LSA Act 6अध्याय III · State Legal Services Authority
धारा 6 · राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण का गठन।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
1 [6. राज्य विधि सेवा प्राधिकरण का गठन.— (1) प्रत्येक राज्य सरकार राज्य के लिए विधि सेवा प्राधिकरण कहलाने वाला एक निकाय गठित करेगी, जो इस अधिनियम के अधीन किसी राज्य प्राधिकरण को प्रदत्त या सौंपे गए अधिकारों का प्रयोग करेगा और कार्यों का निष्पादन करेगा।
(2) राज्य प्राधिकरण में निम्नलिखित सदस्य होंगे—
(क) उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश, जो मुख्य संरक्षक होंगे;
(ख) उच्च न्यायालय का सेवारत या सेवानिवृत्त न्यायाधीश, जिसे राज्यपाल द्वारा उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के परामर्श से मनोनीत किया जाएगा, जो कार्यकारी अध्यक्ष होगा; और
(ग) राज्य सरकार द्वारा निर्धारित अनुभव एवं योग्यताओं वाले अन्य सदस्यों की ऐसी संख्या, जिन्हें उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश से परामर्श करके राज्य सरकार द्वारा मनोनीत किया जाएगा।
(3) राज्य सरकार, उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश से परामर्श करके, राज्य उच्च न्यायिक सेवा से संबंधित किसी व्यक्ति को, जिसका पद जिला न्यायाधीश से कम न हो, राज्य प्राधिकरण के सदस्य-सचिव के रूप में नियुक्त करेगी, ताकि वह राज्य प्राधिकरण के कार्यकारी अध्यक्ष के अधीन ऐसी शक्तियों का प्रयोग कर सके और ऐसे कर्तव्यों का पालन कर सके, जैसा कि उस सरकार द्वारा निर्धारित किया जाए या जैसा कि उस प्राधिकरण के कार्यकारी अध्यक्ष द्वारा उसे सौंपा जाए।
बशर्ते कि राज्य प्राधिकरण के गठन की तिथि से ठीक पहले राज्य विधिक सहायता एवं परामर्श बोर्ड के सचिव के रूप में कार्यरत व्यक्ति को उस प्राधिकरण के सदस्य-सचिव के रूप में नियुक्त किया जा सकता है, भले ही वह इस उपधारा के तहत इस प्रकार नियुक्त होने के योग्य न हो, अधिकतम पांच वर्ष की अवधि के लिए।
(4) राज्य प्राधिकरण के सदस्यों और सदस्य-सचिव के कार्यकाल और उससे संबंधित अन्य शर्तें ऐसी होंगी जैसी राज्य सरकार द्वारा उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश से परामर्श करके निर्धारित की जाएंगी।
(5) राज्य प्राधिकरण इस अधिनियम के अधीन अपने कार्यों के कुशल निर्वहन के लिए उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश से परामर्श करके राज्य सरकार द्वारा निर्धारित संख्या में अधिकारियों और अन्य कर्मचारियों की नियुक्ति कर सकता है।
(6) राज्य प्राधिकरण के अधिकारी और अन्य कर्मचारी ऐसे वेतन और भत्तों के हकदार होंगे तथा ऐसी अन्य सेवा शर्तों के अधीन होंगे जो राज्य सरकार द्वारा उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के परामर्श से निर्धारित की जा सकती हैं।
(7) राज्य प्राधिकरण के प्रशासनिक व्यय, जिनमें सदस्य-सचिव, अधिकारियों और राज्य प्राधिकरण के अन्य कर्मचारियों को देय वेतन, भत्ते और पेंशन शामिल हैं, राज्य की समेकित निधि से वहन किए जाएंगे।
(8) राज्य प्राधिकरण के सभी आदेश और निर्णय राज्य प्राधिकरण के कार्यकारी अध्यक्ष द्वारा विधिवत अधिकृत सदस्य-सचिव या राज्य प्राधिकरण के किसी अन्य अधिकारी द्वारा प्रमाणित किए जाएंगे।
(9) राज्य प्राधिकरण का कोई भी कार्य या कार्यवाही केवल इस आधार पर अमान्य नहीं होगी कि राज्य प्राधिकरण में कोई रिक्ति है या उसके गठन में कोई दोष है।]
(2) राज्य प्राधिकरण में निम्नलिखित सदस्य होंगे—
(क) उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश, जो मुख्य संरक्षक होंगे;
(ख) उच्च न्यायालय का सेवारत या सेवानिवृत्त न्यायाधीश, जिसे राज्यपाल द्वारा उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के परामर्श से मनोनीत किया जाएगा, जो कार्यकारी अध्यक्ष होगा; और
(ग) राज्य सरकार द्वारा निर्धारित अनुभव एवं योग्यताओं वाले अन्य सदस्यों की ऐसी संख्या, जिन्हें उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश से परामर्श करके राज्य सरकार द्वारा मनोनीत किया जाएगा।
(3) राज्य सरकार, उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश से परामर्श करके, राज्य उच्च न्यायिक सेवा से संबंधित किसी व्यक्ति को, जिसका पद जिला न्यायाधीश से कम न हो, राज्य प्राधिकरण के सदस्य-सचिव के रूप में नियुक्त करेगी, ताकि वह राज्य प्राधिकरण के कार्यकारी अध्यक्ष के अधीन ऐसी शक्तियों का प्रयोग कर सके और ऐसे कर्तव्यों का पालन कर सके, जैसा कि उस सरकार द्वारा निर्धारित किया जाए या जैसा कि उस प्राधिकरण के कार्यकारी अध्यक्ष द्वारा उसे सौंपा जाए।
बशर्ते कि राज्य प्राधिकरण के गठन की तिथि से ठीक पहले राज्य विधिक सहायता एवं परामर्श बोर्ड के सचिव के रूप में कार्यरत व्यक्ति को उस प्राधिकरण के सदस्य-सचिव के रूप में नियुक्त किया जा सकता है, भले ही वह इस उपधारा के तहत इस प्रकार नियुक्त होने के योग्य न हो, अधिकतम पांच वर्ष की अवधि के लिए।
(4) राज्य प्राधिकरण के सदस्यों और सदस्य-सचिव के कार्यकाल और उससे संबंधित अन्य शर्तें ऐसी होंगी जैसी राज्य सरकार द्वारा उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश से परामर्श करके निर्धारित की जाएंगी।
(5) राज्य प्राधिकरण इस अधिनियम के अधीन अपने कार्यों के कुशल निर्वहन के लिए उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश से परामर्श करके राज्य सरकार द्वारा निर्धारित संख्या में अधिकारियों और अन्य कर्मचारियों की नियुक्ति कर सकता है।
(6) राज्य प्राधिकरण के अधिकारी और अन्य कर्मचारी ऐसे वेतन और भत्तों के हकदार होंगे तथा ऐसी अन्य सेवा शर्तों के अधीन होंगे जो राज्य सरकार द्वारा उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के परामर्श से निर्धारित की जा सकती हैं।
(7) राज्य प्राधिकरण के प्रशासनिक व्यय, जिनमें सदस्य-सचिव, अधिकारियों और राज्य प्राधिकरण के अन्य कर्मचारियों को देय वेतन, भत्ते और पेंशन शामिल हैं, राज्य की समेकित निधि से वहन किए जाएंगे।
(8) राज्य प्राधिकरण के सभी आदेश और निर्णय राज्य प्राधिकरण के कार्यकारी अध्यक्ष द्वारा विधिवत अधिकृत सदस्य-सचिव या राज्य प्राधिकरण के किसी अन्य अधिकारी द्वारा प्रमाणित किए जाएंगे।
(9) राज्य प्राधिकरण का कोई भी कार्य या कार्यवाही केवल इस आधार पर अमान्य नहीं होगी कि राज्य प्राधिकरण में कोई रिक्ति है या उसके गठन में कोई दोष है।]
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