पाठ लगभग अपरिवर्तित है
BNS धारा 350 (2) अब IPC धारा 488 है
माल से भरे किसी भी पात्र पर झूठा चिह्न बनाना।
पुराना कानून
BNS §350 (2)
माल से भरे किसी भी पात्र पर झूठा चिह्न बनाना।
(1) जो कोई भी माल से भरे किसी डिब्बे, पैकेज या अन्य पात्र पर इस प्रकार कोई झूठा चिह्न लगाता है जिससे किसी लोक सेवक या किसी अन्य व्यक्ति को यह विश्वास हो जाए कि उस पात्र में वह माल है जो वास्तव में नहीं है, या उसमें वह माल नहीं है जो वास्तव में है, या उस पात्र में रखा माल उसकी वास्तविक प्रकृति या गुणवत्ता से भिन्न है, तो जब तक वह यह सिद्ध न कर दे कि उसने धोखाधड़ी के इरादे के बिना कार्य किया है, उसे किसी भी प्रकार के कारावास से तीन वर्ष तक की अवधि के लिए, या जुर्माने से, या दोनों से दंडित किया जाएगा।
(2) जो कोई भी उपधारा (1) के अधीन निषिद्ध किसी भी तरीके से किसी झूठे चिह्न का उपयोग करता है, जब तक कि वह यह साबित न कर दे कि उसने धोखाधड़ी के इरादे के बिना कार्य किया है,
उसे इस प्रकार दंडित किया जाएगा मानो उसने उपधारा (1) के अंतर्गत अपराध किया हो।
पूरा पढ़ें: BNS §350 (2)(2) जो कोई भी उपधारा (1) के अधीन निषिद्ध किसी भी तरीके से किसी झूठे चिह्न का उपयोग करता है, जब तक कि वह यह साबित न कर दे कि उसने धोखाधड़ी के इरादे के बिना कार्य किया है,
उसे इस प्रकार दंडित किया जाएगा मानो उसने उपधारा (1) के अंतर्गत अपराध किया हो।
नया कानून
IPC §488
धारा 488 - किसी ऐसे मिथ्या चिह्न को उपयोग में लाने के लिए दण्ड
किसी ऐसे मिथ्या चिह्न को उपयोग में लाने के लिए दण्ड
कोई अन्तिम पूर्वगामी धारा द्वारा प्रतिषिद्ध किसी प्रकार से किसी ऐसे मिथ्या चिह्न का उपयोग करेगा, जब तक कि वह यह साबित न कर दे कि उसने वह कार्य कपट करने के आशय के बिना किया है, वह उसी प्रकार दण्डित किया जाएगा, मानो उसने उस धारा के विरुद्ध अपराध किया हो ।
1 1958 के अधिनियम सं0 43 की धारा 135 और अनुसूची द्वारा (25-11-1959 से) “किसी मिथ्या व्यापार चिह्न या” शब्दों का लोप किया गया ।
2 1958 के अधिनियम सं0 43 की धारा 135 और अनुसूची द्वारा (25-11-1959 से) “व्यापार चिह्न या” शब्दों का लोप किया गया ।
3 1958 के अधिनियम सं0 43 की धारा 135 और अनुसूची द्वारा (25-11-1959 से) मूल धारा के स्थान पर प्रतिस्थापित ।
4 1958 के अधिनियम सं0 43 की धारा 135 और अनुसूची द्वारा (25-11-1959 से) कतिपय शब्द के स्थान पर प्रतिस्थापित । भारतीय दंड संहिता, 1860 91
पूरा पढ़ें: IPC §488कोई अन्तिम पूर्वगामी धारा द्वारा प्रतिषिद्ध किसी प्रकार से किसी ऐसे मिथ्या चिह्न का उपयोग करेगा, जब तक कि वह यह साबित न कर दे कि उसने वह कार्य कपट करने के आशय के बिना किया है, वह उसी प्रकार दण्डित किया जाएगा, मानो उसने उस धारा के विरुद्ध अपराध किया हो ।
1 1958 के अधिनियम सं0 43 की धारा 135 और अनुसूची द्वारा (25-11-1959 से) “किसी मिथ्या व्यापार चिह्न या” शब्दों का लोप किया गया ।
2 1958 के अधिनियम सं0 43 की धारा 135 और अनुसूची द्वारा (25-11-1959 से) “व्यापार चिह्न या” शब्दों का लोप किया गया ।
3 1958 के अधिनियम सं0 43 की धारा 135 और अनुसूची द्वारा (25-11-1959 से) मूल धारा के स्थान पर प्रतिस्थापित ।
4 1958 के अधिनियम सं0 43 की धारा 135 और अनुसूची द्वारा (25-11-1959 से) कतिपय शब्द के स्थान पर प्रतिस्थापित । भारतीय दंड संहिता, 1860 91
1 जुलाई 2024 से पहले दर्ज मामलों पर पुराना कानून लागू रहता है। यह जानकारी शैक्षिक है, कानूनी सलाह नहीं।

