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धारा 30. जुर्माना देने में व्यतिक्रम होने पर कारावास का दंडादेश
30. जुर्माना देने में व्यतिक्रम होने पर कारावास का दंडादेश (1) मजिस्ट्रेट का न्यायालय जुर्माना देने में व्यतिक्रम होने पर कारावास की ऐसी अवधि अधिनिर्णीत कर सकेगा, जो विधि द्वारा प्राधिकृत है: परन्तु वह अवधि— (क) धारा 29 के अधीन मजिस्ट्रेट की शक्तियों से अधिक न होगी; (ख) जहां कारावास मूल दंडादेश के भाग के रूप में…
पूरा पढ़ेंजुर्माना न भरने पर कारावास की सजा।
(1) मजिस्ट्रेट का न्यायालय जुर्माने का भुगतान न करने की स्थिति में ऐसी कारावास अवधि प्रदान कर सकता है जो कानून द्वारा अधिकृत हो: बशर्ते कि यह अवधि--- (क) धारा 23 के अधीन मजिस्ट्रेट की शक्तियों से अधिक नहीं है; (ख) जहां कारावास को मूल सजा के भाग के रूप में प्रदान किया गया है, वहां कारावास की अवधि के एक चौथाई से अधिक…
पूरा पढ़ेंधारा 36. पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों की शक्तियां
36. पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों की शक्तियां पुलिस थाने के भारसाधक अधिकारी से उच्चतर पंक्ति के पुलिस अधिकारी उस स्थानीय क्षेत्र भर में, जिसमें वे नियुक्त किए गए हैं, वे ही शक्तियां प्रयोग कर सकेंगे, जो ऐसा अधिकारी अपने थाने की सीमाओं के भीतर प्रयोग कर सकता है।
पूरा पढ़ेंपुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों की शक्तियां।
पुलिस थाने के प्रभारी अधिकारी से उच्च पदस्थ पुलिस अधिकारी, अपने नियुक्त स्थानीय क्षेत्र में, उन सभी शक्तियों का प्रयोग कर सकते हैं, जिनका प्रयोग वह अधिकारी अपने थाने की सीमाओं के भीतर कर सकता है।
पूरा पढ़ेंधारा 265L. अध्याय का लागू न होना
265L. अध्याय का लागू न होना इस अध्याय की कोई बात किसी ऐसे किशोर या बालक को लागू नहीं होगी जो किशोर न्याय (बालकों की देखरेख और संरक्षण) अधिनियम, 2000 (2000 का 56) की धारा 2 के खंड (ट) में यथापरिभाषित है।
पूरा पढ़ेंअध्याय का लागू न होना।
इस अध्याय में कोई भी बात किशोर न्याय (देखभाल और संरक्षण) अधिनियम, 2015 (2 ऑफ 2016) की धारा 2 में परिभाषित किसी किशोर या बच्चे पर लागू नहीं होगी।
पूरा पढ़ेंधारा 266. परिभाषाएं
266. परिभाषाएं इस अध्याय में,— (क) "निरुद्ध" के अंतर्गत निवारक निरोध के लिए उपबंध करने वाली किसी विधि के अधीन निरुद्ध होना भी है; (ख) "कारागार" के अंतर्गत निम्नलिखित भी हैं,— (i) कोई ऐसा स्थान, जिसे राज्य सरकार ने, साधारण या विशेष आदेश द्वारा, सहायक जेल घोषित किया है; (ii) कोई सुधारालय, बोर्स्टल संस्था या वैसी ही…
पूरा पढ़ेंपरिभाषाएँ।
इस अध्याय में,--- (क) "हिरासत में लिया गया" में निवारक हिरासत का प्रावधान करने वाले किसी भी कानून के तहत हिरासत में लिया गया शामिल है; (ख) "कारागार" में निम्नलिखित शामिल हैं,--- (i) कोई भी स्थान जिसे राज्य सरकार द्वारा सामान्य या विशेष आदेश द्वारा सहायक कारागार घोषित किया गया हो; (ii) कोई सुधारगृह, बोर्स्टल संस्था या…
पूरा पढ़ेंधारा 267. बंदियों की उपस्थिति अपेक्षित करने की शक्ति
267. बंदियों की उपस्थिति अपेक्षित करने की शक्ति (1) जब कभी इस संहिता के अधीन किसी जांच, विचारण या अन्य कार्यवाही के दौरान किसी दंड न्यायालय को यह प्रतीत होता है कि— (क) किसी कारागार में परिरुद्ध या निरुद्ध व्यक्ति को किसी अपराध के आरोप का उत्तर देने के लिए, या उसके विरुद्ध किसी कार्यवाही के प्रयोजन के लिए, न्यायालय के…
पूरा पढ़ेंकैदियों की उपस्थिति अनिवार्य करने का अधिकार।
(1) जब भी, इस संहिता के अंतर्गत किसी जाँच, परीक्षण या कार्यवाही के दौरान, किसी आपराधिक न्यायालय को यह प्रतीत हो कि,--- (क) कि किसी कारागार में बंद या हिरासत में रखे गए व्यक्ति को किसी अपराध के आरोप का उत्तर देने के लिए या उसके विरुद्ध किसी कार्यवाही के प्रयोजन से न्यायालय के समक्ष लाया जाए; या (ख) न्याय के उद्देश्यों…
पूरा पढ़ेंधारा 268. कतिपय व्यक्तियों को धारा 267 के प्रवर्तन से अपवर्जित करने की राज्य सरकार की शक्ति
268. कतिपय व्यक्तियों को धारा 267 के प्रवर्तन से अपवर्जित करने की राज्य सरकार की शक्ति (1) राज्य सरकार, उपधारा (2) में विनिर्दिष्ट बातों को ध्यान में रखते हुए, किसी भी समय, साधारण या विशेष आदेश द्वारा, यह निदेश दे सकेगी कि किसी व्यक्ति को या व्यक्तियों के किसी वर्ग को उस कारागार से, जिसमें वह या वे परिरुद्ध या निरुद्ध…
पूरा पढ़ेंधारा 302 के संचालन से कुछ व्यक्तियों को बाहर करने की राज्य सरकार या केंद्र सरकार की शक्ति।
(1) राज्य सरकार या केंद्र सरकार, जैसा भी मामला हो, उपधारा (2) में निर्दिष्ट मामलों को ध्यान में रखते हुए, किसी भी समय सामान्य या विशेष आदेश द्वारा यह निर्देश दे सकती है कि किसी व्यक्ति या व्यक्तियों के वर्ग को उस कारागार से नहीं हटाया जाएगा जिसमें वे बंद या हिरासत में हैं, और इसके बाद, जब तक यह आदेश लागू रहता है, धारा…
पूरा पढ़ेंधारा 269. कुछ आकस्मिकताओं में कारागार के भारसाधक अधिकारी द्वारा आदेश का पालन करने से विरत रहना
269. कुछ आकस्मिकताओं में कारागार के भारसाधक अधिकारी द्वारा आदेश का पालन करने से विरत रहना जहां वह व्यक्ति, जिसके बारे में धारा 267 के अधीन आदेश दिया गया है,— (क) रुग्णता या अंगशैथिल्य के कारण कारागार से हटाए जाने के लिए अयोग्य है; या (ख) विचारण के लिए सुपुर्दगी के अधीन है या विचारण लंबित रहने तक अथवा प्रारंभिक अन्वेषण…
पूरा पढ़ेंकुछ विशेष परिस्थितियों में कारागार प्रभारी अधिकारी को आदेश का पालन करने से परहेज करने का अधिकार है।
जहां वह व्यक्ति जिसके संबंध में धारा 302 के तहत आदेश दिया गया है--- (क) बीमारी या दुर्बलता के कारण कारागार से निकाले जाने के लिए अयोग्य है; या (ख) मुकदमे की सुनवाई के लिए हिरासत में है या मुकदमे की सुनवाई लंबित रहने तक या प्रारंभिक जांच लंबित रहने तक हिरासत में है; या (ग) वह ऐसी अवधि के लिए हिरासत में है जो आदेश का…
पूरा पढ़ेंधारा 270. बंदी का न्यायालय में अभिरक्षा में लाया जाना
270. बंदी का न्यायालय में अभिरक्षा में लाया जाना धारा 269 के उपबंधों के अधीन रहते हुए, कारागार का भारसाधक अधिकारी, धारा 267 की उपधारा (1) के अधीन किए गए और, जहां आवश्यक हो वहां, उसकी उपधारा (2) के अधीन सम्यक् रूप से प्रतिहस्ताक्षरित आदेश के परिदान पर, आदेश में नामित व्यक्ति को उस न्यायालय में ले जाएगा जिसमें उसकी…
पूरा पढ़ेंकैदी को हिरासत में अदालत में लाया जाएगा।
धारा 304 के प्रावधानों के अधीन रहते हुए, कारागार प्रभारी अधिकारी, धारा 302 की उपधारा (1) के तहत जारी किए गए और आवश्यक होने पर उसकी उपधारा (2) के तहत विधिवत प्रतिहस्ताक्षरित आदेश की प्राप्ति पर, आदेश में नामित व्यक्ति को उस न्यायालय में ले जाने की व्यवस्था करेगा जिसमें उसकी उपस्थिति आवश्यक है, ताकि वह आदेश में उल्लिखित…
पूरा पढ़ेंधारा 271. कारागार में साक्षी की परीक्षा के लिए कमीशन निकालने की शक्ति
271. कारागार में साक्षी की परीक्षा के लिए कमीशन निकालने की शक्ति इस अध्याय के उपबंध, किसी कारागार में परिरुद्ध या निरुद्ध किसी व्यक्ति की साक्षी के रूप में परीक्षा के लिए धारा 284 के अधीन कमीशन निकालने की न्यायालय की शक्ति पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना होंगे; और अध्याय 23 के भाग ख के उपबंध, कारागार में ऐसे किसी व्यक्ति…
पूरा पढ़ेंजेल में बंद गवाहों की जांच के लिए आयोग जारी करने का अधिकार।
इस अध्याय के प्रावधान न्यायालय की धारा 319 के तहत किसी कारागार में बंद या हिरासत में लिए गए व्यक्ति की गवाह के रूप में जांच के लिए कमीशन जारी करने की शक्ति पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं डालेंगे; और अध्याय 25 के भाग बी के प्रावधान कारागार में बंद किसी भी व्यक्ति की कमीशन पर जांच के संबंध में उसी प्रकार लागू होंगे जैसे वे…
पूरा पढ़ेंधारा 272. न्यायालयों की भाषा
272. न्यायालयों की भाषा राज्य सरकार यह अवधारित कर सकेगी कि इस संहिता के प्रयोजनों के लिए, उच्च न्यायालय से भिन्न, राज्य के भीतर के हर न्यायालय की भाषा कौन सी होगी।
पूरा पढ़ेंन्यायालयों की भाषा।
राज्य सरकार यह निर्धारित कर सकती है कि इस संहिता के प्रयोजनों के लिए, उच्च न्यायालय के अतिरिक्त राज्य के प्रत्येक न्यायालय की भाषा क्या होगी।
पूरा पढ़ेंधारा 273. साक्ष्य का अभियुक्त की उपस्थिति में लिया जाना
273. साक्ष्य का अभियुक्त की उपस्थिति में लिया जाना जैसा अन्यथा अभिव्यक्त रूप से उपबंधित है उसके सिवाय, विचारण या अन्य कार्यवाही के दौरान लिया गया सब साक्ष्य अभियुक्त की उपस्थिति में, अथवा जब उसकी व्यक्तिगत हाजिरी अभिमुक्त कर दी गई हो तब, उसके प्लीडर की उपस्थिति में लिया जाएगा। स्पष्टीकरण—इस धारा में "अभियुक्त" के…
पूरा पढ़ेंअभियुक्त की उपस्थिति में साक्ष्य लिए जाएंगे।
जब तक कि अन्यथा स्पष्ट रूप से प्रावधान न किया गया हो, मुकदमे या अन्य कार्यवाही के दौरान लिए गए सभी साक्ष्य आरोपी की उपस्थिति में लिए जाएंगे, या, जब उसकी व्यक्तिगत उपस्थिति से छूट दी गई हो, तो उसके वकील की उपस्थिति में, जिसमें ऑडियो-वीडियो इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों के माध्यम से भी, राज्य सरकार द्वारा अधिसूचित किए जाने वाले…
पूरा पढ़ेंधारा 274. समन-मामलों और जांचों में अभिलेख
274. समन-मामलों और जांचों में अभिलेख (1) मजिस्ट्रेट के समक्ष विचारित सब समन-मामलों में, धारा 145 से धारा 148 तक (दोनों सहित) के अधीन सब जांचों में, और धारा 446 के अधीन सब कार्यवाहियों में, जो विचारण के दौरान की गई कार्यवाहियों से भिन्न हैं, मजिस्ट्रेट, ज्यों-ज्यों हर साक्षी की परीक्षा आगे बढ़ती है, त्यों-त्यों…
पूरा पढ़ेंसमन मामलों और पूछताछों में दर्ज रिकॉर्ड।
(1) मजिस्ट्रेट के समक्ष विचारणित सभी समन मामलों में, धारा 164 से 167 (दोनों सहित) के अंतर्गत सभी जाँचों में, और धारा 491 के अंतर्गत मुकदमे की कार्यवाही के अलावा अन्य सभी कार्यवाहियों में, मजिस्ट्रेट प्रत्येक गवाह की परीक्षा आगे बढ़ने पर न्यायालय की भाषा में साक्ष्य के सार का एक ज्ञापन तैयार करेगा: बशर्ते कि यदि…
पूरा पढ़ेंधारा 300. एक बार दोषसिद्ध या दोषमुक्त किए गए व्यक्ति का उसी अपराध के लिए विचारण न किया जाना
300. एक बार दोषसिद्ध या दोषमुक्त किए गए व्यक्ति का उसी अपराध के लिए विचारण न किया जाना (1) जिस व्यक्ति का किसी अपराध के लिए सक्षम अधिकारिता वाले न्यायालय द्वारा एक बार विचारण किया जा चुका है और जो ऐसे अपराध के लिए दोषसिद्ध या दोषमुक्त किया जा चुका है, वह, जब तक ऐसी दोषसिद्धि या दोषमुक्ति प्रवृत्त रहती है, न तो उसी…
पूरा पढ़ेंएक बार दोषी ठहराए जाने या बरी किए जाने वाले व्यक्ति पर उसी अपराध के लिए मुकदमा नहीं चलाया जा सकता।
(1) कोई व्यक्ति जिस पर सक्षम न्यायालय द्वारा किसी अपराध के लिए एक बार मुकदमा चलाया गया हो और उसे उस अपराध के लिए दोषी ठहराया गया हो या बरी किया गया हो, जब तक कि ऐसा दोषसिद्धि या बरी होना प्रभावी रहता है, उस पर उसी अपराध के लिए पुनः मुकदमा नहीं चलाया जाएगा, न ही उन्हीं तथ्यों के आधार पर किसी अन्य अपराध के लिए जिसके लिए…
पूरा पढ़ेंधारा 301. लोक अभियोजकों द्वारा उपसंजाति
301. लोक अभियोजकों द्वारा उपसंजाति (1) किसी मामले का भारसाधक लोक अभियोजक या सहायक लोक अभियोजक किसी ऐसे न्यायालय के समक्ष, जिसमें वह मामला जांच, विचारण या अपील के अधीन है, बिना किसी लिखित प्राधिकार के उपसंजात हो सकेगा और पक्षकथन कर सकेगा। (2) यदि ऐसे किसी मामले में कोई प्राइवेट व्यक्ति किसी न्यायालय में किसी व्यक्ति का…
पूरा पढ़ेंलोक अभियोजकों की उपस्थिति।
(1) किसी मामले के प्रभारी लोक अभियोजक या सहायक लोक अभियोजक किसी भी न्यायालय के समक्ष बिना किसी लिखित प्राधिकरण के उपस्थित हो सकते हैं और पैरवी कर सकते हैं जिसमें वह मामला जांच, परीक्षण या अपील के अधीन है। (2) यदि किसी ऐसे मामले में कोई निजी व्यक्ति किसी न्यायालय में किसी व्यक्ति पर मुकदमा चलाने के लिए अपने वकील को…
पूरा पढ़ेंअभियोजन चलाने की अनुमति।
(1) किसी मामले की जांच या सुनवाई करने वाला कोई मजिस्ट्रेट, निरीक्षक से नीचे के रैंक के पुलिस अधिकारी के अलावा किसी अन्य व्यक्ति को अभियोजन चलाने की अनुमति दे सकता है; लेकिन महाधिवक्ता या सरकारी अधिवक्ता या लोक अभियोजक या सहायक लोक अभियोजक के अलावा कोई भी व्यक्ति ऐसी अनुमति के बिना ऐसा करने का हकदार नहीं होगा। बशर्ते…
पूरा पढ़ेंअभियोजन चलाने की अनुमति।
(1) किसी मामले की जांच या सुनवाई करने वाला कोई मजिस्ट्रेट, निरीक्षक से नीचे के रैंक के पुलिस अधिकारी के अलावा किसी अन्य व्यक्ति को अभियोजन चलाने की अनुमति दे सकता है; लेकिन महाधिवक्ता या सरकारी अधिवक्ता या लोक अभियोजक या सहायक लोक अभियोजक के अलावा कोई भी व्यक्ति ऐसी अनुमति के बिना ऐसा करने का हकदार नहीं होगा। बशर्ते…
पूरा पढ़ेंजिस व्यक्ति के विरुद्ध कार्यवाही शुरू की गई है, उसे बचाव का अधिकार है।
किसी आपराधिक न्यायालय के समक्ष किसी अपराध के आरोपी व्यक्ति को, या जिसके विरुद्ध इस संहिता के अंतर्गत कार्यवाही शुरू की गई है, उसे अपनी पसंद के वकील द्वारा बचाव किए जाने का अधिकार है।
पूरा पढ़ेंजिस व्यक्ति के विरुद्ध कार्यवाही शुरू की गई है, उसे बचाव का अधिकार है।
किसी आपराधिक न्यायालय के समक्ष किसी अपराध के आरोपी व्यक्ति को, या जिसके विरुद्ध इस संहिता के अंतर्गत कार्यवाही शुरू की गई हो, उसे अपनी पसंद के वकील द्वारा बचाव का अधिकार है।
पूरा पढ़ेंधारा 304. कतिपय मामलों में राज्य के व्यय पर अभियुक्त को विधिक सहायता
304. कतिपय मामलों में राज्य के व्यय पर अभियुक्त को विधिक सहायता (1) जहां सेशन न्यायालय के समक्ष किसी विचारण में अभियुक्त का प्रतिनिधित्व किसी प्लीडर द्वारा नहीं किया जाता है और जहां न्यायालय को यह प्रतीत होता है कि अभियुक्त के पास प्लीडर नियोजित करने के लिए पर्याप्त साधन नहीं हैं, वहां न्यायालय राज्य के व्यय पर उसकी…
पूरा पढ़ेंकुछ मामलों में राज्य के खर्चे पर अभियुक्तों को कानूनी सहायता प्रदान की जाती है।
(1) जहां किसी न्यायालय के समक्ष मुकदमे या अपील में अभियुक्त का प्रतिनिधित्व किसी अधिवक्ता द्वारा नहीं किया जाता है, और जहां न्यायालय को यह प्रतीत होता है कि अभियुक्त के पास अधिवक्ता नियुक्त करने के लिए पर्याप्त साधन नहीं हैं, तो न्यायालय राज्य के खर्च पर उसकी रक्षा के लिए एक अधिवक्ता नियुक्त करेगा। (2) उच्च न्यायालय,…
पूरा पढ़ेंधारा 305. जब निगम या रजिस्ट्रीकृत सोसाइटी अभियुक्त है तब प्रक्रिया
305. जब निगम या रजिस्ट्रीकृत सोसाइटी अभियुक्त है तब प्रक्रिया (1) इस धारा में, "निगम" से निगमित कंपनी या अन्य निगमित निकाय अभिप्रेत है, और इसके अंतर्गत सोसाइटी रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1860 (1860 का 21) के अधीन रजिस्ट्रीकृत सोसाइटी भी है। (2) जहां कोई निगम किसी जांच या विचारण में अभियुक्त व्यक्ति है या अभियुक्त…
पूरा पढ़ेंनिगम या पंजीकृत संस्था के आरोपी होने पर अपनाई जाने वाली प्रक्रिया।
(1) इस धारा में, "निगम" से तात्पर्य निगमित कंपनी या अन्य निगमित निकाय से है, और इसमें सोसायटी पंजीकरण अधिनियम, 1860 (21 ऑफ 1860) के तहत पंजीकृत सोसायटी शामिल है। (2) जहाँ कोई निगम किसी जाँच या मुकदमे में आरोपी व्यक्ति या आरोपियों में से एक है, तो वह जाँच या मुकदमे के उद्देश्य से एक प्रतिनिधि नियुक्त कर सकता है और ऐसी…
पूरा पढ़ेंधारा 306. सहअपराधी को क्षमादान
306. सहअपराधी को क्षमादान (1) ऐसे किसी व्यक्ति का साक्ष्य अभिप्राप्त करने की दृष्टि से, जिसके बारे में यह समझा जाता है कि वह उस अपराध में, जिसको यह धारा लागू होती है, प्रत्यक्षतः या अप्रत्यक्षतः संपृक्त रहा है या उसकी जानकारी रखता रहा है, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट या महानगर मजिस्ट्रेट, उस अपराध के अन्वेषण या जांच अथवा…
पूरा पढ़ेंसह-अपराधी को क्षमादान की पेशकश।
(1) इस धारा के अंतर्गत आने वाले किसी अपराध में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से शामिल या उससे परिचित माने जाने वाले किसी व्यक्ति का साक्ष्य प्राप्त करने के उद्देश्य से, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, अपराध की जांच या पूछताछ के किसी भी चरण में, और प्रथम श्रेणी का मजिस्ट्रेट जो अपराध की जांच या सुनवाई कर रहा हो, जांच या सुनवाई…
पूरा पढ़ेंधारा 307. क्षमादान का निदेश देने की शक्ति
307. क्षमादान का निदेश देने की शक्ति किसी मामले के सुपुर्द किए जाने के पश्चात् किन्तु निर्णय पारित किए जाने से पहले किसी भी समय, वह न्यायालय, जिसे सुपुर्दगी की गई है, विचारण में ऐसे किसी व्यक्ति का साक्ष्य अभिप्राप्त करने की दृष्टि से, जिसके बारे में यह समझा जाता है कि वह ऐसे किसी अपराध में प्रत्यक्षतः या अप्रत्यक्षतः…
पूरा पढ़ेंक्षमादान देने का निर्देश देने की शक्ति।
किसी मामले को सौंपे जाने के बाद लेकिन निर्णय सुनाए जाने से पहले किसी भी समय, जिस न्यायालय को मामला सौंपा गया है, वह किसी ऐसे व्यक्ति के साक्ष्य प्राप्त करने के उद्देश्य से, जिसके बारे में यह माना जाता है कि वह प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से ऐसे किसी अपराध में शामिल था या उससे अवगत था, ऐसे व्यक्ति को उसी शर्त पर…
पूरा पढ़ेंधारा 308. क्षमादान की शर्तों का पालन न करने वाले व्यक्ति का विचारण
308. क्षमादान की शर्तों का पालन न करने वाले व्यक्ति का विचारण (1) जहां धारा 306 या धारा 307 के अधीन किए गए क्षमादान के प्रस्थापन को स्वीकार कर लेने वाले किसी व्यक्ति के बारे में लोक अभियोजक यह प्रमाणित करता है कि उसकी राय में ऐसे व्यक्ति ने, या तो किसी आवश्यक बात को जानबूझकर छिपाकर या मिथ्या साक्ष्य देकर, उस शर्त का…
पूरा पढ़ेंक्षमादान की शर्तों का पालन न करने वाले व्यक्ति का मुकदमा।
(1) जहां किसी ऐसे व्यक्ति के संबंध में, जिसने धारा 343 या धारा 344 के तहत क्षमादान का प्रस्ताव स्वीकार कर लिया है, लोक अभियोजक यह प्रमाणित करता है कि उसकी राय में ऐसे व्यक्ति ने जानबूझकर किसी आवश्यक बात को छुपाकर या झूठी गवाही देकर उस शर्त का पालन नहीं किया है जिस पर प्रस्ताव दिया गया था, तो ऐसे व्यक्ति पर उस अपराध के…
पूरा पढ़ेंधारा 309. कार्यवाहियों को मुल्तवी या स्थगित करने की शक्ति
309. कार्यवाहियों को मुल्तवी या स्थगित करने की शक्ति (1) प्रत्येक जांच या विचारण में कार्यवाहियां यथासंभव शीघ्रता से की जाएंगी और विशिष्टतया, जब साक्षियों की परीक्षा एक बार प्रारंभ हो जाती है, तब वह तब तक दिन-प्रतिदिन जारी रहेगी जब तक कि उपस्थित सभी साक्षियों की परीक्षा न हो जाए, जब तक कि न्यायालय, अभिलिखित किए जाने…
पूरा पढ़ेंकार्यवाही को स्थगित करने या टालने का अधिकार।
(1) प्रत्येक जांच या मुकदमे में कार्यवाही प्रतिदिन के आधार पर तब तक जारी रहेगी जब तक कि उपस्थित सभी गवाहों की जांच न हो जाए, जब तक कि न्यायालय को अगले दिन से आगे कार्यवाही स्थगित करना आवश्यक न लगे, जिसके कारण दर्ज किए जाएंगे: बशर्ते कि जब जांच या मुकदमा भारतीय न्याय संहिता, 2023 (45 ऑफ 2023) की धारा 64, धारा 65, धारा…
पूरा पढ़ें- CRPC §30BNSS §24
धारा 30. जुर्माना देने में व्यतिक्रम होने पर कारावास का दंडादेश
जुर्माना न भरने पर कारावास की सजा।
- CRPC §36BNSS §30
धारा 36. पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों की शक्तियां
पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों की शक्तियां।
- CRPC §265LBNSS §300
धारा 265L. अध्याय का लागू न होना
अध्याय का लागू न होना।
- CRPC §266BNSS §301
धारा 266. परिभाषाएं
परिभाषाएँ।
- CRPC §267BNSS §302
धारा 267. बंदियों की उपस्थिति अपेक्षित करने की शक्ति
कैदियों की उपस्थिति अनिवार्य करने का अधिकार।
- CRPC §268BNSS §303
धारा 268. कतिपय व्यक्तियों को धारा 267 के प्रवर्तन से अपवर्जित करने की राज्य सरकार की शक्ति
धारा 302 के संचालन से कुछ व्यक्तियों को बाहर करने की राज्य सरकार या केंद्र सरकार की शक्ति।
- CRPC §269BNSS §304
धारा 269. कुछ आकस्मिकताओं में कारागार के भारसाधक अधिकारी द्वारा आदेश का पालन करने से विरत रहना
कुछ विशेष परिस्थितियों में कारागार प्रभारी अधिकारी को आदेश का पालन करने से परहेज करने का अधिकार है।
- CRPC §270BNSS §305
धारा 270. बंदी का न्यायालय में अभिरक्षा में लाया जाना
कैदी को हिरासत में अदालत में लाया जाएगा।
- CRPC §271BNSS §306
धारा 271. कारागार में साक्षी की परीक्षा के लिए कमीशन निकालने की शक्ति
जेल में बंद गवाहों की जांच के लिए आयोग जारी करने का अधिकार।
- CRPC §272BNSS §307
धारा 272. न्यायालयों की भाषा
न्यायालयों की भाषा।
- CRPC §273BNSS §308
धारा 273. साक्ष्य का अभियुक्त की उपस्थिति में लिया जाना
अभियुक्त की उपस्थिति में साक्ष्य लिए जाएंगे।
- CRPC §274BNSS §309
धारा 274. समन-मामलों और जांचों में अभिलेख
समन मामलों और पूछताछों में दर्ज रिकॉर्ड।
- CRPC §300BNSS §337
धारा 300. एक बार दोषसिद्ध या दोषमुक्त किए गए व्यक्ति का उसी अपराध के लिए विचारण न किया जाना
एक बार दोषी ठहराए जाने या बरी किए जाने वाले व्यक्ति पर उसी अपराध के लिए मुकदमा नहीं चलाया जा सकता।
- CRPC §301BNSS §338
धारा 301. लोक अभियोजकों द्वारा उपसंजाति
लोक अभियोजकों की उपस्थिति।
- CRPC §302BNSS §339
अभियोजन चलाने की अनुमति।
- CRPC §303BNSS §340
जिस व्यक्ति के विरुद्ध कार्यवाही शुरू की गई है, उसे बचाव का अधिकार है।
- CRPC §304BNSS §341
धारा 304. कतिपय मामलों में राज्य के व्यय पर अभियुक्त को विधिक सहायता
कुछ मामलों में राज्य के खर्चे पर अभियुक्तों को कानूनी सहायता प्रदान की जाती है।
- CRPC §305BNSS §342
धारा 305. जब निगम या रजिस्ट्रीकृत सोसाइटी अभियुक्त है तब प्रक्रिया
निगम या पंजीकृत संस्था के आरोपी होने पर अपनाई जाने वाली प्रक्रिया।
- CRPC §306BNSS §343
धारा 306. सहअपराधी को क्षमादान
सह-अपराधी को क्षमादान की पेशकश।
- CRPC §307BNSS §344
धारा 307. क्षमादान का निदेश देने की शक्ति
क्षमादान देने का निर्देश देने की शक्ति।
- CRPC §308BNSS §345
धारा 308. क्षमादान की शर्तों का पालन न करने वाले व्यक्ति का विचारण
क्षमादान की शर्तों का पालन न करने वाले व्यक्ति का मुकदमा।
- CRPC §309BNSS §346
धारा 309. कार्यवाहियों को मुल्तवी या स्थगित करने की शक्ति
कार्यवाही को स्थगित करने या टालने का अधिकार।

