पाठ लगभग अपरिवर्तित है
BNSS धारा 365 अब CrPC धारा 326 है
धारा 365: आंशिक रूप से एक मजिस्ट्रेट द्वारा और आंशिक रूप से दूसरे द्वारा दर्ज किए गए साक्ष्य पर दोषसिद्धि या प्रतिबद्धता
पुराना कानून
BNSS §365
धारा 365: आंशिक रूप से एक मजिस्ट्रेट द्वारा और आंशिक रूप से दूसरे द्वारा दर्ज किए गए साक्ष्य पर दोषसिद्धि या प्रतिबद्धता
365. (1) जब भी कोई न्यायाधीश या मजिस्ट्रेट, किसी जांच या मुकदमे में पूरे साक्ष्य या उसके किसी हिस्से को सुनने और दर्ज करने के बाद, उसमें अधिकार क्षेत्र का प्रयोग करना बंद कर देता है और उसके स्थान पर कोई अन्य न्यायाधीश या मजिस्ट्रेट आता है, जो ऐसा करता है और जो ऐसा करता है। क्षेत्राधिकार, इस प्रकार उत्तराधिकारी न्यायाधीश या मजिस्ट्रेट अपने पूर्ववर्ती द्वारा दर्ज किए गए साक्ष्य पर कार्रवाई कर सकते हैं, या आंशिक रूप से अपने पूर्ववर्ती द्वारा दर्ज किए गए और आंशिक रूप से स्वयं द्वारा दर्ज किए गए:
बशर्ते कि यदि उत्तरवर्ती न्यायाधीश या मजिस्ट्रेट की राय है कि जिन गवाहों का साक्ष्य पहले ही दर्ज किया जा चुका है, उनमें से किसी की आगे की परीक्षा न्याय के हित में आवश्यक है, तो वह ऐसे किसी भी गवाह को फिर से बुला सकता है, और ऐसी आगे की परीक्षा के बाद क्रॉस कर सकता है। -परीक्षा और पुन:परीक्षा, यदि कोई हो, जैसा कि वह अनुमति दे, गवाह को बरी कर दिया जाएगा।
(2) जब कोई मामला इस संहिता के प्रावधानों के तहत एक न्यायाधीश से दूसरे न्यायाधीश या एक मजिस्ट्रेट से दूसरे मजिस्ट्रेट के पास स्थानांतरित किया जाता है, तो यह माना जाएगा कि पहले वाले ने वहां अधिकार क्षेत्र का प्रयोग करना बंद कर दिया है, और बाद वाले द्वारा उत्तराधिकारी बनाया जाएगा। उपधारा (1) का अर्थ.
(3) इस धारा में कुछ भी सारांश परीक्षणों या उन मामलों पर लागू नहीं होता है जिनमें कार्यवाही धारा 361 के तहत रोक दी गई है या जिनमें कार्यवाही धारा 364 के तहत एक वरिष्ठ मजिस्ट्रेट को प्रस्तुत की गई है।
पूरा पढ़ें: BNSS §365बशर्ते कि यदि उत्तरवर्ती न्यायाधीश या मजिस्ट्रेट की राय है कि जिन गवाहों का साक्ष्य पहले ही दर्ज किया जा चुका है, उनमें से किसी की आगे की परीक्षा न्याय के हित में आवश्यक है, तो वह ऐसे किसी भी गवाह को फिर से बुला सकता है, और ऐसी आगे की परीक्षा के बाद क्रॉस कर सकता है। -परीक्षा और पुन:परीक्षा, यदि कोई हो, जैसा कि वह अनुमति दे, गवाह को बरी कर दिया जाएगा।
(2) जब कोई मामला इस संहिता के प्रावधानों के तहत एक न्यायाधीश से दूसरे न्यायाधीश या एक मजिस्ट्रेट से दूसरे मजिस्ट्रेट के पास स्थानांतरित किया जाता है, तो यह माना जाएगा कि पहले वाले ने वहां अधिकार क्षेत्र का प्रयोग करना बंद कर दिया है, और बाद वाले द्वारा उत्तराधिकारी बनाया जाएगा। उपधारा (1) का अर्थ.
(3) इस धारा में कुछ भी सारांश परीक्षणों या उन मामलों पर लागू नहीं होता है जिनमें कार्यवाही धारा 361 के तहत रोक दी गई है या जिनमें कार्यवाही धारा 364 के तहत एक वरिष्ठ मजिस्ट्रेट को प्रस्तुत की गई है।
नया कानून
CrPC §326
धारा 326. आंशिक रूप से एक मजिस्ट्रेट द्वारा और आंशिक रूप से दूसरे द्वारा अभिलिखित साक्ष्य पर दोषसिद्धि या सुपुर्दगी
326. आंशिक रूप से एक मजिस्ट्रेट द्वारा और आंशिक रूप से दूसरे द्वारा अभिलिखित साक्ष्य पर दोषसिद्धि या सुपुर्दगी
(1) जब कभी कोई न्यायाधीश या मजिस्ट्रेट किसी जांच या विचारण में संपूर्ण साक्ष्य या उसका कोई भाग सुनने और अभिलिखित करने के पश्चात् उसमें अधिकारिता का प्रयोग करना बंद कर देता है और उसका स्थान कोई ऐसा अन्य न्यायाधीश या मजिस्ट्रेट लेता है जिसे ऐसी अधिकारिता प्राप्त है और जो उसका प्रयोग करता है, तब इस प्रकार स्थान लेने वाला न्यायाधीश या मजिस्ट्रेट अपने पूर्ववर्ती द्वारा इस प्रकार अभिलिखित साक्ष्य पर, या आंशिक रूप से अपने पूर्ववर्ती द्वारा और आंशिक रूप से स्वयं अपने द्वारा अभिलिखित साक्ष्य पर, कार्यवाही कर सकेगा:
परन्तु यदि स्थान लेने वाले न्यायाधीश या मजिस्ट्रेट की यह राय है कि न्याय के हित में ऐसे किसी साक्षी की, जिसका साक्ष्य पहले ही अभिलिखित किया जा चुका है, आगे परीक्षा आवश्यक है, तो वह ऐसे किसी साक्षी को पुनः समन कर सकेगा, और ऐसी आगे की परीक्षा, प्रतिपरीक्षा और पुनःपरीक्षा के पश्चात्, यदि कोई हो, जिसकी वह अनुज्ञा दे, साक्षी को उन्मोचित कर दिया जाएगा।
(2) जब कोई मामला इस संहिता के उपबंधों के अधीन एक न्यायाधीश से दूसरे न्यायाधीश को या एक मजिस्ट्रेट से दूसरे मजिस्ट्रेट को अंतरित किया जाता है, तब उपधारा (1) के अर्थ में यह समझा जाएगा कि पूर्ववर्ती ने उसमें अधिकारिता का प्रयोग करना बंद कर दिया है और पश्चात्वर्ती ने उसका स्थान ले लिया है।
(3) इस धारा की कोई बात संक्षिप्त विचारणों को या उन मामलों को लागू नहीं होती जिनमें कार्यवाहियां धारा 322 के अधीन रोकी गई हैं या जिनमें कार्यवाहियां धारा 325 के अधीन किसी वरिष्ठ मजिस्ट्रेट को भेजी गई हैं।
राज्य संशोधन
राजस्थान:
धारा 326 में—
(क) उपधारा (1) में, जहां कहीं शब्द “मजिस्ट्रेट” आता है, वहां शब्द “न्यायाधीश या मजिस्ट्रेट” रखे जाएंगे;
(ख) उपधारा (2) में, शब्दों “एक मजिस्ट्रेट से दूसरे मजिस्ट्रेट को” से पूर्व शब्द “एक न्यायाधीश से दूसरे न्यायाधीश को या” रखे जाएंगे।
[राजस्थान अधिनियम 1977 का 10, धारा 3 द्वारा (3-9-1977 से प्रभावी)]
उत्तर प्रदेश:
धारा 326 में—
(क) उपधारा (1) में, जहां कहीं शब्द “मजिस्ट्रेट” आता है, वहां शब्द “न्यायाधीश या मजिस्ट्रेट” रखे जाएंगे;
(ख) उपधारा (2) में, शब्दों “एक मजिस्ट्रेट से दूसरे मजिस्ट्रेट को” से पूर्व शब्द “एक न्यायाधीश से दूसरे न्यायाधीश को या” रखे जाएंगे।
[उत्तर प्रदेश अधिनियम 1976 का 16, धारा 8 द्वारा (1-5-1976 से प्रभावी)]
पूरा पढ़ें: CrPC §326(1) जब कभी कोई न्यायाधीश या मजिस्ट्रेट किसी जांच या विचारण में संपूर्ण साक्ष्य या उसका कोई भाग सुनने और अभिलिखित करने के पश्चात् उसमें अधिकारिता का प्रयोग करना बंद कर देता है और उसका स्थान कोई ऐसा अन्य न्यायाधीश या मजिस्ट्रेट लेता है जिसे ऐसी अधिकारिता प्राप्त है और जो उसका प्रयोग करता है, तब इस प्रकार स्थान लेने वाला न्यायाधीश या मजिस्ट्रेट अपने पूर्ववर्ती द्वारा इस प्रकार अभिलिखित साक्ष्य पर, या आंशिक रूप से अपने पूर्ववर्ती द्वारा और आंशिक रूप से स्वयं अपने द्वारा अभिलिखित साक्ष्य पर, कार्यवाही कर सकेगा:
परन्तु यदि स्थान लेने वाले न्यायाधीश या मजिस्ट्रेट की यह राय है कि न्याय के हित में ऐसे किसी साक्षी की, जिसका साक्ष्य पहले ही अभिलिखित किया जा चुका है, आगे परीक्षा आवश्यक है, तो वह ऐसे किसी साक्षी को पुनः समन कर सकेगा, और ऐसी आगे की परीक्षा, प्रतिपरीक्षा और पुनःपरीक्षा के पश्चात्, यदि कोई हो, जिसकी वह अनुज्ञा दे, साक्षी को उन्मोचित कर दिया जाएगा।
(2) जब कोई मामला इस संहिता के उपबंधों के अधीन एक न्यायाधीश से दूसरे न्यायाधीश को या एक मजिस्ट्रेट से दूसरे मजिस्ट्रेट को अंतरित किया जाता है, तब उपधारा (1) के अर्थ में यह समझा जाएगा कि पूर्ववर्ती ने उसमें अधिकारिता का प्रयोग करना बंद कर दिया है और पश्चात्वर्ती ने उसका स्थान ले लिया है।
(3) इस धारा की कोई बात संक्षिप्त विचारणों को या उन मामलों को लागू नहीं होती जिनमें कार्यवाहियां धारा 322 के अधीन रोकी गई हैं या जिनमें कार्यवाहियां धारा 325 के अधीन किसी वरिष्ठ मजिस्ट्रेट को भेजी गई हैं।
राज्य संशोधन
राजस्थान:
धारा 326 में—
(क) उपधारा (1) में, जहां कहीं शब्द “मजिस्ट्रेट” आता है, वहां शब्द “न्यायाधीश या मजिस्ट्रेट” रखे जाएंगे;
(ख) उपधारा (2) में, शब्दों “एक मजिस्ट्रेट से दूसरे मजिस्ट्रेट को” से पूर्व शब्द “एक न्यायाधीश से दूसरे न्यायाधीश को या” रखे जाएंगे।
[राजस्थान अधिनियम 1977 का 10, धारा 3 द्वारा (3-9-1977 से प्रभावी)]
उत्तर प्रदेश:
धारा 326 में—
(क) उपधारा (1) में, जहां कहीं शब्द “मजिस्ट्रेट” आता है, वहां शब्द “न्यायाधीश या मजिस्ट्रेट” रखे जाएंगे;
(ख) उपधारा (2) में, शब्दों “एक मजिस्ट्रेट से दूसरे मजिस्ट्रेट को” से पूर्व शब्द “एक न्यायाधीश से दूसरे न्यायाधीश को या” रखे जाएंगे।
[उत्तर प्रदेश अधिनियम 1976 का 16, धारा 8 द्वारा (1-5-1976 से प्रभावी)]
1 जुलाई 2024 से पहले दर्ज मामलों पर पुराना कानून लागू रहता है। यह जानकारी शैक्षिक है, कानूनी सलाह नहीं।

