पाठ लगभग अपरिवर्तित है
BNSS धारा 276 अब CrPC धारा 253 है
छोटे-मोटे मामलों में आरोपी की अनुपस्थिति में दोषी होने की स्वीकारोक्ति के आधार पर दोषसिद्धि।
पुराना कानून
BNSS §276
छोटे-मोटे मामलों में आरोपी की अनुपस्थिति में दोषी होने की स्वीकारोक्ति के आधार पर दोषसिद्धि।
(1) जहां धारा 229 के तहत समन जारी किया गया है और आरोपी मजिस्ट्रेट के समक्ष उपस्थित हुए बिना आरोप स्वीकार करना चाहता है, तो वह डाक या संदेशवाहक द्वारा मजिस्ट्रेट को एक पत्र भेजेगा जिसमें उसका निवेदन और समन में निर्दिष्ट जुर्माने की राशि भी होगी।
(2) मजिस्ट्रेट अपने विवेक से, अभियुक्त की अनुपस्थिति में, उसके अपराध स्वीकारोक्ति के आधार पर उसे दोषी ठहरा सकता है और उसे समन में निर्दिष्ट जुर्माना अदा करने का दंड दे सकता है, और अभियुक्त द्वारा प्रेषित राशि उस जुर्माने में समायोजित की जाएगी, या यदि अभियुक्त द्वारा इस संबंध में अधिकृत अधिवक्ता अभियुक्त की ओर से अपराध स्वीकारोक्ति करता है, तो मजिस्ट्रेट अधिवक्ता द्वारा प्रयुक्त शब्दों में यथासंभव अपराध स्वीकारोक्ति दर्ज करेगा और अपने विवेक से, ऐसी स्वीकारोक्ति के आधार पर अभियुक्त को दोषी ठहरा सकता है और उसे उपर्युक्त दंड दे सकता है।
पूरा पढ़ें: BNSS §276(2) मजिस्ट्रेट अपने विवेक से, अभियुक्त की अनुपस्थिति में, उसके अपराध स्वीकारोक्ति के आधार पर उसे दोषी ठहरा सकता है और उसे समन में निर्दिष्ट जुर्माना अदा करने का दंड दे सकता है, और अभियुक्त द्वारा प्रेषित राशि उस जुर्माने में समायोजित की जाएगी, या यदि अभियुक्त द्वारा इस संबंध में अधिकृत अधिवक्ता अभियुक्त की ओर से अपराध स्वीकारोक्ति करता है, तो मजिस्ट्रेट अधिवक्ता द्वारा प्रयुक्त शब्दों में यथासंभव अपराध स्वीकारोक्ति दर्ज करेगा और अपने विवेक से, ऐसी स्वीकारोक्ति के आधार पर अभियुक्त को दोषी ठहरा सकता है और उसे उपर्युक्त दंड दे सकता है।
नया कानून
CrPC §253
धारा 253. क्षुद्र मामलों में अभियुक्त की अनुपस्थिति में दोषी होने के अभिवाक् पर दोषसिद्धि
253. क्षुद्र मामलों में अभियुक्त की अनुपस्थिति में दोषी होने के अभिवाक् पर दोषसिद्धि
(1) जहां धारा 206 के अधीन कोई समन जारी किया गया है और अभियुक्त मजिस्ट्रेट के समक्ष हाजिर हुए बिना आरोप के लिए दोषी होने का अभिवचन करना चाहता है, वहां वह मजिस्ट्रेट को डाक द्वारा या संदेशवाहक द्वारा एक पत्र भेजेगा, जिसमें उसका अभिवाक् तथा समन में विनिर्दिष्ट जुर्माने की रकम अंतर्विष्ट होगी।
(2) मजिस्ट्रेट, अपने विवेकानुसार, अभियुक्त को उसकी अनुपस्थिति में उसके दोषी होने के अभिवाक् पर दोषसिद्ध कर सकेगा और उसे समन में विनिर्दिष्ट जुर्माना देने का दंडादेश दे सकेगा, तथा अभियुक्त द्वारा भेजी गई रकम उस जुर्माने में समायोजित की जाएगी; अथवा जहां अभियुक्त द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत कोई प्लीडर अभियुक्त की ओर से दोषी होने का अभिवचन करता है, वहां मजिस्ट्रेट उस अभिवाक् को यथासंभव उन्हीं शब्दों में अभिलिखित करेगा, जो प्लीडर द्वारा प्रयुक्त किए गए हैं, और अपने विवेकानुसार अभियुक्त को ऐसे अभिवाक् पर दोषसिद्ध कर सकेगा तथा उसे यथापूर्वोक्त दंडादेश दे सकेगा।
पूरा पढ़ें: CrPC §253(1) जहां धारा 206 के अधीन कोई समन जारी किया गया है और अभियुक्त मजिस्ट्रेट के समक्ष हाजिर हुए बिना आरोप के लिए दोषी होने का अभिवचन करना चाहता है, वहां वह मजिस्ट्रेट को डाक द्वारा या संदेशवाहक द्वारा एक पत्र भेजेगा, जिसमें उसका अभिवाक् तथा समन में विनिर्दिष्ट जुर्माने की रकम अंतर्विष्ट होगी।
(2) मजिस्ट्रेट, अपने विवेकानुसार, अभियुक्त को उसकी अनुपस्थिति में उसके दोषी होने के अभिवाक् पर दोषसिद्ध कर सकेगा और उसे समन में विनिर्दिष्ट जुर्माना देने का दंडादेश दे सकेगा, तथा अभियुक्त द्वारा भेजी गई रकम उस जुर्माने में समायोजित की जाएगी; अथवा जहां अभियुक्त द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत कोई प्लीडर अभियुक्त की ओर से दोषी होने का अभिवचन करता है, वहां मजिस्ट्रेट उस अभिवाक् को यथासंभव उन्हीं शब्दों में अभिलिखित करेगा, जो प्लीडर द्वारा प्रयुक्त किए गए हैं, और अपने विवेकानुसार अभियुक्त को ऐसे अभिवाक् पर दोषसिद्ध कर सकेगा तथा उसे यथापूर्वोक्त दंडादेश दे सकेगा।
1 जुलाई 2024 से पहले दर्ज मामलों पर पुराना कानून लागू रहता है। यह जानकारी शैक्षिक है, कानूनी सलाह नहीं।
