पुराना कानून
BNSS §20
अभियोजन निदेशालय।
(1) राज्य सरकार निम्नलिखित की स्थापना कर सकती है,—
(क) राज्य में अभियोजन निदेशालय, जिसमें एक अभियोजन निदेशक और जितने चाहें उतने उप-अभियोजन निदेशक होंगे; और
(ख) प्रत्येक जिले में एक जिला अभियोजन निदेशालय, जिसमें आवश्यकतानुसार उप निदेशक और सहायक अभियोजन निदेशक होंगे।
(2) कोई व्यक्ति नियुक्ति के लिए पात्र होगा,—
(क) अभियोजन निदेशक या उप अभियोजन निदेशक के रूप में, यदि वह कम से कम पंद्रह वर्षों से अधिवक्ता के रूप में कार्यरत है या सत्र न्यायाधीश है या रह चुका है;
(ख) अभियोजन के सहायक निदेशक के रूप में, यदि वह कम से कम सात वर्षों से अधिवक्ता के रूप में अभ्यास कर रहा हो या प्रथम श्रेणी का मजिस्ट्रेट रहा हो।
(3) अभियोजन निदेशालय का नेतृत्व अभियोजन निदेशक द्वारा किया जाएगा, जो राज्य में गृह विभाग के प्रशासनिक नियंत्रण के अधीन कार्य करेगा।
(4) प्रत्येक उप अभियोजन निदेशक या सहायक अभियोजन निदेशक, अभियोजन निदेशक के अधीन होगा; और प्रत्येक सहायक अभियोजन निदेशक, उप अभियोजन निदेशक के अधीन होगा।
(5) धारा 18 की उपधारा (1) या उपधारा (8) के तहत राज्य सरकार द्वारा उच्च न्यायालय में मामलों का संचालन करने के लिए नियुक्त प्रत्येक लोक अभियोजक, अतिरिक्त लोक अभियोजक और विशेष लोक अभियोजक अभियोजन निदेशक के अधीन होगा।
(6) धारा 18 की उपधारा (3) या उपधारा (8) के तहत जिला न्यायालयों में मामलों का संचालन करने के लिए राज्य सरकार द्वारा नियुक्त प्रत्येक लोक अभियोजक, अतिरिक्त लोक अभियोजक और विशेष लोक अभियोजक तथा धारा 19 की उपधारा (1) के तहत नियुक्त प्रत्येक सहायक लोक अभियोजक अभियोजन उप निदेशक या अभियोजन सहायक निदेशक के अधीन होगा।
(7) अभियोजन निदेशक की शक्तियाँ और कार्य उन मामलों की निगरानी करना होगा जिनमें अपराध दस वर्ष या उससे अधिक, या आजीवन कारावास, या मृत्युदंड से दंडनीय हैं; कार्यवाही में तेजी लाना और अपील दाखिल करने पर राय देना।
(8) अभियोजन उप निदेशक की शक्तियाँ और कार्य पुलिस रिपोर्ट की जाँच और छानबीन करना तथा उन मामलों की निगरानी करना होगा जिनमें अपराध सात वर्ष या उससे अधिक, लेकिन दस वर्ष से कम, दंडनीय हैं, ताकि उनका शीघ्र निपटान सुनिश्चित किया जा सके।
(9) अभियोजन सहायक निदेशक का कार्य उन मामलों की निगरानी करना होगा जिनमें अपराध सात वर्ष से कम अवधि के लिए दंडनीय हैं।
(10) उपधारा (7), (8) और (9) में किसी बात के होते हुए भी, अभियोजन निदेशक, उप निदेशक या सहायक निदेशक को इस संहिता के अंतर्गत सभी कार्यवाही करने और उसके लिए उत्तरदायी होने का अधिकार होगा।
(11) अभियोजन निदेशक, उप अभियोजन निदेशक और सहायक अभियोजन निदेशकों की अन्य शक्तियाँ और कार्य तथा वे क्षेत्र जिनके लिए प्रत्येक उप अभियोजन निदेशक या सहायक अभियोजन निदेशक नियुक्त किए गए हैं, वे ऐसे होंगे जिन्हें राज्य सरकार अधिसूचना द्वारा निर्दिष्ट कर सकती है।
(12) इस धारा के प्रावधान राज्य के अधिवक्ता जनरल पर लोक अभियोजक के कार्यों का निर्वहन करते समय लागू नहीं होंगे।
पूरा पढ़ें: BNSS §20(क) राज्य में अभियोजन निदेशालय, जिसमें एक अभियोजन निदेशक और जितने चाहें उतने उप-अभियोजन निदेशक होंगे; और
(ख) प्रत्येक जिले में एक जिला अभियोजन निदेशालय, जिसमें आवश्यकतानुसार उप निदेशक और सहायक अभियोजन निदेशक होंगे।
(2) कोई व्यक्ति नियुक्ति के लिए पात्र होगा,—
(क) अभियोजन निदेशक या उप अभियोजन निदेशक के रूप में, यदि वह कम से कम पंद्रह वर्षों से अधिवक्ता के रूप में कार्यरत है या सत्र न्यायाधीश है या रह चुका है;
(ख) अभियोजन के सहायक निदेशक के रूप में, यदि वह कम से कम सात वर्षों से अधिवक्ता के रूप में अभ्यास कर रहा हो या प्रथम श्रेणी का मजिस्ट्रेट रहा हो।
(3) अभियोजन निदेशालय का नेतृत्व अभियोजन निदेशक द्वारा किया जाएगा, जो राज्य में गृह विभाग के प्रशासनिक नियंत्रण के अधीन कार्य करेगा।
(4) प्रत्येक उप अभियोजन निदेशक या सहायक अभियोजन निदेशक, अभियोजन निदेशक के अधीन होगा; और प्रत्येक सहायक अभियोजन निदेशक, उप अभियोजन निदेशक के अधीन होगा।
(5) धारा 18 की उपधारा (1) या उपधारा (8) के तहत राज्य सरकार द्वारा उच्च न्यायालय में मामलों का संचालन करने के लिए नियुक्त प्रत्येक लोक अभियोजक, अतिरिक्त लोक अभियोजक और विशेष लोक अभियोजक अभियोजन निदेशक के अधीन होगा।
(6) धारा 18 की उपधारा (3) या उपधारा (8) के तहत जिला न्यायालयों में मामलों का संचालन करने के लिए राज्य सरकार द्वारा नियुक्त प्रत्येक लोक अभियोजक, अतिरिक्त लोक अभियोजक और विशेष लोक अभियोजक तथा धारा 19 की उपधारा (1) के तहत नियुक्त प्रत्येक सहायक लोक अभियोजक अभियोजन उप निदेशक या अभियोजन सहायक निदेशक के अधीन होगा।
(7) अभियोजन निदेशक की शक्तियाँ और कार्य उन मामलों की निगरानी करना होगा जिनमें अपराध दस वर्ष या उससे अधिक, या आजीवन कारावास, या मृत्युदंड से दंडनीय हैं; कार्यवाही में तेजी लाना और अपील दाखिल करने पर राय देना।
(8) अभियोजन उप निदेशक की शक्तियाँ और कार्य पुलिस रिपोर्ट की जाँच और छानबीन करना तथा उन मामलों की निगरानी करना होगा जिनमें अपराध सात वर्ष या उससे अधिक, लेकिन दस वर्ष से कम, दंडनीय हैं, ताकि उनका शीघ्र निपटान सुनिश्चित किया जा सके।
(9) अभियोजन सहायक निदेशक का कार्य उन मामलों की निगरानी करना होगा जिनमें अपराध सात वर्ष से कम अवधि के लिए दंडनीय हैं।
(10) उपधारा (7), (8) और (9) में किसी बात के होते हुए भी, अभियोजन निदेशक, उप निदेशक या सहायक निदेशक को इस संहिता के अंतर्गत सभी कार्यवाही करने और उसके लिए उत्तरदायी होने का अधिकार होगा।
(11) अभियोजन निदेशक, उप अभियोजन निदेशक और सहायक अभियोजन निदेशकों की अन्य शक्तियाँ और कार्य तथा वे क्षेत्र जिनके लिए प्रत्येक उप अभियोजन निदेशक या सहायक अभियोजन निदेशक नियुक्त किए गए हैं, वे ऐसे होंगे जिन्हें राज्य सरकार अधिसूचना द्वारा निर्दिष्ट कर सकती है।
(12) इस धारा के प्रावधान राज्य के अधिवक्ता जनरल पर लोक अभियोजक के कार्यों का निर्वहन करते समय लागू नहीं होंगे।
नया कानून
CrPC §25A
धारा 25A. अभियोजन निदेशालय
25A. अभियोजन निदेशालय
(1) राज्य सरकार एक अभियोजन निदेशालय स्थापित कर सकेगी, जो एक अभियोजन निदेशक और उतने उप अभियोजन निदेशकों से मिलकर बनेगा, जितने वह ठीक समझे।
(2) कोई व्यक्ति अभियोजन निदेशक या उप अभियोजन निदेशक नियुक्त किए जाने के लिए तभी पात्र होगा, जब वह कम से कम दस वर्ष तक अधिवक्ता के रूप में व्यवसाय करता रहा हो, और ऐसी नियुक्ति उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायमूर्ति की सहमति से की जाएगी।
(3) अभियोजन निदेशालय का प्रधान अभियोजन निदेशक होगा, जो राज्य में गृह विभाग के प्रधान के प्रशासनिक नियंत्रण के अधीन कार्य करेगा।
(4) हर उप अभियोजन निदेशक, अभियोजन निदेशक के अधीनस्थ होगा।
(5) उच्च न्यायालय में मामलों का संचालन करने के लिए राज्य सरकार द्वारा धारा 24 की उपधारा (1) के, या यथास्थिति उपधारा (8) के, अधीन नियुक्त हर लोक अभियोजक, अपर लोक अभियोजक और विशेष लोक अभियोजक, अभियोजन निदेशक के अधीनस्थ होगा।
(6) जिला न्यायालयों में मामलों का संचालन करने के लिए राज्य सरकार द्वारा धारा 24 की उपधारा (3) के, या यथास्थिति उपधारा (8) के, अधीन नियुक्त हर लोक अभियोजक, अपर लोक अभियोजक और विशेष लोक अभियोजक तथा धारा 25 की उपधारा (1) के अधीन नियुक्त हर सहायक लोक अभियोजक, उप अभियोजन निदेशक के अधीनस्थ होगा।
(7) अभियोजन निदेशक और उप अभियोजन निदेशकों की शक्तियां और कृत्य तथा वे क्षेत्र, जिनके लिए उप अभियोजन निदेशकों में से हर एक नियुक्त किया गया है, ऐसे होंगे, जो राज्य सरकार, अधिसूचना द्वारा, विनिर्दिष्ट करे।
(8) इस धारा के उपबंध राज्य के महाधिवक्ता को, जब वह लोक अभियोजक के कृत्यों का पालन कर रहा हो, लागू नहीं होंगे।
पूरा पढ़ें: CrPC §25A(1) राज्य सरकार एक अभियोजन निदेशालय स्थापित कर सकेगी, जो एक अभियोजन निदेशक और उतने उप अभियोजन निदेशकों से मिलकर बनेगा, जितने वह ठीक समझे।
(2) कोई व्यक्ति अभियोजन निदेशक या उप अभियोजन निदेशक नियुक्त किए जाने के लिए तभी पात्र होगा, जब वह कम से कम दस वर्ष तक अधिवक्ता के रूप में व्यवसाय करता रहा हो, और ऐसी नियुक्ति उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायमूर्ति की सहमति से की जाएगी।
(3) अभियोजन निदेशालय का प्रधान अभियोजन निदेशक होगा, जो राज्य में गृह विभाग के प्रधान के प्रशासनिक नियंत्रण के अधीन कार्य करेगा।
(4) हर उप अभियोजन निदेशक, अभियोजन निदेशक के अधीनस्थ होगा।
(5) उच्च न्यायालय में मामलों का संचालन करने के लिए राज्य सरकार द्वारा धारा 24 की उपधारा (1) के, या यथास्थिति उपधारा (8) के, अधीन नियुक्त हर लोक अभियोजक, अपर लोक अभियोजक और विशेष लोक अभियोजक, अभियोजन निदेशक के अधीनस्थ होगा।
(6) जिला न्यायालयों में मामलों का संचालन करने के लिए राज्य सरकार द्वारा धारा 24 की उपधारा (3) के, या यथास्थिति उपधारा (8) के, अधीन नियुक्त हर लोक अभियोजक, अपर लोक अभियोजक और विशेष लोक अभियोजक तथा धारा 25 की उपधारा (1) के अधीन नियुक्त हर सहायक लोक अभियोजक, उप अभियोजन निदेशक के अधीनस्थ होगा।
(7) अभियोजन निदेशक और उप अभियोजन निदेशकों की शक्तियां और कृत्य तथा वे क्षेत्र, जिनके लिए उप अभियोजन निदेशकों में से हर एक नियुक्त किया गया है, ऐसे होंगे, जो राज्य सरकार, अधिसूचना द्वारा, विनिर्दिष्ट करे।
(8) इस धारा के उपबंध राज्य के महाधिवक्ता को, जब वह लोक अभियोजक के कृत्यों का पालन कर रहा हो, लागू नहीं होंगे।
1 जुलाई 2024 से पहले दर्ज मामलों पर पुराना कानून लागू रहता है। यह जानकारी शैक्षिक है, कानूनी सलाह नहीं।

