पाठ लगभग अपरिवर्तित है
CrPC धारा 142 अब BNSS धारा 161 है
धारा 142. जांच लंबित रहने तक व्यादेश
पुराना कानून
CrPC §142
धारा 142. जांच लंबित रहने तक व्यादेश
142. जांच लंबित रहने तक व्यादेश
(1) यदि धारा 133 के अधीन आदेश करने वाला मजिस्ट्रेट यह विचार करता है कि लोक को आसन्न खतरे या गंभीर प्रकार की क्षति का निवारण करने के लिए तुरंत उपाय किए जाने चाहिएं, तो वह उस व्यक्ति को, जिसके विरुद्ध वह आदेश किया गया था, ऐसा व्यादेश जारी कर सकेगा, जैसा उस मामले के अवधारण तक ऐसे खतरे या क्षति को टालने या उसका निवारण करने के लिए अपेक्षित है।
(2) ऐसे व्यक्ति द्वारा ऐसे व्यादेश का तुरंत पालन न किए जाने पर, मजिस्ट्रेट ऐसे खतरे को टालने या ऐसी क्षति का निवारण करने के लिए ऐसे साधन स्वयं उपयोग में ला सकेगा या उपयोग में लाया जाना कारित कर सकेगा, जो वह ठीक समझे।
(3) इस धारा के अधीन मजिस्ट्रेट द्वारा सद्भावपूर्वक की गई किसी बात के संबंध में कोई वाद नहीं होगा।
पूरा पढ़ें: CrPC §142(1) यदि धारा 133 के अधीन आदेश करने वाला मजिस्ट्रेट यह विचार करता है कि लोक को आसन्न खतरे या गंभीर प्रकार की क्षति का निवारण करने के लिए तुरंत उपाय किए जाने चाहिएं, तो वह उस व्यक्ति को, जिसके विरुद्ध वह आदेश किया गया था, ऐसा व्यादेश जारी कर सकेगा, जैसा उस मामले के अवधारण तक ऐसे खतरे या क्षति को टालने या उसका निवारण करने के लिए अपेक्षित है।
(2) ऐसे व्यक्ति द्वारा ऐसे व्यादेश का तुरंत पालन न किए जाने पर, मजिस्ट्रेट ऐसे खतरे को टालने या ऐसी क्षति का निवारण करने के लिए ऐसे साधन स्वयं उपयोग में ला सकेगा या उपयोग में लाया जाना कारित कर सकेगा, जो वह ठीक समझे।
(3) इस धारा के अधीन मजिस्ट्रेट द्वारा सद्भावपूर्वक की गई किसी बात के संबंध में कोई वाद नहीं होगा।
नया कानून
BNSS §161
जांच लंबित रहने तक निषेधाज्ञा।
(1) यदि धारा 152 के तहत आदेश देने वाला मजिस्ट्रेट यह मानता है कि जनता को आसन्न खतरे या गंभीर प्रकार की चोट से बचाने के लिए तत्काल उपाय किए जाने चाहिए, तो वह उस व्यक्ति को, जिसके विरुद्ध आदेश दिया गया था, ऐसा निषेधाज्ञा जारी कर सकता है, जैसा कि मामले के निर्धारण तक ऐसे खतरे या चोट को दूर करने या रोकने के लिए आवश्यक है।
(2) यदि ऐसा व्यक्ति तुरंत ऐसे निषेधाज्ञा का पालन करने में असमर्थ हो, तो मजिस्ट्रेट स्वयं ऐसे खतरे को दूर करने या ऐसी चोट को रोकने के लिए ऐसे साधन का प्रयोग कर सकता है, या करवा सकता है, जैसा वह उचित समझे।
(3) इस धारा के अंतर्गत मजिस्ट्रेट द्वारा सद्भावपूर्वक किए गए किसी कार्य के संबंध में कोई वाद नहीं होगा।
पूरा पढ़ें: BNSS §161(2) यदि ऐसा व्यक्ति तुरंत ऐसे निषेधाज्ञा का पालन करने में असमर्थ हो, तो मजिस्ट्रेट स्वयं ऐसे खतरे को दूर करने या ऐसी चोट को रोकने के लिए ऐसे साधन का प्रयोग कर सकता है, या करवा सकता है, जैसा वह उचित समझे।
(3) इस धारा के अंतर्गत मजिस्ट्रेट द्वारा सद्भावपूर्वक किए गए किसी कार्य के संबंध में कोई वाद नहीं होगा।
1 जुलाई 2024 से पहले दर्ज मामलों पर पुराना कानून लागू रहता है। यह जानकारी शैक्षिक है, कानूनी सलाह नहीं।
