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धारा 363 - व्यपहरण के लिए दण्ड
व्यपहरण के लिए दण्ड जो कोई भारत में से या विधिपूर्ण संरक्षकता में से किसी व्यक्ति का व्यपहरण करेगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा ।
पूरा पढ़ेंअपहरण।
(1) अपहरण दो प्रकार के होते हैं: भारत से अपहरण और वैधानिक संरक्षकता से अपहरण— (क) जो कोई भी किसी व्यक्ति को उसकी सहमति के बिना, या उस व्यक्ति की ओर से सहमति देने के लिए कानूनी रूप से अधिकृत किसी व्यक्ति की सहमति के बिना, भारत की सीमाओं से बाहर ले जाता है, तो उसे उस व्यक्ति का भारत से अपहरण करना कहा जाता है; (ख) जो कोई…
पूरा पढ़ेंधारा 363A - भीख मांगने के प्रयोजनों के लिए अप्राप्तवय का व्यपहरण का विकलांगीकरण
भीख मांगने के प्रयोजनों के लिए अप्राप्तवय का व्यपहरण का विकलांगीकरण (1) जो कोई किसी अप्राप्तवय का इसलिए व्यपहरण करेगा या अप्राप्तवय का विधिपूर्ण संरक्षक स्वयं न होते हुए अप्राप्तवय की अभिरक्षा इसलिए अभिप्राप्त करेगा कि ऐसा अप्राप्तवय भीख मांगने के प्रयोजनों के लिए नियोजित या प्रयुक्त किया जाए, वह दोनों में से किसी…
पूरा पढ़ेंभीख मांगने के उद्देश्य से किसी बच्चे का अपहरण करना या उसे अपंग करना।
(1) जो कोई किसी बच्चे का अपहरण करता है या, ऐसे बच्चे का वैध अभिभावक न होते हुए, उस बच्चे की अभिरक्षा प्राप्त करता है, ताकि ऐसे बच्चे को भीख मांगने के उद्देश्य से नियोजित या उपयोग किया जा सके, उसे कम से कम दस वर्ष के कठोर कारावास से दंडित किया जाएगा, जो आजीवन कारावास तक बढ़ाया जा सकता है, और वह जुर्माने का भी हकदार…
पूरा पढ़ें- IPC §363BNS §137(2)
धारा 363 - व्यपहरण के लिए दण्ड
अपहरण।
- IPC §363ABNS §139
धारा 363A - भीख मांगने के प्रयोजनों के लिए अप्राप्तवय का व्यपहरण का विकलांगीकरण
भीख मांगने के उद्देश्य से किसी बच्चे का अपहरण करना या उसे अपंग करना।
