FSS Act 18अध्याय III · General Principles of Food Safety
धारा 18 · अधिनियम के प्रशासन में पालन किए जाने वाले सामान्य सिद्धांत।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
केंद्र सरकार, राज्य सरकारें, खाद्य प्राधिकरण और अन्य एजेंसियां, जैसा भी मामला हो, इस अधिनियम के प्रावधानों को लागू करते समय निम्नलिखित सिद्धांतों द्वारा निर्देशित होंगी, अर्थात्:--
(1) (क) खाद्य सुरक्षा मानकों और प्रथाओं के संदर्भ में सभी प्रकार के खाद्य व्यापार में निष्पक्ष प्रथाओं सहित मानव जीवन और स्वास्थ्य की सुरक्षा और उपभोक्ताओं के हितों की सुरक्षा के उचित स्तर को प्राप्त करने का प्रयास करना;
(ख) जोखिम प्रबंधन करना जिसमें जोखिम मूल्यांकन के परिणामों और अन्य कारकों को ध्यान में रखना शामिल होगा जो खाद्य प्राधिकरण की राय में विचाराधीन मामले के लिए प्रासंगिक हैं और जहां परिस्थितियां प्रासंगिक हैं, विनियमों के सामान्य उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए;
(ग) जहां किसी विशिष्ट परिस्थिति में, उपलब्ध जानकारी के आकलन के आधार पर, स्वास्थ्य पर हानिकारक प्रभावों की संभावना की पहचान की जाती है, लेकिन वैज्ञानिक अनिश्चितता बनी रहती है, तो अधिक व्यापक जोखिम मूल्यांकन के लिए आगे की वैज्ञानिक जानकारी प्राप्त होने तक, स्वास्थ्य सुरक्षा के उचित स्तर को सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक अस्थायी जोखिम प्रबंधन उपाय अपनाए जा सकते हैं;
(घ) खंड (ग) के आधार पर अपनाए गए उपाय आनुपातिक होंगे और व्यापार को उतना ही प्रतिबंधित करेंगे जितना कि उचित स्तर की स्वास्थ्य सुरक्षा प्राप्त करने के लिए आवश्यक है, तकनीकी और आर्थिक व्यवहार्यता और विचाराधीन मामले में उचित और उपयुक्त माने जाने वाले अन्य कारकों को ध्यान में रखते हुए;
(ई) अपनाए गए उपायों की समीक्षा उचित समयावधि के भीतर की जाएगी, जो जीवन या स्वास्थ्य के लिए पहचाने गए जोखिम की प्रकृति और वैज्ञानिक अनिश्चितता को स्पष्ट करने और अधिक व्यापक जोखिम मूल्यांकन करने के लिए आवश्यक वैज्ञानिक जानकारी के प्रकार पर निर्भर करेगी;
(f) यदि यह संदेह करने के लिए उचित आधार हों कि कोई खाद्य पदार्थ मानव स्वास्थ्य के लिए जोखिम उत्पन्न कर सकता है, तो उस जोखिम की प्रकृति, गंभीरता और सीमा के आधार पर, खाद्य प्राधिकरण और खाद्य सुरक्षा आयुक्त आम जनता को स्वास्थ्य के लिए जोखिम की प्रकृति के बारे में सूचित करने के लिए उचित कदम उठाएंगे, जिसमें यथासंभव खाद्य पदार्थ या खाद्य पदार्थ के प्रकार, उससे उत्पन्न होने वाले जोखिम और उस जोखिम को रोकने, कम करने या समाप्त करने के लिए उठाए गए या उठाए जाने वाले उपायों की पहचान शामिल होगी; और
(g) यदि कोई खाद्य पदार्थ जो खाद्य सुरक्षा आवश्यकताओं का अनुपालन करने में विफल रहता है, एक ही वर्ग या विवरण के खाद्य पदार्थों के बैच, लॉट या खेप का हिस्सा है, तो जब तक इसके विपरीत सिद्ध न हो जाए, यह माना जाएगा कि उस बैच, लॉट या खेप में मौजूद सभी खाद्य पदार्थ उन आवश्यकताओं का अनुपालन करने में विफल रहते हैं।
(2) खाद्य प्राधिकरण, इस अधिनियम के अंतर्गत विनियम बनाते समय या मानक निर्दिष्ट करते समय—
(क) ध्यान में रखना--
(i) देश में प्रचलित प्रथाएं और स्थितियां, जिनमें कृषि पद्धतियां और हैंडलिंग, भंडारण और परिवहन की स्थितियां शामिल हैं; और
(ii) अंतर्राष्ट्रीय मानक एवं प्रथाएँ, जहाँ अंतर्राष्ट्रीय मानक एवं प्रथाएँ विद्यमान हैं या सूत्रबद्ध की जा रही हैं, जब तक कि यह राय न हो कि ऐसी प्रचलित प्रथाओं एवं स्थितियों या अंतर्राष्ट्रीय मानकों एवं प्रथाओं या उनके किसी विशेष भाग को ध्यान में रखना ऐसे विनियमों के उद्देश्यों को सुरक्षित करने का प्रभावी या उपयुक्त साधन नहीं होगा, या जहाँ कोई वैज्ञानिक औचित्य हो, या जहाँ वे देश में उपयुक्त माने जाने वाले संरक्षण स्तर से भिन्न स्तर का संरक्षण प्रदान करेंगे;
(ख) जोखिम विश्लेषण के आधार पर खाद्य मानकों का निर्धारण करना, सिवाय इसके कि जब उसकी राय हो कि ऐसा विश्लेषण परिस्थितियों या मामले की प्रकृति के लिए उपयुक्त नहीं है;
(ग) उपलब्ध वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर और स्वतंत्र, वस्तुनिष्ठ और पारदर्शी तरीके से जोखिम मूल्यांकन करना;
(घ) विनियमों की तैयारी, मूल्यांकन और संशोधन के दौरान प्रत्यक्ष या प्रतिनिधि निकायों, जिनमें पंचायतों के सभी स्तर शामिल हैं, के माध्यम से खुली और पारदर्शी सार्वजनिक परामर्श सुनिश्चित करना, सिवाय उस स्थिति के जब खाद्य सुरक्षा या सार्वजनिक स्वास्थ्य के संबंध में विनियमों को बनाने या संशोधित करने की कोई अत्यावश्यकता हो, ऐसी स्थिति में परामर्श की आवश्यकता नहीं होगी।
बशर्ते कि ऐसे नियम छह महीने से अधिक समय तक लागू नहीं रहेंगे;
(ई) उपभोक्ताओं के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और उपभोक्ताओं को उनके द्वारा उपभोग किए जाने वाले खाद्य पदार्थों के संबंध में सूचित विकल्प चुनने के लिए एक आधार प्रदान करना;
(f) निम्नलिखित की रोकथाम सुनिश्चित करना--
(i) कपटपूर्ण, भ्रामक या अनुचित व्यापार प्रथाएं जो उपभोक्ता को गुमराह कर सकती हैं या उसे नुकसान पहुंचा सकती हैं; और
(ii) असुरक्षित, दूषित या निम्न गुणवत्ता वाला भोजन।
(3) इस अधिनियम के प्रावधान किसी किसान या मछुआरे या कृषि कार्यों या फसलों या पशुधन या मत्स्यपालन और कृषि में प्रयुक्त या उत्पादित आपूर्ति या किसी किसान द्वारा खेत स्तर पर या किसी मछुआरे द्वारा अपने कार्यों में उत्पादित फसलों के उत्पादों पर लागू नहीं होंगे।
(1) (क) खाद्य सुरक्षा मानकों और प्रथाओं के संदर्भ में सभी प्रकार के खाद्य व्यापार में निष्पक्ष प्रथाओं सहित मानव जीवन और स्वास्थ्य की सुरक्षा और उपभोक्ताओं के हितों की सुरक्षा के उचित स्तर को प्राप्त करने का प्रयास करना;
(ख) जोखिम प्रबंधन करना जिसमें जोखिम मूल्यांकन के परिणामों और अन्य कारकों को ध्यान में रखना शामिल होगा जो खाद्य प्राधिकरण की राय में विचाराधीन मामले के लिए प्रासंगिक हैं और जहां परिस्थितियां प्रासंगिक हैं, विनियमों के सामान्य उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए;
(ग) जहां किसी विशिष्ट परिस्थिति में, उपलब्ध जानकारी के आकलन के आधार पर, स्वास्थ्य पर हानिकारक प्रभावों की संभावना की पहचान की जाती है, लेकिन वैज्ञानिक अनिश्चितता बनी रहती है, तो अधिक व्यापक जोखिम मूल्यांकन के लिए आगे की वैज्ञानिक जानकारी प्राप्त होने तक, स्वास्थ्य सुरक्षा के उचित स्तर को सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक अस्थायी जोखिम प्रबंधन उपाय अपनाए जा सकते हैं;
(घ) खंड (ग) के आधार पर अपनाए गए उपाय आनुपातिक होंगे और व्यापार को उतना ही प्रतिबंधित करेंगे जितना कि उचित स्तर की स्वास्थ्य सुरक्षा प्राप्त करने के लिए आवश्यक है, तकनीकी और आर्थिक व्यवहार्यता और विचाराधीन मामले में उचित और उपयुक्त माने जाने वाले अन्य कारकों को ध्यान में रखते हुए;
(ई) अपनाए गए उपायों की समीक्षा उचित समयावधि के भीतर की जाएगी, जो जीवन या स्वास्थ्य के लिए पहचाने गए जोखिम की प्रकृति और वैज्ञानिक अनिश्चितता को स्पष्ट करने और अधिक व्यापक जोखिम मूल्यांकन करने के लिए आवश्यक वैज्ञानिक जानकारी के प्रकार पर निर्भर करेगी;
(f) यदि यह संदेह करने के लिए उचित आधार हों कि कोई खाद्य पदार्थ मानव स्वास्थ्य के लिए जोखिम उत्पन्न कर सकता है, तो उस जोखिम की प्रकृति, गंभीरता और सीमा के आधार पर, खाद्य प्राधिकरण और खाद्य सुरक्षा आयुक्त आम जनता को स्वास्थ्य के लिए जोखिम की प्रकृति के बारे में सूचित करने के लिए उचित कदम उठाएंगे, जिसमें यथासंभव खाद्य पदार्थ या खाद्य पदार्थ के प्रकार, उससे उत्पन्न होने वाले जोखिम और उस जोखिम को रोकने, कम करने या समाप्त करने के लिए उठाए गए या उठाए जाने वाले उपायों की पहचान शामिल होगी; और
(g) यदि कोई खाद्य पदार्थ जो खाद्य सुरक्षा आवश्यकताओं का अनुपालन करने में विफल रहता है, एक ही वर्ग या विवरण के खाद्य पदार्थों के बैच, लॉट या खेप का हिस्सा है, तो जब तक इसके विपरीत सिद्ध न हो जाए, यह माना जाएगा कि उस बैच, लॉट या खेप में मौजूद सभी खाद्य पदार्थ उन आवश्यकताओं का अनुपालन करने में विफल रहते हैं।
(2) खाद्य प्राधिकरण, इस अधिनियम के अंतर्गत विनियम बनाते समय या मानक निर्दिष्ट करते समय—
(क) ध्यान में रखना--
(i) देश में प्रचलित प्रथाएं और स्थितियां, जिनमें कृषि पद्धतियां और हैंडलिंग, भंडारण और परिवहन की स्थितियां शामिल हैं; और
(ii) अंतर्राष्ट्रीय मानक एवं प्रथाएँ, जहाँ अंतर्राष्ट्रीय मानक एवं प्रथाएँ विद्यमान हैं या सूत्रबद्ध की जा रही हैं, जब तक कि यह राय न हो कि ऐसी प्रचलित प्रथाओं एवं स्थितियों या अंतर्राष्ट्रीय मानकों एवं प्रथाओं या उनके किसी विशेष भाग को ध्यान में रखना ऐसे विनियमों के उद्देश्यों को सुरक्षित करने का प्रभावी या उपयुक्त साधन नहीं होगा, या जहाँ कोई वैज्ञानिक औचित्य हो, या जहाँ वे देश में उपयुक्त माने जाने वाले संरक्षण स्तर से भिन्न स्तर का संरक्षण प्रदान करेंगे;
(ख) जोखिम विश्लेषण के आधार पर खाद्य मानकों का निर्धारण करना, सिवाय इसके कि जब उसकी राय हो कि ऐसा विश्लेषण परिस्थितियों या मामले की प्रकृति के लिए उपयुक्त नहीं है;
(ग) उपलब्ध वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर और स्वतंत्र, वस्तुनिष्ठ और पारदर्शी तरीके से जोखिम मूल्यांकन करना;
(घ) विनियमों की तैयारी, मूल्यांकन और संशोधन के दौरान प्रत्यक्ष या प्रतिनिधि निकायों, जिनमें पंचायतों के सभी स्तर शामिल हैं, के माध्यम से खुली और पारदर्शी सार्वजनिक परामर्श सुनिश्चित करना, सिवाय उस स्थिति के जब खाद्य सुरक्षा या सार्वजनिक स्वास्थ्य के संबंध में विनियमों को बनाने या संशोधित करने की कोई अत्यावश्यकता हो, ऐसी स्थिति में परामर्श की आवश्यकता नहीं होगी।
बशर्ते कि ऐसे नियम छह महीने से अधिक समय तक लागू नहीं रहेंगे;
(ई) उपभोक्ताओं के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और उपभोक्ताओं को उनके द्वारा उपभोग किए जाने वाले खाद्य पदार्थों के संबंध में सूचित विकल्प चुनने के लिए एक आधार प्रदान करना;
(f) निम्नलिखित की रोकथाम सुनिश्चित करना--
(i) कपटपूर्ण, भ्रामक या अनुचित व्यापार प्रथाएं जो उपभोक्ता को गुमराह कर सकती हैं या उसे नुकसान पहुंचा सकती हैं; और
(ii) असुरक्षित, दूषित या निम्न गुणवत्ता वाला भोजन।
(3) इस अधिनियम के प्रावधान किसी किसान या मछुआरे या कृषि कार्यों या फसलों या पशुधन या मत्स्यपालन और कृषि में प्रयुक्त या उत्पादित आपूर्ति या किसी किसान द्वारा खेत स्तर पर या किसी मछुआरे द्वारा अपने कार्यों में उत्पादित फसलों के उत्पादों पर लागू नहीं होंगे।
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