पाठ लगभग अपरिवर्तित है
IPC धारा 316 अब BNS धारा 92 है
गर्भ में पल रहे शिशु की मृत्यु का कारण बनना, जो कि गैर इरादतन हत्या की श्रेणी में आता है।
पुराना कानून
IPC §316
गर्भ में पल रहे शिशु की मृत्यु का कारण बनना, जो कि गैर इरादतन हत्या की श्रेणी में आता है।
जो कोई भी ऐसी परिस्थितियों में कोई ऐसा कार्य करता है, जिससे मृत्यु होने पर वह गैर इरादतन हत्या का दोषी होगा, और ऐसे कार्य से किसी जीवित अजन्मे बच्चे की मृत्यु का कारण बनता है, तो उसे किसी भी प्रकार के कारावास से दस वर्ष तक की अवधि के लिए दंडित किया जाएगा, और वह जुर्माने का भी हकदार होगा।
चित्रण
ए, यह जानते हुए कि उसके कृत्य से गर्भवती महिला की मृत्यु हो सकती है, एक ऐसा कृत्य करता है, जिससे यदि महिला की मृत्यु हो जाती, तो वह गैर इरादतन हत्या का अपराध होता। महिला घायल हो जाती है, लेकिन उसकी मृत्यु नहीं होती; परन्तु उसके गर्भ में पल रहे जीवित शिशु की मृत्यु हो जाती है। ए इस धारा में परिभाषित अपराध का दोषी है।
पूरा पढ़ें: IPC §316चित्रण
ए, यह जानते हुए कि उसके कृत्य से गर्भवती महिला की मृत्यु हो सकती है, एक ऐसा कृत्य करता है, जिससे यदि महिला की मृत्यु हो जाती, तो वह गैर इरादतन हत्या का अपराध होता। महिला घायल हो जाती है, लेकिन उसकी मृत्यु नहीं होती; परन्तु उसके गर्भ में पल रहे जीवित शिशु की मृत्यु हो जाती है। ए इस धारा में परिभाषित अपराध का दोषी है।
नया कानून
BNS §92
गर्भ में पल रहे शिशु की मृत्यु का कारण बनना, जो कि गैर इरादतन हत्या की श्रेणी में आता है।
जो कोई भी ऐसी परिस्थितियों में कोई ऐसा कार्य करता है, जिससे मृत्यु होने पर वह गैर इरादतन हत्या का दोषी होगा, और ऐसे कार्य से किसी जीवित अजन्मे बच्चे की मृत्यु का कारण बनता है, तो उसे किसी भी प्रकार के कारावास से दस वर्ष तक की अवधि के लिए दंडित किया जाएगा, और वह जुर्माने का भी हकदार होगा।
चित्रण।
ए, यह जानते हुए कि उसके कृत्य से गर्भवती महिला की मृत्यु हो सकती है, एक ऐसा कृत्य करता है, जिससे यदि महिला की मृत्यु हो जाती, तो वह गैर इरादतन हत्या का अपराध होता। महिला घायल हो जाती है, लेकिन उसकी मृत्यु नहीं होती; परन्तु उसके गर्भ में पल रहे जीवित शिशु की मृत्यु हो जाती है। ए इस धारा में परिभाषित अपराध का दोषी है।
पूरा पढ़ें: BNS §92चित्रण।
ए, यह जानते हुए कि उसके कृत्य से गर्भवती महिला की मृत्यु हो सकती है, एक ऐसा कृत्य करता है, जिससे यदि महिला की मृत्यु हो जाती, तो वह गैर इरादतन हत्या का अपराध होता। महिला घायल हो जाती है, लेकिन उसकी मृत्यु नहीं होती; परन्तु उसके गर्भ में पल रहे जीवित शिशु की मृत्यु हो जाती है। ए इस धारा में परिभाषित अपराध का दोषी है।
1 जुलाई 2024 से पहले दर्ज मामलों पर पुराना कानून लागू रहता है। यह जानकारी शैक्षिक है, कानूनी सलाह नहीं।

