पाठ लगभग अपरिवर्तित है
BNSS धारा 213 अब CrPC धारा 193 है
सत्र न्यायालय द्वारा अपराधों का संज्ञान लेना।
पुराना कानून
BNSS §213
सत्र न्यायालय द्वारा अपराधों का संज्ञान लेना।
जब तक इस संहिता या किसी अन्य कानून द्वारा स्पष्ट रूप से अन्यथा प्रावधान न किया गया हो, कोई भी सत्र न्यायालय मूल क्षेत्राधिकार के न्यायालय के रूप में किसी अपराध का संज्ञान तब तक नहीं लेगा जब तक कि मामला इस संहिता के तहत किसी मजिस्ट्रेट द्वारा उसे सौंपा न गया हो।
पूरा पढ़ें: BNSS §213नया कानून
CrPC §193
धारा 193. सत्र न्यायालयों द्वारा अपराधों का संज्ञान
193. सत्र न्यायालयों द्वारा अपराधों का संज्ञान
इस संहिता द्वारा या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि द्वारा अभिव्यक्त रूप से अन्यथा उपबंधित के सिवाय, कोई सत्र न्यायालय आरंभिक अधिकारिता वाले न्यायालय के रूप में किसी अपराध का संज्ञान तब तक नहीं करेगा, जब तक कि मामला इस संहिता के अधीन किसी मजिस्ट्रेट द्वारा उसे सुपुर्द न कर दिया गया हो।
पूरा पढ़ें: CrPC §193इस संहिता द्वारा या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि द्वारा अभिव्यक्त रूप से अन्यथा उपबंधित के सिवाय, कोई सत्र न्यायालय आरंभिक अधिकारिता वाले न्यायालय के रूप में किसी अपराध का संज्ञान तब तक नहीं करेगा, जब तक कि मामला इस संहिता के अधीन किसी मजिस्ट्रेट द्वारा उसे सुपुर्द न कर दिया गया हो।
1 जुलाई 2024 से पहले दर्ज मामलों पर पुराना कानून लागू रहता है। यह जानकारी शैक्षिक है, कानूनी सलाह नहीं।
