पाठ बदला गया है
BNSS धारा 190 अब CrPC धारा 170 है
पर्याप्त साक्ष्य होने पर मामलों को मजिस्ट्रेट के पास भेजा जाएगा।
पुराना कानून
BNSS §190
पर्याप्त साक्ष्य होने पर मामलों को मजिस्ट्रेट के पास भेजा जाएगा।
(1) यदि इस अध्याय के अंतर्गत जांच करने पर पुलिस स्टेशन के प्रभारी अधिकारी को यह प्रतीत होता है कि उपर्युक्त अनुसार पर्याप्त साक्ष्य या उचित आधार मौजूद हैं, तो ऐसा अधिकारी अभियुक्त को हिरासत में लेकर उस मजिस्ट्रेट के पास भेजेगा जो पुलिस रिपोर्ट पर अपराध का संज्ञान लेने और अभियुक्त पर मुकदमा चलाने या उसे मुकदमे के लिए भेजने के लिए अधिकृत है, या यदि अपराध जमानती है और अभियुक्त जमानत देने में सक्षम है, तो वह उससे किसी निर्धारित दिन ऐसे मजिस्ट्रेट के समक्ष उसकी उपस्थिति और अन्यथा निर्देश दिए जाने तक प्रतिदिन ऐसे मजिस्ट्रेट के समक्ष उसकी उपस्थिति के लिए जमानत लेगा:
बशर्ते कि यदि आरोपी हिरासत में नहीं है, तो पुलिस अधिकारी मजिस्ट्रेट के समक्ष उसकी उपस्थिति के लिए उस व्यक्ति से जमानत लेगा और जिस मजिस्ट्रेट को ऐसी रिपोर्ट भेजी जाती है, वह इस आधार पर उसे स्वीकार करने से इनकार नहीं करेगा कि आरोपी को हिरासत में नहीं लिया गया है।
(2) जब किसी पुलिस स्टेशन का प्रभारी अधिकारी किसी आरोपी व्यक्ति को मजिस्ट्रेट के पास भेजता है या इस धारा के तहत मजिस्ट्रेट के समक्ष उसकी उपस्थिति के लिए जमानत लेता है, तो वह मजिस्ट्रेट को कोई भी हथियार या अन्य वस्तु भेजेगा जिसे उसके समक्ष प्रस्तुत करना आवश्यक हो, और शिकायतकर्ता (यदि कोई हो) और उन व्यक्तियों में से, जो उस अधिकारी को मामले के तथ्यों और परिस्थितियों से परिचित प्रतीत होते हैं, जितने वह आवश्यक समझे, मजिस्ट्रेट के समक्ष निर्देशित अनुसार उपस्थित होने और आरोपी के विरुद्ध आरोप के मामले में अभियोजन चलाने या साक्ष्य देने (जैसा भी मामला हो) के लिए एक बांड निष्पादित करने की अपेक्षा करेगा।
(3) यदि बांड में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के न्यायालय का उल्लेख किया गया है, तो ऐसे न्यायालय में कोई भी न्यायालय शामिल माना जाएगा जिसे ऐसा मजिस्ट्रेट जांच या परीक्षण के लिए मामला संदर्भित कर सकता है, बशर्ते कि ऐसे संदर्भ की उचित सूचना शिकायतकर्ता या व्यक्तियों को दी जाए।
(4) जिस अधिकारी की उपस्थिति में बांड निष्पादित किया जाता है, वह उसकी एक प्रति निष्पादित करने वाले व्यक्तियों में से किसी एक को सौंप देगा, और फिर मूल प्रति अपनी रिपोर्ट के साथ मजिस्ट्रेट को भेज देगा।
पूरा पढ़ें: BNSS §190बशर्ते कि यदि आरोपी हिरासत में नहीं है, तो पुलिस अधिकारी मजिस्ट्रेट के समक्ष उसकी उपस्थिति के लिए उस व्यक्ति से जमानत लेगा और जिस मजिस्ट्रेट को ऐसी रिपोर्ट भेजी जाती है, वह इस आधार पर उसे स्वीकार करने से इनकार नहीं करेगा कि आरोपी को हिरासत में नहीं लिया गया है।
(2) जब किसी पुलिस स्टेशन का प्रभारी अधिकारी किसी आरोपी व्यक्ति को मजिस्ट्रेट के पास भेजता है या इस धारा के तहत मजिस्ट्रेट के समक्ष उसकी उपस्थिति के लिए जमानत लेता है, तो वह मजिस्ट्रेट को कोई भी हथियार या अन्य वस्तु भेजेगा जिसे उसके समक्ष प्रस्तुत करना आवश्यक हो, और शिकायतकर्ता (यदि कोई हो) और उन व्यक्तियों में से, जो उस अधिकारी को मामले के तथ्यों और परिस्थितियों से परिचित प्रतीत होते हैं, जितने वह आवश्यक समझे, मजिस्ट्रेट के समक्ष निर्देशित अनुसार उपस्थित होने और आरोपी के विरुद्ध आरोप के मामले में अभियोजन चलाने या साक्ष्य देने (जैसा भी मामला हो) के लिए एक बांड निष्पादित करने की अपेक्षा करेगा।
(3) यदि बांड में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के न्यायालय का उल्लेख किया गया है, तो ऐसे न्यायालय में कोई भी न्यायालय शामिल माना जाएगा जिसे ऐसा मजिस्ट्रेट जांच या परीक्षण के लिए मामला संदर्भित कर सकता है, बशर्ते कि ऐसे संदर्भ की उचित सूचना शिकायतकर्ता या व्यक्तियों को दी जाए।
(4) जिस अधिकारी की उपस्थिति में बांड निष्पादित किया जाता है, वह उसकी एक प्रति निष्पादित करने वाले व्यक्तियों में से किसी एक को सौंप देगा, और फिर मूल प्रति अपनी रिपोर्ट के साथ मजिस्ट्रेट को भेज देगा।
नया कानून
CrPC §170
धारा 170. साक्ष्य पर्याप्त होने पर मामलों का मजिस्ट्रेट के पास भेजा जाना
170. साक्ष्य पर्याप्त होने पर मामलों का मजिस्ट्रेट के पास भेजा जाना
(1) यदि इस अध्याय के अधीन अन्वेषण पर पुलिस थाने के भारसाधक अधिकारी को यह प्रतीत होता है कि यथापूर्वोक्त पर्याप्त साक्ष्य या युक्तियुक्त आधार है, तो ऐसा अधिकारी अभियुक्त को ऐसे मजिस्ट्रेट के पास, जो पुलिस रिपोर्ट पर अपराध का संज्ञान करने के लिए और अभियुक्त का विचारण करने या उसे विचारण के लिए सुपुर्द करने के लिए सशक्त है, अभिरक्षा के अधीन भेजेगा, अथवा यदि अपराध जमानतीय है और अभियुक्त प्रतिभूति देने में समर्थ है, तो उससे इस बात के लिए प्रतिभूति लेगा कि वह नियत दिन को ऐसे मजिस्ट्रेट के समक्ष हाजिर होगा और जब तक अन्यथा निदेश न दिया जाए तब तक ऐसे मजिस्ट्रेट के समक्ष दिन-प्रतिदिन उपस्थित रहेगा।
(2) जब पुलिस थाने का भारसाधक अधिकारी किसी अभियुक्त व्यक्ति को इस धारा के अधीन मजिस्ट्रेट के पास भेजता है या ऐसे मजिस्ट्रेट के समक्ष उसकी हाजिरी के लिए प्रतिभूति लेता है, तब वह ऐसे मजिस्ट्रेट के पास कोई ऐसा आयुध या अन्य वस्तु भेजेगा जिसका उसके समक्ष पेश किया जाना आवश्यक हो, और वह परिवादी से (यदि कोई हो) तथा उतने व्यक्तियों से, जितने उस अधिकारी को मामले के तथ्यों और परिस्थितियों से परिचित प्रतीत हों और जितने वह आवश्यक समझे, यह अपेक्षा करेगा कि वे मजिस्ट्रेट के समक्ष तद्द्वारा निदिष्ट रूप में हाजिर होने के लिए और अभियुक्त के विरुद्ध आरोप के मामले में, यथास्थिति, अभियोजन चलाने या साक्ष्य देने के लिए बंधपत्र निष्पादित करें।
(3) यदि बंधपत्र में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के न्यायालय का उल्लेख है, तो ऐसे न्यायालय के अंतर्गत कोई ऐसा न्यायालय भी समझा जाएगा जिसे ऐसा मजिस्ट्रेट जांच या विचारण के लिए मामला निर्देशित करे, परन्तु यह तब जब ऐसे निर्देशन की युक्तियुक्त सूचना ऐसे परिवादी या व्यक्तियों को दे दी जाए।
(4) वह अधिकारी, जिसकी उपस्थिति में बंधपत्र निष्पादित किया जाता है, उसकी एक प्रति उसे निष्पादित करने वाले व्यक्तियों में से एक को परिदत्त करेगा और तब मूल को अपनी रिपोर्ट सहित मजिस्ट्रेट के पास भेजेगा।
पूरा पढ़ें: CrPC §170(1) यदि इस अध्याय के अधीन अन्वेषण पर पुलिस थाने के भारसाधक अधिकारी को यह प्रतीत होता है कि यथापूर्वोक्त पर्याप्त साक्ष्य या युक्तियुक्त आधार है, तो ऐसा अधिकारी अभियुक्त को ऐसे मजिस्ट्रेट के पास, जो पुलिस रिपोर्ट पर अपराध का संज्ञान करने के लिए और अभियुक्त का विचारण करने या उसे विचारण के लिए सुपुर्द करने के लिए सशक्त है, अभिरक्षा के अधीन भेजेगा, अथवा यदि अपराध जमानतीय है और अभियुक्त प्रतिभूति देने में समर्थ है, तो उससे इस बात के लिए प्रतिभूति लेगा कि वह नियत दिन को ऐसे मजिस्ट्रेट के समक्ष हाजिर होगा और जब तक अन्यथा निदेश न दिया जाए तब तक ऐसे मजिस्ट्रेट के समक्ष दिन-प्रतिदिन उपस्थित रहेगा।
(2) जब पुलिस थाने का भारसाधक अधिकारी किसी अभियुक्त व्यक्ति को इस धारा के अधीन मजिस्ट्रेट के पास भेजता है या ऐसे मजिस्ट्रेट के समक्ष उसकी हाजिरी के लिए प्रतिभूति लेता है, तब वह ऐसे मजिस्ट्रेट के पास कोई ऐसा आयुध या अन्य वस्तु भेजेगा जिसका उसके समक्ष पेश किया जाना आवश्यक हो, और वह परिवादी से (यदि कोई हो) तथा उतने व्यक्तियों से, जितने उस अधिकारी को मामले के तथ्यों और परिस्थितियों से परिचित प्रतीत हों और जितने वह आवश्यक समझे, यह अपेक्षा करेगा कि वे मजिस्ट्रेट के समक्ष तद्द्वारा निदिष्ट रूप में हाजिर होने के लिए और अभियुक्त के विरुद्ध आरोप के मामले में, यथास्थिति, अभियोजन चलाने या साक्ष्य देने के लिए बंधपत्र निष्पादित करें।
(3) यदि बंधपत्र में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के न्यायालय का उल्लेख है, तो ऐसे न्यायालय के अंतर्गत कोई ऐसा न्यायालय भी समझा जाएगा जिसे ऐसा मजिस्ट्रेट जांच या विचारण के लिए मामला निर्देशित करे, परन्तु यह तब जब ऐसे निर्देशन की युक्तियुक्त सूचना ऐसे परिवादी या व्यक्तियों को दे दी जाए।
(4) वह अधिकारी, जिसकी उपस्थिति में बंधपत्र निष्पादित किया जाता है, उसकी एक प्रति उसे निष्पादित करने वाले व्यक्तियों में से एक को परिदत्त करेगा और तब मूल को अपनी रिपोर्ट सहित मजिस्ट्रेट के पास भेजेगा।
1 जुलाई 2024 से पहले दर्ज मामलों पर पुराना कानून लागू रहता है। यह जानकारी शैक्षिक है, कानूनी सलाह नहीं।

