पाठ लगभग अपरिवर्तित है
IPC धारा 101 अब BNS धारा 39 है
धारा 101 - कब ऐसे अधिकार का विस्तार मृत्यु से भिन्न कोई अपहानि कारित करने तक का होता है
पुराना कानून
IPC §101
धारा 101 - कब ऐसे अधिकार का विस्तार मृत्यु से भिन्न कोई अपहानि कारित करने तक का होता है
कब ऐसे अधिकार का विस्तार मृत्यु से भिन्न कोई अपहानि कारित करने तक का होता है
यदि अपराध पूर्वगामी अंतिम धारा में प्रगणित भांतियों में से किसी भांति का नहीं है, तो शरीर की प्राइवेट प्रतिरक्षा के अधिकार का विस्तार हमलावर की मृत्यु स्वेच्छाया कारित करने तक का नहीं होता, किंतु इस अधिकार का विस्तार धारा 99 में वर्णित निर्बन्धनो के अध्यधीन हमलावर की मृत्यु से भिन्न कोई अपहानि स्वेच्छाया कारित करने तक का होता है ।
पूरा पढ़ें: IPC §101यदि अपराध पूर्वगामी अंतिम धारा में प्रगणित भांतियों में से किसी भांति का नहीं है, तो शरीर की प्राइवेट प्रतिरक्षा के अधिकार का विस्तार हमलावर की मृत्यु स्वेच्छाया कारित करने तक का नहीं होता, किंतु इस अधिकार का विस्तार धारा 99 में वर्णित निर्बन्धनो के अध्यधीन हमलावर की मृत्यु से भिन्न कोई अपहानि स्वेच्छाया कारित करने तक का होता है ।
नया कानून
BNS §39
जब ऐसा अधिकार मृत्यु के अलावा किसी अन्य प्रकार की हानि पहुंचाने तक विस्तारित होता है।
यदि अपराध धारा 38 में निर्दिष्ट किसी भी प्रकार का न हो, तो शरीर की आत्मरक्षा का अधिकार हमलावर को स्वेच्छा से मृत्यु देने तक विस्तारित नहीं होता है, लेकिन धारा 37 में निर्दिष्ट प्रतिबंधों के अधीन, हमलावर को मृत्यु के अलावा किसी अन्य प्रकार की हानि पहुँचाने तक विस्तारित होता है।
पूरा पढ़ें: BNS §391 जुलाई 2024 से पहले दर्ज मामलों पर पुराना कानून लागू रहता है। यह जानकारी शैक्षिक है, कानूनी सलाह नहीं।
