पाठ लगभग अपरिवर्तित है
BNSS धारा 443 अब CrPC धारा 402 है
पुनरीक्षण मामलों को वापस लेने या स्थानांतरित करने का उच्च न्यायालय का अधिकार।
पुराना कानून
BNSS §443
पुनरीक्षण मामलों को वापस लेने या स्थानांतरित करने का उच्च न्यायालय का अधिकार।
(1) जब भी एक ही मुकदमे में दोषी ठहराए गए एक या एक से अधिक व्यक्ति उच्च न्यायालय में पुनरीक्षण के लिए आवेदन करते हैं और उसी मुकदमे में दोषी ठहराए गए कोई अन्य व्यक्ति सत्र न्यायाधीश के समक्ष पुनरीक्षण के लिए आवेदन करता है, तो उच्च न्यायालय पक्षकारों की सामान्य सुविधा और संबंधित प्रश्नों के महत्व को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय करेगा कि दोनों न्यायालयों में से कौन सा न्यायालय पुनरीक्षण आवेदनों का अंतिम निपटारा करेगा और जब उच्च न्यायालय यह निर्णय लेता है कि पुनरीक्षण के सभी आवेदनों का निपटारा स्वयं द्वारा किया जाना चाहिए, तो उच्च न्यायालय सत्र न्यायाधीश के समक्ष लंबित पुनरीक्षण आवेदनों को अपने पास स्थानांतरित करने का निर्देश देगा और जहां उच्च न्यायालय यह निर्णय लेता है कि पुनरीक्षण आवेदनों का निपटारा करना उसके लिए आवश्यक नहीं है, तो वह अपने समक्ष किए गए पुनरीक्षण आवेदनों को सत्र न्यायाधीश को स्थानांतरित करने का निर्देश देगा।
(2) जब भी पुनरीक्षण के लिए कोई आवेदन उच्च न्यायालय को स्थानांतरित किया जाता है, तो वह न्यायालय उससे इस प्रकार निपटेगा मानो वह आवेदन उसके समक्ष विधिवत रूप से किया गया हो।
(3) जब भी पुनरीक्षण के लिए कोई आवेदन सत्र न्यायाधीश को स्थानांतरित किया जाता है, तो वह न्यायाधीश उससे इस प्रकार निपटेगा जैसे कि वह आवेदन उसके समक्ष विधिवत रूप से किया गया हो।
(4) जहां पुनरीक्षण के लिए आवेदन उच्च न्यायालय द्वारा सत्र न्यायाधीश को स्थानांतरित किया जाता है, तो उच्च न्यायालय या किसी अन्य न्यायालय में उस व्यक्ति या व्यक्तियों की ओर से पुनरीक्षण के लिए कोई और आवेदन नहीं किया जाएगा जिनके पुनरीक्षण के आवेदनों का निपटारा सत्र न्यायाधीश द्वारा किया गया है।
पूरा पढ़ें: BNSS §443(2) जब भी पुनरीक्षण के लिए कोई आवेदन उच्च न्यायालय को स्थानांतरित किया जाता है, तो वह न्यायालय उससे इस प्रकार निपटेगा मानो वह आवेदन उसके समक्ष विधिवत रूप से किया गया हो।
(3) जब भी पुनरीक्षण के लिए कोई आवेदन सत्र न्यायाधीश को स्थानांतरित किया जाता है, तो वह न्यायाधीश उससे इस प्रकार निपटेगा जैसे कि वह आवेदन उसके समक्ष विधिवत रूप से किया गया हो।
(4) जहां पुनरीक्षण के लिए आवेदन उच्च न्यायालय द्वारा सत्र न्यायाधीश को स्थानांतरित किया जाता है, तो उच्च न्यायालय या किसी अन्य न्यायालय में उस व्यक्ति या व्यक्तियों की ओर से पुनरीक्षण के लिए कोई और आवेदन नहीं किया जाएगा जिनके पुनरीक्षण के आवेदनों का निपटारा सत्र न्यायाधीश द्वारा किया गया है।
नया कानून
CrPC §402
धारा 402. पुनरीक्षण मामलों को वापस लेने या अंतरित करने की उच्च न्यायालय की शक्ति
402. पुनरीक्षण मामलों को वापस लेने या अंतरित करने की उच्च न्यायालय की शक्ति
(1) जब कभी एक ही विचारण में दोषसिद्ध किया गया एक या अधिक व्यक्ति उच्च न्यायालय को पुनरीक्षण के लिए आवेदन करता है या करते हैं और उसी विचारण में दोषसिद्ध कोई अन्य व्यक्ति सत्र न्यायाधीश को पुनरीक्षण के लिए आवेदन करता है, तब उच्च न्यायालय, पक्षकारों की साधारण सुविधा और अंतर्ग्रस्त प्रश्न के महत्व को ध्यान में रखते हुए, यह विनिश्चय करेगा कि दोनों न्यायालयों में से किसको पुनरीक्षण के आवेदनों का अंतिम रूप से निपटारा करना चाहिए; और जब उच्च न्यायालय यह विनिश्चय करता है कि पुनरीक्षण के सभी आवेदनों का निपटारा उसी के द्वारा किया जाना चाहिए, तब उच्च न्यायालय यह निदेश देगा कि सत्र न्यायाधीश के समक्ष लंबित पुनरीक्षण के आवेदन उसे अंतरित कर दिए जाएं; और जहां उच्च न्यायालय यह विनिश्चय करता है कि पुनरीक्षण के आवेदनों का निपटारा उसके द्वारा किया जाना आवश्यक नहीं है, वहां वह यह निदेश देगा कि उसे किए गए पुनरीक्षण के आवेदन सत्र न्यायाधीश को अंतरित कर दिए जाएं।
(2) जब कभी पुनरीक्षण के लिए कोई आवेदन उच्च न्यायालय को अंतरित किया जाता है, तब वह न्यायालय उसका निपटारा इस प्रकार करेगा मानो वह उसके समक्ष सम्यक् रूप से किया गया आवेदन हो।
(3) जब कभी पुनरीक्षण के लिए कोई आवेदन सत्र न्यायाधीश को अंतरित किया जाता है, तब वह न्यायाधीश उसका निपटारा इस प्रकार करेगा मानो वह उसके समक्ष सम्यक् रूप से किया गया आवेदन हो।
(4) जहां पुनरीक्षण के लिए कोई आवेदन उच्च न्यायालय द्वारा सत्र न्यायाधीश को अंतरित किया जाता है, वहां उस व्यक्ति या उन व्यक्तियों की प्रेरणा पर, जिसके या जिनके पुनरीक्षण के आवेदनों का निपटारा सत्र न्यायाधीश द्वारा किया गया है, पुनरीक्षण के लिए कोई आगे का आवेदन उच्च न्यायालय को या किसी अन्य न्यायालय को नहीं होगा।
पूरा पढ़ें: CrPC §402(1) जब कभी एक ही विचारण में दोषसिद्ध किया गया एक या अधिक व्यक्ति उच्च न्यायालय को पुनरीक्षण के लिए आवेदन करता है या करते हैं और उसी विचारण में दोषसिद्ध कोई अन्य व्यक्ति सत्र न्यायाधीश को पुनरीक्षण के लिए आवेदन करता है, तब उच्च न्यायालय, पक्षकारों की साधारण सुविधा और अंतर्ग्रस्त प्रश्न के महत्व को ध्यान में रखते हुए, यह विनिश्चय करेगा कि दोनों न्यायालयों में से किसको पुनरीक्षण के आवेदनों का अंतिम रूप से निपटारा करना चाहिए; और जब उच्च न्यायालय यह विनिश्चय करता है कि पुनरीक्षण के सभी आवेदनों का निपटारा उसी के द्वारा किया जाना चाहिए, तब उच्च न्यायालय यह निदेश देगा कि सत्र न्यायाधीश के समक्ष लंबित पुनरीक्षण के आवेदन उसे अंतरित कर दिए जाएं; और जहां उच्च न्यायालय यह विनिश्चय करता है कि पुनरीक्षण के आवेदनों का निपटारा उसके द्वारा किया जाना आवश्यक नहीं है, वहां वह यह निदेश देगा कि उसे किए गए पुनरीक्षण के आवेदन सत्र न्यायाधीश को अंतरित कर दिए जाएं।
(2) जब कभी पुनरीक्षण के लिए कोई आवेदन उच्च न्यायालय को अंतरित किया जाता है, तब वह न्यायालय उसका निपटारा इस प्रकार करेगा मानो वह उसके समक्ष सम्यक् रूप से किया गया आवेदन हो।
(3) जब कभी पुनरीक्षण के लिए कोई आवेदन सत्र न्यायाधीश को अंतरित किया जाता है, तब वह न्यायाधीश उसका निपटारा इस प्रकार करेगा मानो वह उसके समक्ष सम्यक् रूप से किया गया आवेदन हो।
(4) जहां पुनरीक्षण के लिए कोई आवेदन उच्च न्यायालय द्वारा सत्र न्यायाधीश को अंतरित किया जाता है, वहां उस व्यक्ति या उन व्यक्तियों की प्रेरणा पर, जिसके या जिनके पुनरीक्षण के आवेदनों का निपटारा सत्र न्यायाधीश द्वारा किया गया है, पुनरीक्षण के लिए कोई आगे का आवेदन उच्च न्यायालय को या किसी अन्य न्यायालय को नहीं होगा।
1 जुलाई 2024 से पहले दर्ज मामलों पर पुराना कानून लागू रहता है। यह जानकारी शैक्षिक है, कानूनी सलाह नहीं।

