CAF Act 6अध्याय II · Establishment, Management and Utilisation of National Compensatory Afforestation Fund and State Compensatory Afforestation Funds
धारा 6 · राज्य निधि का वितरण और उपयोग।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
इस अधिनियम में अन्यथा प्रावधान न होने पर, राज्य निधि में उपलब्ध धनराशि का वितरण और उपयोग निम्नलिखित तरीके से किया जाएगा, अर्थात्:—
(क) क्षतिपूर्ति वनरोपण, अतिरिक्त क्षतिपूर्ति वनरोपण, दंडात्मक क्षतिपूर्ति वनरोपण, जलग्रहण क्षेत्र उपचार योजना और किसी अन्य स्थल विशिष्ट योजना के लिए प्राप्त धन का उपयोग राज्य द्वारा वन (संरक्षण) अधिनियम, 1980 (1980 का 69) के तहत वन भूमि के मोड़ के लिए अनुमोदित प्रस्तावों के साथ प्रस्तुत स्थल-विशिष्ट योजनाओं के अनुसार किया जा सकता है;
(ख) शुद्ध वर्तमान मूल्य और दंडात्मक शुद्ध वर्तमान मूल्य के लिए प्राप्त धनराशि का उपयोग कृत्रिम पुनर्जनन (वृक्षारोपण), सहायक प्राकृतिक पुनर्जनन, वन प्रबंधन, वन संरक्षण, वन और वन्यजीव संबंधी अवसंरचना विकास, वन्यजीव संरक्षण और प्रबंधन, लकड़ी और अन्य वन उत्पाद बचत उपकरणों की आपूर्ति और अन्य संबद्ध गतिविधियों के लिए निर्धारित तरीके से किया जाएगा;
(ग) राज्य निधि में उपलब्ध निधियों पर अर्जित ब्याज और राज्य सरकारों द्वारा एकत्रित सभी धन पर अर्जित ब्याज, जिसे तदर्थ प्राधिकरण के अधीन रखा गया है और सर्वोच्च न्यायालय के दिनांक 5 मई, 2006 के निर्देशों के अनुपालन में राष्ट्रीयकृत बैंकों में जमा किया गया है, का उपयोग वन और वन्यजीवों के संरक्षण और विकास के लिए निर्धारित तरीके से किया जाएगा;
(घ) वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 (35 ऑफ 1972) की धारा 5ए के तहत गठित राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की स्थायी समिति द्वारा लिए गए निर्णय या संरक्षित क्षेत्रों में वन भूमि के डायवर्जन से संबंधित मामलों में सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों के अनुसार उपयोगकर्ता एजेंसियों से प्राप्त सभी धनराशि कोष का हिस्सा होगी और उससे प्राप्त आय का उपयोग विशेष रूप से राज्य के संरक्षित क्षेत्रों में संरक्षण और संवर्धन गतिविधियों को संचालित करने के लिए किया जाएगा, जिसमें ऐसे संरक्षित क्षेत्रों से स्वैच्छिक पुनर्वास की सुविधा प्रदान करना भी शामिल है और असाधारण परिस्थितियों में, कोष के एक हिस्से का उपयोग राष्ट्रीय प्राधिकरण की पूर्व स्वीकृति के अधीन भी किया जा सकता है;
(ई) उपयोगकर्ता एजेंसियों से प्राप्त राशि का दस प्रतिशत, जो एक वर्ष में सीधे राज्य निधि में जमा किया गया है, धारा 5 के खंड (ख) में दिए गए प्रावधान के अनुसार व्यय को पूरा करने के लिए राष्ट्रीय निधि में हस्तांतरित किया जाएगा;
(f) राज्य प्राधिकरण के प्रबंधन के लिए अनैच्छिक और आवर्ती व्यय, जिसमें उसके अधिकारियों और अन्य कर्मचारियों को देय वेतन और भत्ते शामिल हैं, राज्य निधि में उपलब्ध राशियों पर अर्जित ब्याज के एक भाग से, निर्धारित तरीके से पूरे किए जा सकते हैं;
(g) किसी विशेष राज्य में सीमा पार वानिकी या गैर-वन प्रयोजनों के लिए वन भूमि के मोड़ के पर्यावरणीय निहितार्थ के मामले में, यदि राष्ट्रीय प्राधिकरण द्वारा उचित और आवश्यक पाया जाता है, तो वह संबंधित राज्य प्राधिकरणों के परामर्श से आदेश दे सकता है कि सीमा पार प्रभावों की क्षतिपूर्ति के लिए उचित राशि ऐसे राज्य या राज्यों के राज्य कोष में हस्तांतरित की जाए;
(h) राज्य प्राधिकरण, राष्ट्रीय प्राधिकरण की संचालन समिति और कार्यकारी समिति द्वारा अंतिम रूप दी गई वार्षिक परिचालन योजना के अनुसार पूर्व निर्धारित किस्तों में गतिविधियों के निष्पादन के लिए चिन्हित एजेंसियों को धन जारी करेगा।
(क) क्षतिपूर्ति वनरोपण, अतिरिक्त क्षतिपूर्ति वनरोपण, दंडात्मक क्षतिपूर्ति वनरोपण, जलग्रहण क्षेत्र उपचार योजना और किसी अन्य स्थल विशिष्ट योजना के लिए प्राप्त धन का उपयोग राज्य द्वारा वन (संरक्षण) अधिनियम, 1980 (1980 का 69) के तहत वन भूमि के मोड़ के लिए अनुमोदित प्रस्तावों के साथ प्रस्तुत स्थल-विशिष्ट योजनाओं के अनुसार किया जा सकता है;
(ख) शुद्ध वर्तमान मूल्य और दंडात्मक शुद्ध वर्तमान मूल्य के लिए प्राप्त धनराशि का उपयोग कृत्रिम पुनर्जनन (वृक्षारोपण), सहायक प्राकृतिक पुनर्जनन, वन प्रबंधन, वन संरक्षण, वन और वन्यजीव संबंधी अवसंरचना विकास, वन्यजीव संरक्षण और प्रबंधन, लकड़ी और अन्य वन उत्पाद बचत उपकरणों की आपूर्ति और अन्य संबद्ध गतिविधियों के लिए निर्धारित तरीके से किया जाएगा;
(ग) राज्य निधि में उपलब्ध निधियों पर अर्जित ब्याज और राज्य सरकारों द्वारा एकत्रित सभी धन पर अर्जित ब्याज, जिसे तदर्थ प्राधिकरण के अधीन रखा गया है और सर्वोच्च न्यायालय के दिनांक 5 मई, 2006 के निर्देशों के अनुपालन में राष्ट्रीयकृत बैंकों में जमा किया गया है, का उपयोग वन और वन्यजीवों के संरक्षण और विकास के लिए निर्धारित तरीके से किया जाएगा;
(घ) वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 (35 ऑफ 1972) की धारा 5ए के तहत गठित राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की स्थायी समिति द्वारा लिए गए निर्णय या संरक्षित क्षेत्रों में वन भूमि के डायवर्जन से संबंधित मामलों में सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों के अनुसार उपयोगकर्ता एजेंसियों से प्राप्त सभी धनराशि कोष का हिस्सा होगी और उससे प्राप्त आय का उपयोग विशेष रूप से राज्य के संरक्षित क्षेत्रों में संरक्षण और संवर्धन गतिविधियों को संचालित करने के लिए किया जाएगा, जिसमें ऐसे संरक्षित क्षेत्रों से स्वैच्छिक पुनर्वास की सुविधा प्रदान करना भी शामिल है और असाधारण परिस्थितियों में, कोष के एक हिस्से का उपयोग राष्ट्रीय प्राधिकरण की पूर्व स्वीकृति के अधीन भी किया जा सकता है;
(ई) उपयोगकर्ता एजेंसियों से प्राप्त राशि का दस प्रतिशत, जो एक वर्ष में सीधे राज्य निधि में जमा किया गया है, धारा 5 के खंड (ख) में दिए गए प्रावधान के अनुसार व्यय को पूरा करने के लिए राष्ट्रीय निधि में हस्तांतरित किया जाएगा;
(f) राज्य प्राधिकरण के प्रबंधन के लिए अनैच्छिक और आवर्ती व्यय, जिसमें उसके अधिकारियों और अन्य कर्मचारियों को देय वेतन और भत्ते शामिल हैं, राज्य निधि में उपलब्ध राशियों पर अर्जित ब्याज के एक भाग से, निर्धारित तरीके से पूरे किए जा सकते हैं;
(g) किसी विशेष राज्य में सीमा पार वानिकी या गैर-वन प्रयोजनों के लिए वन भूमि के मोड़ के पर्यावरणीय निहितार्थ के मामले में, यदि राष्ट्रीय प्राधिकरण द्वारा उचित और आवश्यक पाया जाता है, तो वह संबंधित राज्य प्राधिकरणों के परामर्श से आदेश दे सकता है कि सीमा पार प्रभावों की क्षतिपूर्ति के लिए उचित राशि ऐसे राज्य या राज्यों के राज्य कोष में हस्तांतरित की जाए;
(h) राज्य प्राधिकरण, राष्ट्रीय प्राधिकरण की संचालन समिति और कार्यकारी समिति द्वारा अंतिम रूप दी गई वार्षिक परिचालन योजना के अनुसार पूर्व निर्धारित किस्तों में गतिविधियों के निष्पादन के लिए चिन्हित एजेंसियों को धन जारी करेगा।
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