पाठ लगभग अपरिवर्तित है
IPC धारा 4 अब BNS धारा 1(5) है
संहिता का विस्तार क्षेत्र से बाहर के अपराधों पर भी किया गया है।
पुराना कानून
IPC §4
संहिता का विस्तार क्षेत्र से बाहर के अपराधों पर भी किया गया है।
1 [4. संहिता का बाह्य क्षेत्रीय अपराधों पर विस्तार। -- इस संहिता के प्रावधान किसी भी ऐसे अपराध पर भी लागू होते हैं जो निम्न द्वारा किया गया हो
2 [(1) भारत का कोई भी नागरिक भारत के बाहर और उससे परे किसी भी स्थान पर;
(2) भारत में पंजीकृत किसी भी जहाज या विमान पर सवार कोई भी व्यक्ति, चाहे वह कहीं भी हो।]
3 [(3) भारत के बाहर और उससे परे किसी भी स्थान पर कोई भी व्यक्ति भारत में स्थित किसी कंप्यूटर संसाधन को लक्षित करके अपराध करता है।]
4 [ स्पष्टीकरण .--इस खंड में--]
(क) "अपराध" शब्द में भारत के बाहर किया गया प्रत्येक ऐसा कार्य शामिल है, जो यदि भारत में किया जाता तो इस संहिता के तहत दंडनीय होता;
(ख) "कंप्यूटर संसाधन" अभिव्यक्ति का वही अर्थ होगा जो सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 (21 ऑफ 2000) की धारा 2 की उपधारा (1) के खंड (ख) में दिया गया है;]
5 [ चित्रण ]
6 ***ए, 7 [जो 8 [भारत का नागरिक] है], युगांडा में हत्या करता है। उस पर भारत में किसी भी स्थान पर मुकदमा चलाया जा सकता है और उसे हत्या का दोषी ठहराया जा सकता है जहाँ वह पाया जाता है।
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पूरा पढ़ें: IPC §42 [(1) भारत का कोई भी नागरिक भारत के बाहर और उससे परे किसी भी स्थान पर;
(2) भारत में पंजीकृत किसी भी जहाज या विमान पर सवार कोई भी व्यक्ति, चाहे वह कहीं भी हो।]
3 [(3) भारत के बाहर और उससे परे किसी भी स्थान पर कोई भी व्यक्ति भारत में स्थित किसी कंप्यूटर संसाधन को लक्षित करके अपराध करता है।]
4 [ स्पष्टीकरण .--इस खंड में--]
(क) "अपराध" शब्द में भारत के बाहर किया गया प्रत्येक ऐसा कार्य शामिल है, जो यदि भारत में किया जाता तो इस संहिता के तहत दंडनीय होता;
(ख) "कंप्यूटर संसाधन" अभिव्यक्ति का वही अर्थ होगा जो सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 (21 ऑफ 2000) की धारा 2 की उपधारा (1) के खंड (ख) में दिया गया है;]
5 [ चित्रण ]
6 ***ए, 7 [जो 8 [भारत का नागरिक] है], युगांडा में हत्या करता है। उस पर भारत में किसी भी स्थान पर मुकदमा चलाया जा सकता है और उसे हत्या का दोषी ठहराया जा सकता है जहाँ वह पाया जाता है।
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नया कानून
BNS §1(5)
धारा 1. संक्षिप्त नाम, प्रारम्भ और लागू होना।
1.
(1) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम भारतीय न्याय (दूसरी) संहिता, 2023 है ।
(2) यह उस तारीख को प्रवृत्त होगा, जो केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, नियत करे और इस संहिता के भिन्न-भिन्न उपबंधों के लिए भिन्न-भिन्न तारीखें नियत की जा सकेंगी ।
(3) प्रत्येक व्यक्ति इस संहिता के उपबन्धों के प्रतिकूल प्रत्येक कार्य या लोप के लिए, जिसका वह भारत के भीतर दोषी होगा, इसी संहिता के अधीन दण्डनीय होगा अन्यथा नहीं ।
(4) भारत से परे किए गए किसी अपराध के लिए जो कोई व्यक्ति भारत में तत्समय प्रवृत किसी विधि के अनुसार विचारण का पात्र हो, भारत से परे किए गए किसी कार्य के लिए उसे इस संहिता के उपबन्धों के अनुसार ऐसा बरता जाएगा, मानो वह कार्य भारत के भीतर किया गया था ।
(5) इस संहिता के उपबंध--
(क) भारत से बाहर और परे किसी स्थान में भारत के किसी नागरिक द्वारा ;
(ख) भारत में रजिस्ट्रीकृत किसी पोत या विमान पर, चाहे वह कहीं भी हो किसी व्यक्ति द्वारा ;
(ग) भारत में अवस्थित किसी कंप्यूटर संसाधन को लक्ष्य बनाकर भारत से बाहर और परे किसी स्थान पर किसी व्यक्ति द्वारा ;
किए गये किसी अपराध को भी लागू हैं ।
स्पष्टीकरण--इस धारा में “अपराध” शब्द के अन्तर्गत भारत से बाहर किया गया ऐसा प्रत्येक कार्य आता है, जो यदि भारत में किया गया होता तो इस संहिता के अधीन दंडनीय होता ।
दृष्टान्त
क, जो भारत का नागरिक है, भारत से बाहर और परे किसी स्थान पर हत्या करता है, वह भारत के किसी स्थान में, जहां वह पाया जाए, हत्या के लिए विचारित और दोषसिद्ध किया जा सकता है ।
(6) इस संहिता में की कोई बात, भारत सरकार की सेवा के अधिकारियों, सैनिकों, नौसैनिकों या वायु सैनिकों द्वारा विद्रोह और अभित्यजन के लिए दण्डित करने वाले किसी अधिनियम के उपबन्धों, या किसी विशेष या स्थानीय विधि के उपबन्धों पर प्रभाव नहीं डालेगी ।
पूरा पढ़ें: BNS §1(5)(1) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम भारतीय न्याय (दूसरी) संहिता, 2023 है ।
(2) यह उस तारीख को प्रवृत्त होगा, जो केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, नियत करे और इस संहिता के भिन्न-भिन्न उपबंधों के लिए भिन्न-भिन्न तारीखें नियत की जा सकेंगी ।
(3) प्रत्येक व्यक्ति इस संहिता के उपबन्धों के प्रतिकूल प्रत्येक कार्य या लोप के लिए, जिसका वह भारत के भीतर दोषी होगा, इसी संहिता के अधीन दण्डनीय होगा अन्यथा नहीं ।
(4) भारत से परे किए गए किसी अपराध के लिए जो कोई व्यक्ति भारत में तत्समय प्रवृत किसी विधि के अनुसार विचारण का पात्र हो, भारत से परे किए गए किसी कार्य के लिए उसे इस संहिता के उपबन्धों के अनुसार ऐसा बरता जाएगा, मानो वह कार्य भारत के भीतर किया गया था ।
(5) इस संहिता के उपबंध--
(क) भारत से बाहर और परे किसी स्थान में भारत के किसी नागरिक द्वारा ;
(ख) भारत में रजिस्ट्रीकृत किसी पोत या विमान पर, चाहे वह कहीं भी हो किसी व्यक्ति द्वारा ;
(ग) भारत में अवस्थित किसी कंप्यूटर संसाधन को लक्ष्य बनाकर भारत से बाहर और परे किसी स्थान पर किसी व्यक्ति द्वारा ;
किए गये किसी अपराध को भी लागू हैं ।
स्पष्टीकरण--इस धारा में “अपराध” शब्द के अन्तर्गत भारत से बाहर किया गया ऐसा प्रत्येक कार्य आता है, जो यदि भारत में किया गया होता तो इस संहिता के अधीन दंडनीय होता ।
दृष्टान्त
क, जो भारत का नागरिक है, भारत से बाहर और परे किसी स्थान पर हत्या करता है, वह भारत के किसी स्थान में, जहां वह पाया जाए, हत्या के लिए विचारित और दोषसिद्ध किया जा सकता है ।
(6) इस संहिता में की कोई बात, भारत सरकार की सेवा के अधिकारियों, सैनिकों, नौसैनिकों या वायु सैनिकों द्वारा विद्रोह और अभित्यजन के लिए दण्डित करने वाले किसी अधिनियम के उपबन्धों, या किसी विशेष या स्थानीय विधि के उपबन्धों पर प्रभाव नहीं डालेगी ।
1 जुलाई 2024 से पहले दर्ज मामलों पर पुराना कानून लागू रहता है। यह जानकारी शैक्षिक है, कानूनी सलाह नहीं।
