पाठ बदला गया है
BNSS धारा 51 अब CrPC धारा 53 है
पुलिस अधिकारी के अनुरोध पर चिकित्सक द्वारा आरोपी की जांच।
पुराना कानून
BNSS §51
पुलिस अधिकारी के अनुरोध पर चिकित्सक द्वारा आरोपी की जांच।
(1) जब किसी व्यक्ति को ऐसे अपराध के आरोप में गिरफ्तार किया जाता है, जो इस प्रकार का हो और जिसके बारे में यह आरोप लगाया गया हो कि वह ऐसे हालात में किया गया है कि यह मानने के लिए उचित आधार हैं कि उसकी जांच से अपराध के घटित होने के संबंध में साक्ष्य प्राप्त होंगे, तो किसी पुलिस अधिकारी के अनुरोध पर कार्य करने वाले पंजीकृत चिकित्सक और उसकी सहायता में तथा उसके निर्देशानुसार सद्भावपूर्वक कार्य करने वाले किसी भी व्यक्ति के लिए गिरफ्तार व्यक्ति की ऐसी जांच करना वैध होगा जो ऐसे साक्ष्य प्रदान करने वाले तथ्यों का पता लगाने के लिए यथोचित रूप से आवश्यक हो, और उस उद्देश्य के लिए यथोचित रूप से आवश्यक बल का प्रयोग करना भी वैध होगा।
(2) जब भी इस धारा के अधीन किसी महिला के शरीर की जांच की जानी हो, तो जांच केवल किसी महिला पंजीकृत चिकित्सा व्यवसायी द्वारा या उसकी देखरेख में ही की जाएगी।
(3) पंजीकृत चिकित्सा व्यवसायी बिना किसी देरी के जांच रिपोर्ट जांच अधिकारी को अग्रेषित करेगा।
स्पष्टीकरण .---इस खंड और खंड 52 तथा 53 में,---
(क) "जांच" में रक्त, रक्त के धब्बे, वीर्य, यौन अपराधों के मामले में स्वाब, थूक और पसीना, बालों के नमूने और नाखून के टुकड़े की जांच शामिल होगी, जिसमें डीएनए प्रोफाइलिंग और ऐसे अन्य परीक्षण शामिल हैं जिन्हें पंजीकृत चिकित्सा व्यवसायी किसी विशेष मामले में आवश्यक समझता है;
(ख) "पंजीकृत चिकित्सा व्यवसायी" से तात्पर्य ऐसे चिकित्सा व्यवसायी से है जिसके पास राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग अधिनियम, 2019 (30 ऑफ 2019) के तहत मान्यता प्राप्त कोई चिकित्सा योग्यता हो और जिसका नाम उस अधिनियम के तहत राष्ट्रीय चिकित्सा रजिस्टर या राज्य चिकित्सा रजिस्टर में दर्ज हो।
पूरा पढ़ें: BNSS §51(2) जब भी इस धारा के अधीन किसी महिला के शरीर की जांच की जानी हो, तो जांच केवल किसी महिला पंजीकृत चिकित्सा व्यवसायी द्वारा या उसकी देखरेख में ही की जाएगी।
(3) पंजीकृत चिकित्सा व्यवसायी बिना किसी देरी के जांच रिपोर्ट जांच अधिकारी को अग्रेषित करेगा।
स्पष्टीकरण .---इस खंड और खंड 52 तथा 53 में,---
(क) "जांच" में रक्त, रक्त के धब्बे, वीर्य, यौन अपराधों के मामले में स्वाब, थूक और पसीना, बालों के नमूने और नाखून के टुकड़े की जांच शामिल होगी, जिसमें डीएनए प्रोफाइलिंग और ऐसे अन्य परीक्षण शामिल हैं जिन्हें पंजीकृत चिकित्सा व्यवसायी किसी विशेष मामले में आवश्यक समझता है;
(ख) "पंजीकृत चिकित्सा व्यवसायी" से तात्पर्य ऐसे चिकित्सा व्यवसायी से है जिसके पास राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग अधिनियम, 2019 (30 ऑफ 2019) के तहत मान्यता प्राप्त कोई चिकित्सा योग्यता हो और जिसका नाम उस अधिनियम के तहत राष्ट्रीय चिकित्सा रजिस्टर या राज्य चिकित्सा रजिस्टर में दर्ज हो।
नया कानून
CrPC §53
धारा 53. पुलिस अधिकारी की प्रार्थना पर चिकित्सा-व्यवसायी द्वारा अभियुक्त की परीक्षा
53. पुलिस अधिकारी की प्रार्थना पर चिकित्सा-व्यवसायी द्वारा अभियुक्त की परीक्षा
(1) जब कोई व्यक्ति ऐसी प्रकृति के और ऐसी परिस्थितियों में किए गए अभिकथित अपराध को करने के आरोप में गिरफ्तार किया जाता है कि यह विश्वास करने के लिए युक्तियुक्त आधार हैं कि उसके शरीर की परीक्षा से अपराध किए जाने के बारे में साक्ष्य मिलेगा, तब ऐसे रजिस्ट्रीकृत चिकित्सा-व्यवसायी के लिए, जो उपनिरीक्षक की पंक्ति से नीचे के न हों ऐसे पुलिस अधिकारी की प्रार्थना पर कार्य कर रहा है, और ऐसे किसी व्यक्ति के लिए, जो उसकी सहायता में तथा उसके निदेशाधीन सद्भावपूर्वक कार्य कर रहा है, गिरफ्तार किए गए व्यक्ति के शरीर की ऐसी परीक्षा करना, जो उन तथ्यों को अभिनिश्चित करने के लिए युक्तियुक्त रूप से आवश्यक है, जिनसे ऐसा साक्ष्य मिल सके, और उस प्रयोजन के लिए ऐसे बल का प्रयोग करना, जो युक्तियुक्त रूप से आवश्यक है, विधिपूर्ण होगा।
(2) जब कभी इस धारा के अधीन किसी स्त्री के शरीर की परीक्षा की जानी है, तब परीक्षा केवल किसी महिला रजिस्ट्रीकृत चिकित्सा-व्यवसायी द्वारा या उसके पर्यवेक्षण में की जाएगी।
स्पष्टीकरण—इस धारा में और धारा 53A तथा धारा 54 में,—
(क) "परीक्षा" के अंतर्गत आधुनिक और वैज्ञानिक प्रविधियों का, जिनके अंतर्गत डी.एन.ए. प्रोफाइलिंग भी है, प्रयोग करके रक्त, रक्त के धब्बों, वीर्य, लैंगिक अपराधों की दशा में स्वाब, थूक और स्वेद, बाल के नमूनों तथा नाखून के कतरनों की परीक्षा है, और ऐसे अन्य परीक्षण भी हैं, जिन्हें रजिस्ट्रीकृत चिकित्सा-व्यवसायी किसी विशिष्ट मामले में आवश्यक समझे;
(ख) "रजिस्ट्रीकृत चिकित्सा-व्यवसायी" से ऐसा चिकित्सा-व्यवसायी अभिप्रेत है, जो भारतीय आयुर्विज्ञान परिषद् अधिनियम, 1956 (1956 का 102) की धारा 2 के खंड (ज) में यथापरिभाषित कोई चिकित्सीय अर्हता रखता है और जिसका नाम किसी राज्य आयुर्विज्ञान रजिस्टर में प्रविष्ट किया गया है।
पूरा पढ़ें: CrPC §53(1) जब कोई व्यक्ति ऐसी प्रकृति के और ऐसी परिस्थितियों में किए गए अभिकथित अपराध को करने के आरोप में गिरफ्तार किया जाता है कि यह विश्वास करने के लिए युक्तियुक्त आधार हैं कि उसके शरीर की परीक्षा से अपराध किए जाने के बारे में साक्ष्य मिलेगा, तब ऐसे रजिस्ट्रीकृत चिकित्सा-व्यवसायी के लिए, जो उपनिरीक्षक की पंक्ति से नीचे के न हों ऐसे पुलिस अधिकारी की प्रार्थना पर कार्य कर रहा है, और ऐसे किसी व्यक्ति के लिए, जो उसकी सहायता में तथा उसके निदेशाधीन सद्भावपूर्वक कार्य कर रहा है, गिरफ्तार किए गए व्यक्ति के शरीर की ऐसी परीक्षा करना, जो उन तथ्यों को अभिनिश्चित करने के लिए युक्तियुक्त रूप से आवश्यक है, जिनसे ऐसा साक्ष्य मिल सके, और उस प्रयोजन के लिए ऐसे बल का प्रयोग करना, जो युक्तियुक्त रूप से आवश्यक है, विधिपूर्ण होगा।
(2) जब कभी इस धारा के अधीन किसी स्त्री के शरीर की परीक्षा की जानी है, तब परीक्षा केवल किसी महिला रजिस्ट्रीकृत चिकित्सा-व्यवसायी द्वारा या उसके पर्यवेक्षण में की जाएगी।
स्पष्टीकरण—इस धारा में और धारा 53A तथा धारा 54 में,—
(क) "परीक्षा" के अंतर्गत आधुनिक और वैज्ञानिक प्रविधियों का, जिनके अंतर्गत डी.एन.ए. प्रोफाइलिंग भी है, प्रयोग करके रक्त, रक्त के धब्बों, वीर्य, लैंगिक अपराधों की दशा में स्वाब, थूक और स्वेद, बाल के नमूनों तथा नाखून के कतरनों की परीक्षा है, और ऐसे अन्य परीक्षण भी हैं, जिन्हें रजिस्ट्रीकृत चिकित्सा-व्यवसायी किसी विशिष्ट मामले में आवश्यक समझे;
(ख) "रजिस्ट्रीकृत चिकित्सा-व्यवसायी" से ऐसा चिकित्सा-व्यवसायी अभिप्रेत है, जो भारतीय आयुर्विज्ञान परिषद् अधिनियम, 1956 (1956 का 102) की धारा 2 के खंड (ज) में यथापरिभाषित कोई चिकित्सीय अर्हता रखता है और जिसका नाम किसी राज्य आयुर्विज्ञान रजिस्टर में प्रविष्ट किया गया है।
BNSS धारा 51 इन धाराओं से भी मेल खाती है
1 जुलाई 2024 से पहले दर्ज मामलों पर पुराना कानून लागू रहता है। यह जानकारी शैक्षिक है, कानूनी सलाह नहीं।

