जारी करे, तो मजिस्ट्रेट ऐसी आदेशिका जारी करेगा, जब तक कि वह यह न समझे कि ऐसा आवेदन इस आधार पर नामंजूर किया जाना चाहिए कि वह तंग करने के या विलंब के प्रयोजन से अथवा न्याय के उद्देश्यों को विफल करने के लिए किया गया है, और ऐसा आधार उसके द्वारा लिखित रूप में अभिलिखित किया जाएगा:
परन्तु जब अभियुक्त ने अपनी प्रतिरक्षा आरंभ करने से पहले किसी साक्षी की प्रतिपरीक्षा कर ली है या उसकी प्रतिपरीक्षा करने का अवसर पा लिया है, तब ऐसे साक्षी की हाजिरी इस धारा के अधीन तब तक विवश नहीं की जाएगी, जब तक कि मजिस्ट्रेट का यह समाधान न हो जाए कि वह न्याय के उद्देश्यों के लिए आवश्यक है।
(3) मजिस्ट्रेट, उपधारा (2) के अधीन किसी आवेदन पर किसी साक्षी को समन करने से पहले, यह अपेक्षा कर सकेगा कि विचारण के प्रयोजनों के लिए हाजिर होने में साक्षी द्वारा उपगत युक्तियुक्त व्यय न्यायालय में जमा किए जाएं।
पूरा पढ़ें: CrPC §243(1) तब अभियुक्त से यह अपेक्षा की जाएगी कि वह अपनी प्रतिरक्षा आरंभ करे और अपना साक्ष्य पेश करे; और यदि अभियुक्त कोई लिखित कथन देता है, तो मजिस्ट्रेट उसे अभिलेख के साथ फाइल करेगा।
(2) यदि अभियुक्त, अपनी प्रतिरक्षा आरंभ कर देने के पश्चात्, मजिस्ट्रेट से यह आवेदन करता है कि वह किसी साक्षी की परीक्षा या प्रतिपरीक्षा के प्रयोजन के लिए उसकी हाजिरी के लिए, अथवा किसी दस्तावेज या अन्य चीज को पेश करने के लिए विवश करने हेतु कोई आदेशिका जारी करे, तो मजिस्ट्रेट ऐसी आदेशिका जारी करेगा, जब तक कि वह यह न समझे कि ऐसा आवेदन इस आधार पर नामंजूर किया जाना चाहिए कि वह तंग करने के या विलंब के प्रयोजन से अथवा न्याय के उद्देश्यों को विफल करने के लिए किया गया है, और ऐसा आधार उसके द्वारा लिखित रूप में अभिलिखित किया जाएगा:
परन्तु जब अभियुक्त ने अपनी प्रतिरक्षा आरंभ करने से पहले किसी साक्षी की प्रतिपरीक्षा कर ली है या उसकी प्रतिपरीक्षा करने का अवसर पा लिया है, तब ऐसे साक्षी की हाजिरी इस धारा के अधीन तब तक विवश नहीं की जाएगी, जब तक कि मजिस्ट्रेट का यह समाधान न हो जाए कि वह न्याय के उद्देश्यों के लिए आवश्यक है।
(3) मजिस्ट्रेट, उपधारा (2) के अधीन किसी आवेदन पर किसी साक्षी को समन करने से पहले, यह अपेक्षा कर सकेगा कि विचारण के प्रयोजनों के लिए हाजिर होने में साक्षी द्वारा उपगत युक्तियुक्त व्यय न्यायालय में जमा किए जाएं।
1 जुलाई 2024 से पहले दर्ज मामलों पर पुराना कानून लागू रहता है। यह जानकारी शैक्षिक है, कानूनी सलाह नहीं।

