पाठ लगभग अपरिवर्तित है
CrPC धारा 319 अब BNSS धारा 358 है
धारा 319. ऐसे अन्य व्यक्तियों के विरुद्ध कार्यवाही करने की शक्ति जो अपराध के दोषी प्रतीत होते हैं
पुराना कानून
CrPC §319
धारा 319. ऐसे अन्य व्यक्तियों के विरुद्ध कार्यवाही करने की शक्ति जो अपराध के दोषी प्रतीत होते हैं
319. ऐसे अन्य व्यक्तियों के विरुद्ध कार्यवाही करने की शक्ति जो अपराध के दोषी प्रतीत होते हैं
(1) जहां किसी अपराध की जांच या विचारण के दौरान साक्ष्य से यह प्रतीत होता है कि किसी ऐसे व्यक्ति ने, जो अभियुक्त नहीं है, कोई ऐसा अपराध किया है जिसके लिए ऐसे व्यक्ति का अभियुक्त के साथ विचारण किया जा सकता है, वहां न्यायालय ऐसे व्यक्ति के विरुद्ध उस अपराध के लिए कार्यवाही कर सकेगा जो उसने किया हुआ प्रतीत होता है।
(2) जहां ऐसा व्यक्ति न्यायालय में उपस्थित नहीं है, वहां उसे पूर्वोक्त प्रयोजन के लिए, जैसा मामले की परिस्थितियां अपेक्षा करें, गिरफ्तार किया जा सकेगा या समन किया जा सकेगा।
(3) कोई व्यक्ति, जो न्यायालय में उपस्थित है, यद्यपि वह गिरफ्तारी के अधीन या समन पर नहीं है, ऐसे न्यायालय द्वारा उस अपराध की जांच या विचारण के प्रयोजन के लिए, जो उसने किया हुआ प्रतीत होता है, निरुद्ध किया जा सकेगा।
(4) जहां न्यायालय उपधारा (1) के अधीन किसी व्यक्ति के विरुद्ध कार्यवाही करता है, वहां—
(क) ऐसे व्यक्ति के संबंध में कार्यवाहियां नए सिरे से प्रारंभ की जाएंगी और साक्षियों को फिर से सुना जाएगा;
(ख) खंड (क) के उपबंधों के अधीन रहते हुए, मामला ऐसे चल सकेगा मानो ऐसा व्यक्ति उस समय अभियुक्त व्यक्ति रहा हो जब न्यायालय ने उस अपराध का संज्ञान किया था जिस पर जांच या विचारण प्रारंभ किया गया था।
पूरा पढ़ें: CrPC §319(1) जहां किसी अपराध की जांच या विचारण के दौरान साक्ष्य से यह प्रतीत होता है कि किसी ऐसे व्यक्ति ने, जो अभियुक्त नहीं है, कोई ऐसा अपराध किया है जिसके लिए ऐसे व्यक्ति का अभियुक्त के साथ विचारण किया जा सकता है, वहां न्यायालय ऐसे व्यक्ति के विरुद्ध उस अपराध के लिए कार्यवाही कर सकेगा जो उसने किया हुआ प्रतीत होता है।
(2) जहां ऐसा व्यक्ति न्यायालय में उपस्थित नहीं है, वहां उसे पूर्वोक्त प्रयोजन के लिए, जैसा मामले की परिस्थितियां अपेक्षा करें, गिरफ्तार किया जा सकेगा या समन किया जा सकेगा।
(3) कोई व्यक्ति, जो न्यायालय में उपस्थित है, यद्यपि वह गिरफ्तारी के अधीन या समन पर नहीं है, ऐसे न्यायालय द्वारा उस अपराध की जांच या विचारण के प्रयोजन के लिए, जो उसने किया हुआ प्रतीत होता है, निरुद्ध किया जा सकेगा।
(4) जहां न्यायालय उपधारा (1) के अधीन किसी व्यक्ति के विरुद्ध कार्यवाही करता है, वहां—
(क) ऐसे व्यक्ति के संबंध में कार्यवाहियां नए सिरे से प्रारंभ की जाएंगी और साक्षियों को फिर से सुना जाएगा;
(ख) खंड (क) के उपबंधों के अधीन रहते हुए, मामला ऐसे चल सकेगा मानो ऐसा व्यक्ति उस समय अभियुक्त व्यक्ति रहा हो जब न्यायालय ने उस अपराध का संज्ञान किया था जिस पर जांच या विचारण प्रारंभ किया गया था।
नया कानून
BNSS §358
धारा 358: अपराध के दोषी प्रतीत होने वाले अन्य व्यक्तियों के खिलाफ कार्यवाही करने की शक्ति
358. (1) जहां, किसी अपराध की जांच या सुनवाई के दौरान, साक्ष्य से यह प्रतीत होता है कि किसी व्यक्ति ने, जो अभियुक्त नहीं है, कोई अपराध किया है जिसके लिए ऐसे व्यक्ति पर अभियुक्त के साथ मिलकर मुकदमा चलाया जा सकता है, न्यायालय ऐसे व्यक्ति के विरुद्ध उस अपराध के लिए कार्यवाही कर सकता है जो उसने किया प्रतीत होता है।
(2) जहां ऐसा व्यक्ति अदालत में उपस्थित नहीं हो रहा है, उसे उपरोक्त उद्देश्य के लिए मामले की परिस्थितियों की आवश्यकता के अनुसार गिरफ्तार या सम्मन किया जा सकता है।
(3) न्यायालय में उपस्थित होने वाला कोई भी व्यक्ति, भले ही गिरफ्तारी के अधीन या समन पर न हो, ऐसे न्यायालय द्वारा उस अपराध की जांच या सुनवाई के उद्देश्य से हिरासत में लिया जा सकता है, जो उसने किया प्रतीत होता है।
(4) जहां न्यायालय उपधारा (1) के तहत किसी व्यक्ति के खिलाफ कार्यवाही करता है, तो—
(ए) ऐसे व्यक्ति के संबंध में कार्यवाही नए सिरे से शुरू की जाएगी, और गवाहों को फिर से सुना जाएगा;
(बी) खंड (ए) के प्रावधानों के अधीन, मामला ऐसे आगे बढ़ सकता है जैसे कि ऐसा व्यक्ति आरोपी व्यक्ति था जब न्यायालय ने उस अपराध का संज्ञान लिया था जिस पर जांच या मुकदमा शुरू किया गया था।
पूरा पढ़ें: BNSS §358(2) जहां ऐसा व्यक्ति अदालत में उपस्थित नहीं हो रहा है, उसे उपरोक्त उद्देश्य के लिए मामले की परिस्थितियों की आवश्यकता के अनुसार गिरफ्तार या सम्मन किया जा सकता है।
(3) न्यायालय में उपस्थित होने वाला कोई भी व्यक्ति, भले ही गिरफ्तारी के अधीन या समन पर न हो, ऐसे न्यायालय द्वारा उस अपराध की जांच या सुनवाई के उद्देश्य से हिरासत में लिया जा सकता है, जो उसने किया प्रतीत होता है।
(4) जहां न्यायालय उपधारा (1) के तहत किसी व्यक्ति के खिलाफ कार्यवाही करता है, तो—
(ए) ऐसे व्यक्ति के संबंध में कार्यवाही नए सिरे से शुरू की जाएगी, और गवाहों को फिर से सुना जाएगा;
(बी) खंड (ए) के प्रावधानों के अधीन, मामला ऐसे आगे बढ़ सकता है जैसे कि ऐसा व्यक्ति आरोपी व्यक्ति था जब न्यायालय ने उस अपराध का संज्ञान लिया था जिस पर जांच या मुकदमा शुरू किया गया था।
1 जुलाई 2024 से पहले दर्ज मामलों पर पुराना कानून लागू रहता है। यह जानकारी शैक्षिक है, कानूनी सलाह नहीं।

