किशोर न्याय अधिनियम के अधीन जघन्य अपराध

न्यूनतम सात वर्ष या अधिक के दंड वाले अपराध। केवल इन्हीं में सोलह या सत्रह वर्ष के बालक का बोर्ड द्वारा प्रारंभिक निर्धारण होकर उसका वयस्क के रूप में विचारण हो सकता है (किशोर न्याय अधिनियम धारा 15 और 18(3))। शेष अपराध छोटे (तीन वर्ष तक) या गंभीर हैं।

130 परिणाम · किशोर न्याय अधिनियम धारा 2(33), शिल्पा मित्तल बनाम राज्य (2020) के साथ: जिस अपराध में कोई न्यूनतम दंड नहीं, या सात वर्ष से कम का न्यूनतम है, वह जघन्य नहीं है।

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कौन-सी संहिता लागू होगी?

प्रक्रिया: 1 जुलाई 2024 को या उसके बाद दर्ज हर मामले पर भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता लागू है; उस दिन पहले से लंबित अन्वेषण, जाँच या विचारण दंड प्रक्रिया संहिता के अधीन चलता रहता है (भा.ना.सु.सं. धारा 531(2)(क))। अपराध: 1 जुलाई 2024 को या उसके बाद किया गया कृत्य भारतीय न्याय संहिता के अधीन, उससे पहले का भारतीय दंड संहिता के अधीन।