पाठ लगभग अपरिवर्तित है
IPC धारा 335 अब BNS धारा 122(2) है
धारा 335 - प्रकोपन पर स्वेच्छया घोर उपहति कारित करना
पुराना कानून
IPC §335
धारा 335 - प्रकोपन पर स्वेच्छया घोर उपहति कारित करना
प्रकोपन पर स्वेच्छया घोर उपहति कारित करना
जो कोई गम्भीर और अचानक प्रकोपन पर स्वेच्छया घोर उपहति कारित करेगा, यदि न तो उसका आशय उस व्यक्ति से भिन्न, जिसने प्रकोपन दिया था, किसी व्यक्ति को घोर उपहति कारित करने का हो और न वह अपने द्वारा ऐसी उपहति कारित किया जाना सम्भाव्य जानता हो, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि चार वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो दो हजार रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा ।
स्पष्टीकरण - अन्तिम दो धाराएं उन्हीं परन्तुकों के अध्यधीन हैं, जिनके अध्यधीन धारा 300 का अपवाद 1 है ।
पूरा पढ़ें: IPC §335जो कोई गम्भीर और अचानक प्रकोपन पर स्वेच्छया घोर उपहति कारित करेगा, यदि न तो उसका आशय उस व्यक्ति से भिन्न, जिसने प्रकोपन दिया था, किसी व्यक्ति को घोर उपहति कारित करने का हो और न वह अपने द्वारा ऐसी उपहति कारित किया जाना सम्भाव्य जानता हो, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि चार वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो दो हजार रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा ।
स्पष्टीकरण - अन्तिम दो धाराएं उन्हीं परन्तुकों के अध्यधीन हैं, जिनके अध्यधीन धारा 300 का अपवाद 1 है ।
नया कानून
BNS §122(2)
उकसावे पर जानबूझकर चोट पहुंचाना या गंभीर चोट पहुंचाना।
(1) जो कोई जानबूझकर गंभीर और अचानक उकसावे पर चोट पहुँचाता है, यदि उसका इरादा न तो किसी अन्य व्यक्ति को चोट पहुँचाने का है और न ही उसे यह पता है कि वह उकसाने वाले व्यक्ति के अलावा किसी अन्य व्यक्ति को चोट पहुँचा सकता है, तो उसे किसी भी प्रकार के कारावास से एक महीने तक की अवधि के लिए, या पाँच हजार रुपये तक के जुर्माने से, या दोनों से दंडित किया जाएगा।
(2) जो कोई जानबूझकर गंभीर और अचानक उकसावे पर गंभीर चोट पहुँचाता है, यदि उसका इरादा न तो किसी अन्य व्यक्ति को गंभीर चोट पहुँचाने का है और न ही उसे यह पता है कि वह उकसाने वाले व्यक्ति के अलावा किसी अन्य व्यक्ति को गंभीर चोट पहुँचा सकता है, तो उसे किसी भी प्रकार के कारावास से दंडित किया जाएगा जिसकी अवधि पाँच वर्ष तक हो सकती है, या दस हजार रुपये तक के जुर्माने से, या दोनों से।
स्पष्टीकरण। ---यह धारा धारा 101 के अपवाद 1 के समान प्रावधान के अधीन है।
पूरा पढ़ें: BNS §122(2)(2) जो कोई जानबूझकर गंभीर और अचानक उकसावे पर गंभीर चोट पहुँचाता है, यदि उसका इरादा न तो किसी अन्य व्यक्ति को गंभीर चोट पहुँचाने का है और न ही उसे यह पता है कि वह उकसाने वाले व्यक्ति के अलावा किसी अन्य व्यक्ति को गंभीर चोट पहुँचा सकता है, तो उसे किसी भी प्रकार के कारावास से दंडित किया जाएगा जिसकी अवधि पाँच वर्ष तक हो सकती है, या दस हजार रुपये तक के जुर्माने से, या दोनों से।
स्पष्टीकरण। ---यह धारा धारा 101 के अपवाद 1 के समान प्रावधान के अधीन है।
1 जुलाई 2024 से पहले दर्ज मामलों पर पुराना कानून लागू रहता है। यह जानकारी शैक्षिक है, कानूनी सलाह नहीं।
