पाठ लगभग अपरिवर्तित है
IPC धारा 113 अब BNS धारा 53 है
धारा 113 - दुष्प्रेरित कार्य से कारित उस प्रभाव के लिए दुष्प्रेरक का दायित्व जो दुष्प्रेरक द्वारा आशयित से भिन्न हो
पुराना कानून
IPC §113
धारा 113 - दुष्प्रेरित कार्य से कारित उस प्रभाव के लिए दुष्प्रेरक का दायित्व जो दुष्प्रेरक द्वारा आशयित से भिन्न हो
दुष्प्रेरित कार्य से कारित उस प्रभाव के लिए दुष्प्रेरक का दायित्व जो दुष्प्रेरक द्वारा आशयित से भिन्न हो
जब कि कार्य का दुष्प्रेरण दुष्प्रेरक द्वारा किसी विशिष्ट प्रभाव को कारित करने के आशय से किया जाता है और दुष्प्रेरण के परिणामस्वरूप जिस कार्य के लिए दुष्प्रेरक दायित्व के अधीन है, वह कार्य दुष्प्रेरक के द्वारा आशयित प्रभाव से भिन्न प्रभाव कारित कर्ता है तब दुष्प्ररेक कारित प्रभाव के लिए उसी प्रकार और उसी विस्तार तक दायित्व के अधीन है, मानो उसने उस कार्य का दुष्प्रेरण उसी प्रभाव को कारित करने के आशय से किया हो परन्तु यह तब जब कि वह यह जानता था कि दुष्प्रेरित कार्य से वह प्रभाव कारित होना सम्भाव्य है ।
दृष्टांत :
य को घोर उपहति करने के लिए ख को क उकसाता है । ख उस उकसाहट के परिणामस्वरूप य को घोर उपहति कारित कर्ता है । परिणामतः य की मॄत्यु हो जाती है । यहां यदि क यह जानता था कि दुष्प्रेरित घोर उपहति से मॄत्यु कारित होना सम्भाव्य है, तो क हत्या के लिए उपबन्धित दण्ड से दण्डनीय है ।
पूरा पढ़ें: IPC §113जब कि कार्य का दुष्प्रेरण दुष्प्रेरक द्वारा किसी विशिष्ट प्रभाव को कारित करने के आशय से किया जाता है और दुष्प्रेरण के परिणामस्वरूप जिस कार्य के लिए दुष्प्रेरक दायित्व के अधीन है, वह कार्य दुष्प्रेरक के द्वारा आशयित प्रभाव से भिन्न प्रभाव कारित कर्ता है तब दुष्प्ररेक कारित प्रभाव के लिए उसी प्रकार और उसी विस्तार तक दायित्व के अधीन है, मानो उसने उस कार्य का दुष्प्रेरण उसी प्रभाव को कारित करने के आशय से किया हो परन्तु यह तब जब कि वह यह जानता था कि दुष्प्रेरित कार्य से वह प्रभाव कारित होना सम्भाव्य है ।
दृष्टांत :
य को घोर उपहति करने के लिए ख को क उकसाता है । ख उस उकसाहट के परिणामस्वरूप य को घोर उपहति कारित कर्ता है । परिणामतः य की मॄत्यु हो जाती है । यहां यदि क यह जानता था कि दुष्प्रेरित घोर उपहति से मॄत्यु कारित होना सम्भाव्य है, तो क हत्या के लिए उपबन्धित दण्ड से दण्डनीय है ।
नया कानून
BNS §53
उकसाने वाले व्यक्ति की उस कृत्य के परिणामस्वरूप उत्पन्न होने वाले प्रभाव के लिए देयता, जो उकसाने वाले व्यक्ति के इच्छित प्रभाव से भिन्न हो।
जब कोई व्यक्ति किसी विशेष प्रभाव उत्पन्न करने के इरादे से किसी कृत्य को उकसाता है, और उकसाने के परिणामस्वरूप उकसाने वाला व्यक्ति जिस कृत्य के लिए उत्तरदायी होता है, वह उकसाने वाले व्यक्ति के इच्छित प्रभाव से भिन्न प्रभाव उत्पन्न करता है, तो उकसाने वाला व्यक्ति उत्पन्न प्रभाव के लिए उसी प्रकार और उसी सीमा तक उत्तरदायी होगा जैसे कि उसने उस प्रभाव को उत्पन्न करने के इरादे से ही कृत्य को उकसाया हो, बशर्ते कि उसे यह ज्ञात हो कि उकसाया गया कृत्य उस प्रभाव को उत्पन्न करने की संभावना रखता है।
चित्रण।
A, B को Z को गंभीर चोट पहुँचाने के लिए उकसाता है। उकसावे के परिणामस्वरूप, B Z को गंभीर चोट पहुँचाता है। Z की मृत्यु हो जाती है। यहाँ, यदि A को यह ज्ञात था कि उकसाया गया गंभीर घाव मृत्यु का कारण बन सकता है, तो A हत्या के लिए निर्धारित दंड का पात्र है।
पूरा पढ़ें: BNS §53चित्रण।
A, B को Z को गंभीर चोट पहुँचाने के लिए उकसाता है। उकसावे के परिणामस्वरूप, B Z को गंभीर चोट पहुँचाता है। Z की मृत्यु हो जाती है। यहाँ, यदि A को यह ज्ञात था कि उकसाया गया गंभीर घाव मृत्यु का कारण बन सकता है, तो A हत्या के लिए निर्धारित दंड का पात्र है।
1 जुलाई 2024 से पहले दर्ज मामलों पर पुराना कानून लागू रहता है। यह जानकारी शैक्षिक है, कानूनी सलाह नहीं।

